बिहार की राजनीति में ‘मॉडल’ की जंग: एनडीए के भीतर ‘नीतीश मॉडल’ बनाम ‘सम्राट मॉडल’ पर बढ़ी बयानबाज़ी

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बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है और इस बार मुद्दा बना है ‘मॉडल की राजनीति’।

बिहार की सियासत में ‘मॉडल’ को लेकर नई बहस

बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है और इस बार मुद्दा बना है ‘मॉडल की राजनीति’। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर ही अब ‘नीतीश मॉडल’ और ‘सम्राट मॉडल’ को लेकर तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है। सहयोगी दलों के बीच इस तरह की सार्वजनिक बहस ने न सिर्फ राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है, बल्कि गठबंधन के भीतर संभावित मतभेदों को भी उजागर कर दिया है।

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक प्रवक्ता द्वारा हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दिए गए बयान के बाद यह विवाद तेज हो गया। उन्होंने बिहार में कानून-व्यवस्था में सुधार का श्रेय गृह विभाग को देते हुए इसे ‘सम्राट मॉडल’ करार दिया। इस बयान के बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि बिहार में केवल ‘नीतीश मॉडल’ ही लागू है और आगे भी वही रहेगा।

बीजेपी का दावा: ‘सम्राट मॉडल’ से अपराधियों में खौफ
बीजेपी प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि गृह विभाग की कमान संभालने के बाद अपराधियों में डर का माहौल बन गया है। उन्होंने दावा किया कि पहले जो अपराधी बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम देते थे, अब वे या तो सरेंडर कर रहे हैं या राज्य छोड़कर भाग रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस कार्रवाई तेज हुई है, एनकाउंटर हो रहे हैं और अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं।

उनके अनुसार, यह बदलाव ‘सम्राट मॉडल’ का परिणाम है, जो उत्तर प्रदेश में चर्चित ‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर बिहार में लागू हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले तीन महीनों में अपराध को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है और जनता इसे देख रही है।

जेडीयू का पलटवार: ‘सिर्फ नीतीश मॉडल ही मान्य’
बीजेपी के इस दावे पर जेडीयू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के वरिष्ठ नेता और एमएलसी ने कहा कि बिहार में विकास और सुशासन का जो ढांचा बना है, वह ‘नीतीश मॉडल’ के तहत ही संभव हुआ है। उन्होंने याद दिलाया कि इस मॉडल की सराहना देश के शीर्ष नेतृत्व भी कई बार कर चुके हैं।

जेडीयू नेता ने यह भी कहा कि ‘नीतीश मॉडल’ केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, महिला सशक्तिकरण और शराबबंदी जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक विभाग के आधार पर पूरे शासन को ‘सम्राट मॉडल’ कहना उचित नहीं है।

‘विभागों के आधार पर मॉडल तय नहीं हो सकता’
जेडीयू की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि अगर गृह विभाग के कारण ‘सम्राट मॉडल’ की बात की जा रही है, तो फिर अन्य विभागों के आधार पर भी अलग-अलग मॉडल की बात उठेगी, जो तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार सामूहिक रूप से काम करती है और उसका श्रेय भी सामूहिक होना चाहिए।

उन्होंने बीजेपी प्रवक्ता को सलाह देते हुए कहा कि वे इस विषय पर अपने ही वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करें, ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो सके। इस बयान से यह स्पष्ट संकेत मिला कि जेडीयू इस मुद्दे को लेकर बेहद गंभीर है और अपने राजनीतिक ब्रांड ‘नीतीश मॉडल’ को कमजोर नहीं होने देना चाहती।

राजनीतिक संदेश और गठबंधन पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मॉडल’ को लेकर यह विवाद केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है। आगामी चुनावों को देखते हुए बीजेपी और जेडीयू दोनों ही अपनी-अपनी छवि को मजबूत करने में जुटे हैं।

जहां बीजेपी कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अपनी पकड़ दिखाना चाहती है, वहीं जेडीयू विकास और सुशासन के अपने पुराने रिकॉर्ड को बनाए रखना चाहती है। ऐसे में ‘मॉडल’ की यह जंग आने वाले समय में और तेज हो सकती है।

मुख्यमंत्री चेहरे पर भी उठे सवाल


इस पूरे विवाद के बीच विपक्ष ने भी तंज कसते हुए कहा है कि बिहार में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह अभी तय नहीं है और यह फैसला बीजेपी के भीतर ही होगा। इस तरह के बयान से राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।

निष्कर्ष
बिहार की राजनीति में ‘नीतीश मॉडल’ बनाम ‘सम्राट मॉडल’ की बहस ने एनडीए के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर बीजेपी अपनी प्रशासनिक सख्ती को प्रमुखता से पेश कर रही है, वहीं जेडीयू अपने स्थापित शासन मॉडल को बचाने में लगी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहता है या गठबंधन की राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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