बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: NDA की सभी 5 सीटों पर जीत, नीतीश कुमार और नितिन नवीन राज्यसभा पहुंचे
बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने बड़ी राजनीतिक जीत हासिल करते हुए सभी पांच सीटों पर कब्जा कर लिया है।
राज्यसभा चुनाव 2026 में महागठबंधन को झटका, कई विधायक वोटिंग से रहे अनुपस्थित; दूसरी वरीयता के वोटों से NDA ने पांचवीं सीट भी अपने नाम की
पटना: बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने बड़ी राजनीतिक जीत हासिल करते हुए सभी पांच सीटों पर कब्जा कर लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने आधिकारिक तौर पर इस जीत की घोषणा की। इस परिणाम के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए हैं।
राज्यसभा की इन पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे, जिसके कारण मतदान की स्थिति बनी। चुनाव में जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 41 विधायकों के वोट की आवश्यकता थी। NDA के पास विधानसभा में 202 विधायकों का मजबूत समर्थन था, जिसके चलते गठबंधन के चार उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही थी।
चार सीटों पर NDA की आसान जीत

मतगणना के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन को 44-44 वोट मिले। वहीं केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को 42-42 वोट प्राप्त हुए। इन चारों नेताओं की जीत पहले से ही लगभग तय मानी जा रही थी क्योंकि NDA के पास पर्याप्त संख्या में विधायक मौजूद थे।
पांचवीं सीट पर दिलचस्प मुकाबला
सबसे अधिक रोमांच पांचवीं सीट को लेकर देखने को मिला, जहां भाजपा के प्रदेश महामंत्री शिवेश राम और महागठबंधन के उम्मीदवार एडी सिंह (अमरेंद्र धारी सिंह) के बीच सीधा मुकाबला था। पहले वरीयता के वोटों की गिनती में शिवेश राम को 30 वोट मिले, जबकि एडी सिंह को अधिक समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही थी।

हालांकि दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती में शिवेश राम ने बाजी पलट दी और एडी सिंह को हराकर पांचवीं सीट भी NDA के खाते में डाल दी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एडी सिंह को 37 वोट मिले, जबकि राजद विधायक सर्वजीत ने दावा किया कि उनके उम्मीदवार को 38 वोट मिले हैं।
महागठबंधन के कई विधायक वोटिंग से रहे दूर
इस चुनाव में महागठबंधन को बड़ा झटका तब लगा जब उनके कई विधायक वोटिंग के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार महागठबंधन की तरफ से केवल 37 विधायकों ने ही मतदान किया, जबकि जीत के लिए कम से कम 41 वोटों की जरूरत थी।
राजद के ढाका से विधायक फैसल रहमान मतदान में शामिल नहीं हो सके। पार्टी नेताओं ने उनसे लगातार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन वोटिंग खत्म होने तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया। इसके अलावा कांग्रेस के तीन विधायक भी मतदान के लिए नहीं पहुंचे। इनमें मनोज विश्वास और सुरेंद्र कुशवाहा से भी पार्टी का संपर्क नहीं हो पाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर महागठबंधन के सभी विधायक मतदान में हिस्सा लेते तो पांचवीं सीट पर मुकाबला और कड़ा हो सकता था।
जेल से वोट डालने पहुंचे अनंत सिंह
राज्यसभा चुनाव के दौरान मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह भी चर्चा में रहे। वे जेल से विशेष अनुमति लेकर वोट डालने विधानसभा पहुंचे। मतदान के बाद उन्होंने भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान भी किया, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

वोटिंग से पहले रिटर्निंग ऑफिसर का ट्रांसफर
चुनाव से कुछ घंटे पहले ही बिहार विधानसभा की सचिव और चुनाव की रिटर्निंग ऑफिसर ख्याति सिंह का ट्रांसफर आदेश जारी हुआ। उन्हें पटना हाईकोर्ट में ओएसडी के पद पर नियुक्त किया गया है। हालांकि चुनाव प्रक्रिया पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
ड्रॉप कोटा फॉर्मूला से तय हुआ जीत का आंकड़ा
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक वोटों की संख्या चुनाव आयोग के ड्रॉप कोटा फॉर्मूले के आधार पर तय की जाती है। इस फॉर्मूले के अनुसार कोटा (Q) = कुल वैध वोट / (सीटें + 1) होता है।
बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं और पांच सीटों के लिए चुनाव हुआ। इस हिसाब से जीत का कोटा 40.5 यानी 41 वोट तय किया गया।
NDA के पास 202 विधायक थे। इस आधार पर गठबंधन आसानी से चार सीटें जीत सकता था क्योंकि चार सीटों के लिए 164 वोट की जरूरत होती है। इसके बाद भी NDA के पास 38 वोट बचते थे, जिससे पांचवीं सीट के लिए उसे केवल तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी।
महागठबंधन की रणनीति रही कमजोर
महागठबंधन के उम्मीदवार एडी सिंह के पास राजद के 25, कांग्रेस के 6, माले के 2 और CPM तथा IIP के एक-एक विधायक का समर्थन था। इस तरह कुल 35 वोट उनके पास थे। अगर एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायक का समर्थन उन्हें मिल जाता तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता था।
लेकिन महागठबंधन के चार विधायकों के वोटिंग में शामिल न होने से उनकी रणनीति कमजोर पड़ गई और अंततः NDA ने पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर ली।
NDA की जीत से बिहार की राजनीति में संदेश
राज्यसभा चुनाव के नतीजों को बिहार की राजनीति में NDA के मजबूत संगठन और रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा नेतृत्व की इस जीत से गठबंधन की राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत का असर आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
