Toxic Movie Review: Yash की फिल्म में एक्शन और खून-खराबे की भरमार, लेकिन क्या कमजोर पड़ गई ‘Fairy Tale for Grown-Ups’ की कहानी?
Toxic Movie Review
निष्कर्ष भारत संवाददाता-मुंबई: सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘Toxic’ अपनी रिलीज के साथ ही चर्चा का विषय बन गई है। फिल्म को एक बड़े गैंगस्टर ड्रामा के रूप में पेश किया गया है, जिसमें एक्शन, हिंसा, सत्ता, अपराध और रिश्तों का जटिल संसार दिखाई देता है। करीब 3 घंटे 15 मिनट लंबी इस फिल्म में यश एक ऐसे किरदार में नजर आते हैं, जिसकी दुनिया हिंसा और ताकत के इर्द-गिर्द घूमती है।
फिल्म का एक संवाद इसकी मूल भावना को काफी हद तक बयां करता है—जब एक किरदार राय से कहता है कि वह बुरा इंसान नहीं बल्कि “टॉक्सिक” है। यह संवाद सिर्फ एक बातचीत नहीं, बल्कि फिल्म के मुख्य किरदार और उसके व्यक्तित्व को परिभाषित करने की कोशिश करता है।
हालांकि, फिल्म जिस तरह खुद को एक अलग तरह की परिपक्व प्रेम कहानी और गैंगस्टर गाथा के रूप में स्थापित करना चाहती है, उस वादे को पूरी तरह निभाने में कमजोर दिखाई देती है। कहानी में हिंसा का स्तर इतना अधिक है कि कई महत्वपूर्ण भावनात्मक पहलू उसके पीछे दब जाते हैं।
1947 के गोवा से शुरू होती है ‘Toxic’ की कहानी
‘Toxic’ एक पीरियड गैंगस्टर फिल्म के रूप में सामने आती है। इसकी शुरुआत 1947 के गोवा से होती है और कहानी अगले करीब दो दशकों तक फैली हुई दिखाई जाती है।
फिल्म की दुनिया में पुराने दौर के गैंगस्टर सिनेमा की झलक मिलती है। स्टाइलिश सूट, फेडोरा हैट, साइडबर्न्स, धुएं से भरे नाइटक्लब और अपराध की दुनिया में सक्रिय शक्तिशाली गिरोह फिल्म को एक अलग विजुअल पहचान देने की कोशिश करते हैं।
फिल्म में हॉलीवुड की क्लासिक गैंगस्टर फिल्मों की शैली से प्रेरित कई दृश्य दिखाई देते हैं। सत्ता और अपराध के बीच की साझेदारी तथा गैंगस्टरों की हिंसक दुनिया को बड़े पैमाने पर पेश किया गया है।
लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती इसकी लंबाई और लगातार बढ़ती हिंसा बन जाती है।
Yash के किरदार Raya की दुनिया में हिंसा ही सबसे बड़ा हथियार
फिल्म में यश ने राया नाम के किरदार को निभाया है। राया एक ऐसा व्यक्ति है जिसकी जिंदगी परिस्थितियों, अपराध और हिंसा से जुड़ी हुई है।

फिल्म लगातार यह स्थापित करने की कोशिश करती है कि राया सिर्फ एक निर्दयी अपराधी नहीं है, बल्कि परिस्थितियों से बना एक जटिल इंसान है। हालांकि, पर्दे पर उसका हिंसक रूप इतनी मजबूती से सामने आता है कि दर्शकों के लिए उसके भावनात्मक संघर्ष से जुड़ना कई बार मुश्किल हो जाता है।
यश के किरदार को ऐसे संवाद भी दिए गए हैं जो उसकी हिंसक छवि को और मजबूत बनाते हैं। फिल्म का एक प्रमुख संवाद है—“I don’t like violence but violence likes me.”
यह संवाद राया के व्यक्तित्व को समझाने की कोशिश करता है, लेकिन पूरी फिल्म में हिंसा की भरमार के कारण यह विचार कई बार कमजोर पड़ता दिखाई देता है।
KGF के बाद फिर Alpha Male अवतार में Yash
यश को दर्शकों ने KGF Chapter 1 और KGF Chapter 2 में एक बेहद शक्तिशाली और आक्रामक किरदार के रूप में देखा था। उन फिल्मों की सफलता के बाद दर्शकों के बीच यश की एक बड़े पैमाने वाले ‘Alpha Male’ स्टार के रूप में पहचान बनी।
‘Toxic’ में भी यश का किरदार उसी तरह के बड़े और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस के साथ सामने आता है। फिल्म अपने मुख्य अभिनेता के स्टारडम का पूरा इस्तेमाल करती है।

