जमालपुर PHC में आशा बहाली पर वसूली का आरोप, फर्जी बैठक से फंड निकासी के मामले में जांच के आदेश
जमालपुर PHC में आशा बहाली में वसूली और फर्जी फंड निकासी का आरोप, जांच के आदेश।
निष्कर्ष भारत-संवाददाता-मुंगेर/जमालपुर। बिहार के मुंगेर जिले के जमालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में आशा कार्यकर्ताओं की बहाली और रोगी कल्याण समिति के फंड के इस्तेमाल को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। समिति की बैठक में आशा बहाली में कथित तौर पर 60 हजार से एक लाख रुपये तक की वसूली और फर्जी बैठक दिखाकर मरीजों के कल्याण से जुड़े फंड से राशि निकालने के आरोप लगाए गए। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और आशा बहाली तथा पदस्थापन की जांच के आदेश दिए गए हैं।
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
आठ महीने बाद हुई रोगी कल्याण समिति की पहली बैठक
जमालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गठित रोगी कल्याण समिति की पहली बैठक करीब आठ महीने बाद सोमवार को प्रखंड कार्यालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता बीडीओ श्वेता कुमारी ने की।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था के साथ-साथ आशा बहाली और रोगी कल्याण समिति के फंड में कथित अनियमितता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। समिति के सदस्यों ने दोनों मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
बैठक में बीस सूत्री अध्यक्ष मुनीलाल मंडल ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक पासवान और स्वास्थ्य प्रबंधक शिव प्रकाश पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुष्टि अभी बाकी है।

आशा बहाली में 60 हजार से एक लाख रुपये तक वसूली का आरोप
बैठक में सबसे गंभीर आरोप आशा कार्यकर्ताओं की बहाली को लेकर लगाया गया। समिति के सदस्यों के अनुसार जमालपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ताओं की बहाली की गई है।
आरोप है कि बहाली के दौरान अभ्यर्थियों से 60 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की कथित वसूली की गई। आरोप लगाने वाले सदस्यों का दावा है कि योग्य अभ्यर्थियों को दरकिनार कर पैसे के आधार पर चयन किया गया।
समिति के अनुसार करीब 80 से 90 आशा कार्यकर्ताओं की बहाली हुई है। लेकिन चयनित अभ्यर्थियों को अब तक आईडी नहीं मिलने और चयन सूची सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में यदि बहाली प्रक्रिया में आर्थिक लेन-देन या अनियमितता हुई है, तो इससे न सिर्फ बेरोजगार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय का आरोप बनता है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
समिति के सदस्यों ने पूरी बहाली प्रक्रिया की जांच कराने और अनियमितता साबित होने पर बहाली रद्द करने की मांग की है। मामले को लेकर जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को लिखित शिकायत भी दिए जाने की बात सामने आई है।
फर्जी बैठक दिखाकर फंड निकासी का आरोप
आरोप है कि रजिस्टर में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर और प्रस्ताव तैयार कर बैठक होने का रिकॉर्ड बनाया गया। इसके बाद इसी कागजी प्रक्रिया के आधार पर रोगी कल्याण समिति के फंड से लाखों रुपये की निकासी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
जमालपुर PHC में दूसरा बड़ा मामला रोगी कल्याण समिति के फंड से जुड़ा है। समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कई महीनों तक समिति की वास्तविक बैठक नहीं हुई, लेकिन रिकॉर्ड में बैठक आयोजित होने की बात दर्शाई गई।
यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और दस्तावेजों में अनियमितता का गंभीर मामला बन सकता है।
विधायक के संज्ञान में आने के बाद जांच के आदेश
मामला स्थानीय विधायक नचिकेता मंडल के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। विधायक ने सिविल सर्जन डॉ. राजू से फोन पर बातचीत कर पूरे मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया।
विधायक ने कहा कि गरीब मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उपलब्ध कराए गए फंड में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आशा बहाली में कथित वसूली के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।
इसके बाद सिविल सर्जन की ओर से आशा बहाली और पदस्थापन की जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच रिपोर्ट तय करेगी आरोपों की सच्चाई
स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की है। जांच में यह देखा जाएगा कि आशा कार्यकर्ताओं की चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई या नहीं, चयन सूची क्यों सार्वजनिक नहीं की गई और चयनित अभ्यर्थियों को आईडी जारी करने में देरी क्यों हुई।
इसी तरह रोगी कल्याण समिति की बैठकों के रिकॉर्ड, रजिस्टर, हस्ताक्षर, प्रस्ताव और फंड से हुई निकासी की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि बैठकों के बिना फर्जी दस्तावेज तैयार कर राशि निकाले जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी तय करनी होगी।
PHC की बदहाली पर भी उठे सवाल
बैठक में सिर्फ बहाली और फंड का मुद्दा ही नहीं उठा, बल्कि जमालपुर PHC की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सदस्यों ने नाराजगी जताई।
मरीजों की देखभाल, भोजन, साफ-सफाई और जेनरेटर संचालन में कथित लापरवाही के आरोप लगाए गए। सदस्यों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की। बीडीओ श्वेता कुमारी ने मामले में जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अब निगाह जांच पर
जमालपुर PHC में सामने आए ये दोनों मामले—आशा बहाली में कथित पैसे की वसूली और रोगी कल्याण समिति के फंड से कथित फर्जी निकासी—स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
हालांकि अभी तक सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष जांच के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। अब जांच रिपोर्ट से ही यह साफ होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
जमालपुर के मरीजों और आशा बहाली के अभ्यर्थियों की नजर अब इसी जांच पर टिकी है। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और गरीब मरीजों के पैसे की जवाबदेही सुनिश्चित करना इस मामले में सबसे अहम सवाल बन गया है।
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट
