अशोकधाम में अंतिम सोमवारी पर अरघा से होगा जलार्पण, 7 मौतों के बाद बदली व्यवस्था; पार्किंग में रुकेंगे श्रद्धालु
अशोकधाम मंदिर
निष्कर्ष भारत संवाददाता-लखीसराय। लखीसराय के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में तीसरी सोमवारी को हुई दर्दनाक भगदड़ के बाद जिला प्रशासन ने अंतिम सोमवारी के लिए भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला लिया है। 17 अगस्त की तीसरी सोमवारी को मंदिर परिसर में हुई भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 27 लोग घायल हुए थे। घटना के बाद अंतिम सोमवारी पर श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
शुक्रवार को अशोकधाम मंदिर परिसर स्थित कार्यालय में जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच कई घंटे तक बैठक हुई। बैठक में तीसरी सोमवारी की घटना की समीक्षा के साथ अंतिम सोमवारी पर भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से जलार्पण कराने को लेकर चर्चा की गई। इसके बाद अंतिम सोमवारी पर अरघा के माध्यम से जलार्पण कराने का निर्णय लिया गया है।
अरघा से जलार्पण, सीधे शिवलिंग तक पहुंचने पर रोक
नई व्यवस्था के तहत अंतिम सोमवारी पर श्रद्धालुओं को अरघा के माध्यम से भगवान शिव का जलाभिषेक करना होगा। इससे मंदिर के गर्भगृह और मुख्य जलार्पण स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ को सीमित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन का उद्देश्य यह है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ मंदिर के अंदर प्रवेश न करें और जलार्पण की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ती रहे। अरघा व्यवस्था के जरिए कम समय में अधिक श्रद्धालुओं को जल चढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
तीसरी सोमवारी की घटना के बाद अंतिम सोमवारी पर सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर विशेष दबाव है। पिछले वर्षों के अनुभव और सावन की अंतिम सोमवारी पर संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता है।
अशोकधाम स्टेशन की पार्किंग में ठहरेंगे श्रद्धालु
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए श्रद्धालुओं के ठहराव की व्यवस्था भी बदली गई है। प्रशासन के अनुसार, अशोकधाम स्टेशन के पार्किंग क्षेत्र में श्रद्धालुओं को रोका जाएगा। यहां से श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से मंदिर की ओर भेजने की योजना है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर के दक्षिणी प्रवेश क्षेत्र में अचानक भीड़ बढ़ने से रोकना है। श्रद्धालुओं को एक साथ मंदिर की ओर जाने देने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि इससे मंदिर के प्रवेश द्वार पर भीड़ का दबाव कम होगा और जलार्पण की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखा जा सकेगा। साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
तीसरी सोमवारी की भगदड़ के बाद बढ़ी चुनौती
17 अगस्त की तीसरी सोमवारी को अशोकधाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में सात महिलाओं की मौत हुई थी और 27 श्रद्धालु घायल हुए थे। घटना के बाद मंदिर में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे।
तीसरी सोमवारी की घटना ने प्रशासन के सामने अंतिम सोमवारी को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। सावन की अंतिम सोमवारी होने के कारण मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन अब भीड़ को मंदिर के भीतर पहुंचने से पहले ही नियंत्रित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
मंदिर के अंदर से ज्यादा स्टेशन रोड पर चुनौती
हालांकि, मंदिर परिसर के अंदर नई व्यवस्था के बाद स्थिति नियंत्रित रहने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती मंदिर के दक्षिणी प्रवेश द्वार की ओर जाने वाली स्टेशन रोड को लेकर बनी हुई है।
स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि इस मार्ग पर अतिक्रमण के कारण पहले से ही सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम है। अंतिम सोमवारी पर यदि हजारों श्रद्धालु एक साथ इस रास्ते पर पहुंचते हैं तो भीड़ का दबाव बढ़ सकता है।
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यही कारण है कि भीड़ प्रबंधन के लिए केवल अरघा और पार्किंग की व्यवस्था पर्याप्त होगी या नहीं, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग को पर्याप्त खुला रखना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अतिक्रमण हटाने पर अब तक कोई बड़ा फैसला नहीं
अशोकधाम मंदिर के बाहर स्टेशन रोड पर मौजूद अतिक्रमण को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच चिंता बनी हुई है। भीड़ बढ़ने की स्थिति में सड़क पर दुकानों और अन्य अवरोधों के कारण पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचने की आशंका है।
इसके बावजूद अंतिम सोमवारी से पहले इस मार्ग को पूरी तरह अतिक्रमणमुक्त कराने को लेकर प्रशासन की ओर से कोई बड़ा फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि मंदिर के अंदर और पार्किंग क्षेत्र में भीड़ नियंत्रित कर ली गई, लेकिन स्टेशन रोड पर दबाव बढ़ गया तो स्थिति को कैसे संभाला जाएगा।
तीसरी सोमवारी की घटना के बाद भीड़ प्रबंधन के हर स्तर पर तैयारी की जरूरत महसूस की जा रही है। मंदिर के आसपास के रास्ते, प्रवेश और निकास मार्ग, पार्किंग क्षेत्र और श्रद्धालुओं के ठहराव स्थल—सभी जगहों पर समन्वित व्यवस्था जरूरी होगी।
अंतिम सोमवारी पर सुरक्षा व्यवस्था की असली परीक्षा
अशोकधाम में अंतिम सोमवारी प्रशासन के लिए सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी परीक्षा होगी। अरघा व्यवस्था और स्टेशन पार्किंग में श्रद्धालुओं के ठहराव से भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इसके साथ मंदिर के बाहर संपर्क मार्गों को सुगम रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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तीसरी सोमवारी की दर्दनाक घटना के बाद अब श्रद्धालु भी सुरक्षित और व्यवस्थित दर्शन की उम्मीद कर रहे हैं। अंतिम सोमवारी पर प्रशासन की रणनीति कितनी प्रभावी साबित होती है, यह भीड़ के दबाव और मौके पर व्यवस्था के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
फिलहाल प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने अरघा व्यवस्था लागू करने का फैसला कर लिया है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद मंदिर परिसर और स्टेशन रोड पर किसी तरह की अफरातफरी की स्थिति पैदा न हो।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