हालांकि, जहां KGF की दुनिया और उसका नायक दर्शकों के लिए एक अलग सिनेमाई अनुभव लेकर आए थे, वहीं ‘Toxic’ में कई बार ऐसा लगता है कि लगातार हिंसा और बड़े एक्शन दृश्यों की वजह से कहानी पीछे छूट जाती है।
फिल्म के लंबे रनटाइम में लगातार गोलीबारी, लड़ाई और हत्या के दृश्य दर्शकों को थका भी सकते हैं।
महिलाओं के किरदारों से कहानी को मिलता है भावनात्मक विराम
फिल्म में कई प्रमुख महिला कलाकार शामिल हैं और उनकी एंट्री के साथ कहानी को कुछ समय के लिए भावनात्मक राहत मिलती है।
नयनतारा राया की सुरक्षात्मक बड़ी बहन के किरदार में दिखाई देती हैं। हुमा कुरैशी एक प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टर से जुड़े किरदार में नजर आती हैं, जबकि तारा सुतारिया की भूमिका भी कहानी के भावनात्मक पक्ष से जुड़ती है।

रुक्मिणी वसंत भी फिल्म में महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराती हैं।
वहीं कियारा आडवाणी का किरदार एक आकर्षक लेकिन दुख और भावनाओं से जुड़ी दुनिया में रहने वाली सर्कस ट्रैपेज कलाकार के रूप में सामने आता है।
फिल्म की महिला पात्रों की मौजूदगी कहानी को कुछ मानवीय और भावनात्मक पल देती है। लेकिन आलोचना यह भी है कि अधिकांश महिला किरदारों की पहचान मुख्य पुरुष पात्रों के साथ उनके संबंधों के आधार पर अधिक होती है।
रोमांस का वादा, लेकिन एक्शन ने ले ली पूरी कहानी
‘Toxic’ को एक तरह की “Fairy Tale for Grown-Ups” के रूप में भी देखा गया था। निर्देशक गीतु मोहनदास अपनी फिल्मों में जटिल परिस्थितियों के बीच मानवीय भावनाओं और संवेदनशील रिश्तों को दिखाने के लिए जानी जाती हैं।
ऐसे में उम्मीद थी कि ‘Toxic’ सिर्फ एक हिंसक गैंगस्टर फिल्म नहीं होगी, बल्कि इसमें प्रेम और भावनाओं की भी एक मजबूत परत देखने को मिलेगी।
लेकिन फिल्म में रोमांस और भावनात्मक जुड़ाव बहुत कम समय के लिए प्रभाव छोड़ पाते हैं। अधिकतर समय कहानी हिंसा, अपराध और गैंगस्टर संघर्षों में उलझी रहती है।

गोवा, मकाऊ और अन्य खूबसूरत लोकेशनों पर फिल्माए गए दृश्य विजुअली प्रभावशाली हैं, लेकिन लगातार आने वाले एक्शन सेट पीस कहानी की गति को कई जगह भारी बना देते हैं।
पिता-पुत्र का एंगल बनता है फिल्म का मजबूत पक्ष
फिल्म के बीच में पिता और पुत्र से जुड़ा एक भावनात्मक ट्रैक सामने आता है। यही वह हिस्सा है जहां कहानी कुछ समय के लिए अधिक प्रभावशाली दिखाई देती है।
इस ट्रैक के साथ फिल्म का भावनात्मक पक्ष मजबूत होता है और दर्शकों को मुख्य किरदार के भीतर मौजूद संघर्ष को समझने का मौका मिलता है।
लेकिन आलोचना यह है कि यह महत्वपूर्ण हिस्सा कहानी में काफी देर से आता है। यदि फिल्म के शुरुआती हिस्से में भावनात्मक पहलुओं को अधिक मजबूती से विकसित किया जाता, तो ‘Toxic’ एक अधिक संतुलित अनुभव बन सकती थी।
क्या ‘Toxic’ सिर्फ हिंसा का तमाशा बनकर रह गई?
फिल्म का नाम और उसका मुख्य विचार जहरीली मर्दानगी और उसके परिणामों पर सवाल उठाने की कोशिश करता है। राया के किरदार के जरिए एक ऐसे पुरुष को दिखाया गया है जो अपनी भावनाओं, रिश्तों और हिंसक स्वभाव के बीच संघर्ष करता है।

लेकिन आलोचना यह है कि फिल्म जिस मुद्दे की आलोचना करना चाहती है, कई बार उसी को बड़े पैमाने पर प्रस्तुत करने लगती है।
अत्यधिक हिंसा, पुरुषवादी दृष्टिकोण और उत्तेजक संवादों के कारण फिल्म का मूल संदेश कमजोर पड़ सकता है।
करीब 3 घंटे 15 मिनट की ‘Toxic’ में बड़े स्तर का एक्शन, यश का दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और शानदार विजुअल दुनिया जरूर मौजूद है। लेकिन कहानी और भावनात्मक गहराई की तलाश करने वाले दर्शकों को फिल्म से पूरी तरह संतुष्टि मिलेगी या नहीं, यह उनकी सिनेमाई पसंद पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, ‘Toxic’ एक विशाल कैनवास पर बनी गैंगस्टर गाथा है, जिसमें यश का स्टारडम पूरी ताकत से दिखाई देता है। लेकिन बहुत ज्यादा हिंसा और लंबे रनटाइम के बीच फिल्म की प्रेम कहानी और उसके भावनात्मक संदेश की चमक कई जगह फीकी पड़ जाती है।
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भूमि आर्या की रिपोर्ट
