तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़: AIADMK पर TVK सरकार को समर्थन देने का बढ़ता दबाव

AIADMK

AIADMK (अन्नाद्रमुक) ने हाल ही में साफ तौर पर कहा था कि वह Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) की संभावित सरकार को समर्थन नहीं देगी। लेकिन अब पार्टी के भीतर और बाहर से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में इस समय हलचल तेज हो गई है। AIADMK (अन्नाद्रमुक) ने हाल ही में साफ तौर पर कहा था कि वह Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) की संभावित सरकार को समर्थन नहीं देगी। लेकिन अब पार्टी के भीतर और बाहर से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। बदलते घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को और दिलचस्प बना दिया है।

अंदरूनी और बाहरी दबाव से बदली हवा

सोमवार (4 मई 2026) को AIADMK ने टीवीके को समर्थन न देने की बात कही थी। हालांकि, इसके अगले ही दिन पार्टी के भीतर से अलग सुर सुनाई देने लगे। ललगुड़ी से नव-निर्वाचित विधायक लीमा रोज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि AIADMK और TVK के बीच सरकार गठन को लेकर बातचीत चल रही है।

हालांकि, बुधवार तक लीमा रोज मीडिया से संपर्क में नहीं आईं, जिससे स्थिति और अस्पष्ट हो गई है। इस बीच, दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं के बीच बैठक की खबरों ने अटकलों को और तेज कर दिया।

पलानीस्वामी और TVK नेताओं की मुलाकात

AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी और TVK के महासचिव ‘बुसी’ एन. आनंद के बीच बैठक हुई है। हालांकि, इस बैठक का एजेंडा और नतीजे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे बेहद अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, यह मुलाकात संभावित गठबंधन या समर्थन के रास्ते खोल सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

पार्टी के भीतर गुटबाजी के संकेत

AIADMK के अंदर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। खबर है कि पार्टी के कई विधायक पूर्व कानून मंत्री सी.वे. शन्मुगम के नेतृत्व में सत्ता में हिस्सेदारी के पक्ष में हैं।

हालांकि, शन्मुगम ने इस पर सीधे कुछ कहने से बचते हुए कहा कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर गहन मंथन चल रहा है।

विधायकों का अलग रुख

दूसरी ओर, कुछ नए विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने इस बात से इनकार किया है कि पार्टी में समर्थन को लेकर कोई औपचारिक चर्चा हुई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई बैठक केवल औपचारिक मुलाकात थी, जिसमें किसी तरह के गठबंधन या समर्थन पर बात नहीं हुई।

इससे यह साफ होता है कि पार्टी के भीतर अभी स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई है।

चुनावी प्रदर्शन का असर

AIADMK के हालिया चुनावी प्रदर्शन ने भी इस स्थिति को प्रभावित किया है। पार्टी ने राज्यभर में 47 सीटें जीतीं, जिनमें से 16 सीटें उत्तरी और मध्य क्षेत्रों (पूर्व NASA क्षेत्र) से आई हैं।

विशेष रूप से पश्चिमी क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा, जिससे नेतृत्व पर दबाव बढ़ा है कि वह नई रणनीति अपनाए। इस संदर्भ में शन्मुगम और एस.पी. वेलुमणि जैसे नेताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है।

BJP की भूमिका भी अहम

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, Bharatiya Janata Party (भाजपा) भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा चाहती है कि AIADMK टीवीके सरकार को समर्थन दे, ताकि Indian National Congress (कांग्रेस) को सरकार में शामिल होने का मौका न मिले।

अगर ऐसा होता है, तो यह गठबंधन राज्य की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।

DMK के खिलाफ साझा रणनीति

AIADMK और TVK दोनों ही DMK (द्रमुक) के विरोध में हैं। ऐसे में कुछ पार्टी नेताओं का मानना है कि दोनों दलों को साथ आना चाहिए।

उनका तर्क है कि चूंकि विपक्ष का नेता (LOP) पद DMK को मिल चुका है, इसलिए AIADMK के लिए विपक्ष में बैठना ज्यादा फायदेमंद नहीं होगा। इसके बजाय सत्ता में भागीदारी पार्टी को राजनीतिक रूप से मजबूत बना सकती है।

युवा मतदाताओं का फैक्टर

AIADMK के कुछ पदाधिकारियों का मानना है कि राज्य के करीब 2.38 करोड़ युवा मतदाता बदलाव चाहते हैं। ऐसे में TVK के साथ जाना “परिवर्तन की राजनीति” का हिस्सा बन सकता है।

हालांकि, इसके उलट यह भी आशंका जताई जा रही है कि अगर AIADMK TVK का समर्थन करती है, तो पूरा विपक्षी स्पेस DMK के पास चला जाएगा।

संभावित टूट की चर्चा

पार्टी के भीतर बढ़ती हलचल के बीच टूट की आशंकाएं भी सामने आ रही हैं। खबर है कि TVK के वरिष्ठ नेता के.ए. सेंगोट्टैयन AIADMK के कुछ विधायकों के संपर्क में हैं। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी में विभाजन की स्थिति बन सकती है।

अंतिम फैसला पलानीस्वामी के हाथ में

फिलहाल, पूरी स्थिति AIADMK प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी के रुख पर निर्भर है। जब तक वे सार्वजनिक रूप से पार्टी की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं करते, तब तक सियासी अनिश्चितता बनी रहेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में लिया गया फैसला न सिर्फ AIADMK के भविष्य को तय करेगा, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति की दिशा भी बदल सकता है।


तमिलनाडु की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। AIADMK के सामने यह चुनौती है कि वह विपक्ष में रहकर अपनी पहचान बनाए रखे या सत्ता में शामिल होकर नई राजनीतिक दिशा तय करे।

आने वाले दिनों में पार्टी का फैसला राज्य की सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट