नवादा के युवक ने 16 राज्यों में फैलाया साइबर ठगी का नेटवर्क, 100 से ज्यादा म्यूल खातों से करोड़ों के लेन-देन का शक; दो गिरफ्तार
प्रतीकात्मक चित्र
चंदौली/नवादा: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। अलीनगर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने दोनों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (पीडीडीयू नगर) स्थित डीआरएम कार्यालय के पास से पकड़ा। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपित 100 से अधिक म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेन-देन करते थे और इस नेटवर्क का फैलाव देश के 16 राज्यों तक था।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान नीतीश कुमार, निवासी मीरचक, थाना वारिसलीगंज, जिला नवादा, बिहार और अमन शर्मा, निवासी सकलडीहा कोट, थाना सकलडीहा, चंदौली के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का कथित मास्टरमाइंड बिहार निवासी सोनू सिंह है, जिसकी तलाश की जा रही है।
डीआरएम कार्यालय के पास से दोनों आरोपित गिरफ्तार
पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल के अनुसार, साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाने के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले थे। इसके आधार पर अलीनगर पुलिस और साइबर सेल की टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को डीआरएम कार्यालय पीडीडीयू नगर के पास से गिरफ्तार किया।
पुलिस ने आरोपितों के पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड और सिम कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा दोनों के पास से कूटरचित आधार कार्ड भी मिले हैं।
फर्जी आधार कार्ड से खुलासा
पुलिस के मुताबिक, बरामद कूटरचित आधार कार्ड पर फोटो आरोपितों की लगी हुई थी, लेकिन उसमें नाम और पता दूसरे व्यक्तियों का दर्ज था। जांच एजेंसी को आशंका है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक खाते और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों में किया जाता था।
नीतीश कुमार के पास से दो स्मार्टफोन, आठ बैंक खातों का विवरण, 400 रुपये और एक कूटरचित आधार कार्ड बरामद किया गया। उसके दस्तावेजों में इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा के खातों की जानकारी मिली।
वहीं, अमन शर्मा के पास से रेडमी मोबाइल फोन, पांच पासबुक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र की चेकबुक, छह डेबिट कार्ड, छह सिम कार्ड, 250 रुपये और एक कूटरचित आधार कार्ड बरामद हुआ।
NCRP पोर्टल से 6.20 लाख रुपये की साइबर ठगी का लिंक
पुलिस ने बरामद बैंक खातों की जानकारी का मिलान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP से किया। जांच में नीतीश से जुड़े खातों से 3,97,477 रुपये की साइबर ठगी का विवरण सामने आया।
इसी तरह अमन से मिले उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खातों की जांच में 3,23,248 रुपये की साइबर ठगी से जुड़े लेन-देन का पता चला।
इस तरह दोनों आरोपितों से जुड़े खातों में कुल 6,20,725 रुपये की साइबर ठगी का विवरण पुलिस जांच में सामने आया है। पुलिस अब इन खातों में हुए अन्य लेन-देन और देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े साइबर अपराध के मामलों की भी जांच कर रही है।
16 राज्यों तक फैला था साइबर ठगी का नेटवर्क
पुलिस जांच के अनुसार, यह गिरोह केवल उत्तर प्रदेश या बिहार तक सीमित नहीं था। आरोपितों के नेटवर्क का कनेक्शन 16 राज्यों से सामने आया है। इनमें ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात, चंडीगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्य शामिल हैं।
गिरोह के सदस्य लोगों को अलग-अलग तरह के लालच देकर साइबर ठगी का शिकार बनाते थे। पुलिस के अनुसार, लोन, डिलीवरी, फ्रेंचाइजी, यूपीआई, पार्ट-टाइम नौकरी और निवेश के नाम पर लोगों से पैसे ठगे जाते थे।
जांच में गाजीपुर जिले में भी इसी तरह की साइबर ठगी की घटना में आरोपितों की संलिप्तता की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब दूसरे राज्यों में दर्ज साइबर अपराध के मामलों से भी इन खातों और आरोपितों का कनेक्शन खंगाल रही है।
क्या होते हैं म्यूल बैंक खाते?
साइबर अपराध की भाषा में ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल ठगी या अवैध तरीके से हासिल रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। कई मामलों में अपराधी दूसरे लोगों के नाम पर खाते खुलवाते हैं या कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम अपने नियंत्रण में ले लेते हैं।
इस मामले में भी पुलिस को 100 से अधिक म्यूल खातों के इस्तेमाल की जानकारी मिली है। इन खातों में साइबर ठगी से हासिल रकम मंगाने के बाद उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाने की आशंका है।
अमन खाते जुटाता, नीतीश मास्टरमाइंड तक पहुंचाता था
पूछताछ में पुलिस को गिरोह के काम करने के तरीके के बारे में भी जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार, अमन शर्मा बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड और सिम कार्ड जुटाने का काम करता था। इसके बाद नीतीश कुमार इन बैंकिंग दस्तावेजों और अन्य सामान को बिहार निवासी कथित मास्टरमाइंड सोनू सिंह तक पहुंचाता था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 100 से अधिक म्यूल खातों को किस तरह हासिल किया गया और इन खातों के जरिए कुल कितनी रकम का लेन-देन हुआ।
मास्टरमाइंड सोनू सिंह की तलाश तेज
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड सोनू सिंह, जो बिहार का रहने वाला बताया जा रहा है, फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
जांच टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह में कितने लोग शामिल हैं, किन-किन राज्यों में इनके संपर्क हैं और साइबर ठगी की रकम को कहां-कहां ट्रांसफर किया जाता था।
फिलहाल दोनों गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की जानकारी जुटा रही है। बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े और भी मामलों का खुलासा होने की उम्मीद है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
