बांका में 75 हजार घूस लेते बीडीओ गिरफ्तार, निगरानी विभाग की टीम ने दबोचा
बांका में बीडीओ अमित कुमार सिंह को 75 हजार रिश्वत लेते पकड़ा गया
निष्कर्ष भारत संवाददाता बांका। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में बांका जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फुल्लीडुमर प्रखंड के बीडीओ अमित कुमार सिंह को 75 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। निगरानी की टीम ने मंगलवार सुबह बांका शहर की नेहरू कॉलोनी स्थित उनके किराए के आवास पर कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम आरोपी बीडीओ से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
शिकायत के बाद निगरानी ने शुरू की जांच
बताया जा रहा है कि फुल्लीडुमर प्रखंड के बीडीओ अमित कुमार सिंह के खिलाफ निगरानी विभाग को रिश्वत मांगने की शिकायत मिली थी। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और प्रारंभिक स्तर पर इसकी जांच शुरू की।
जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के बाद निगरानी ने आरोपी अधिकारी को रंगेहाथ पकड़ने की योजना बनाई। इसके लिए टीम ने पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा, ताकि आरोपी को निगरानी की कार्रवाई की भनक न लगे।
बीडीओ को पकड़ने के लिए बिछाया गया जाल
शिकायत की जांच पूरी होने के बाद निगरानी की टीम ने मंगलवार सुबह बांका पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। टीम ने पहले से तय रणनीति के तहत आरोपी बीडीओ को रिश्वत लेते पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

आरोप है कि 75 हजार रुपये की रिश्वत लेने के दौरान निगरानी टीम ने अमित कुमार सिंह को उनके किराए के आवास से रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद इलाके में इसकी चर्चा तेज हो गई। सरकारी अधिकारी के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के मामलों में निगरानी की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
नेहरू कॉलोनी स्थित आवास पर छापेमारी
निगरानी की कार्रवाई बांका शहर के नेहरू कॉलोनी मोहल्ले में स्थित उस आवास पर हुई, जहां बीडीओ किराए पर रह रहे थे। टीम ने आवास पर पहुंचकर पहले आरोपी अधिकारी को अपने नियंत्रण में लिया और इसके बाद आवश्यक कार्रवाई की।
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रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तारी के बाद निगरानी अधिकारियों ने मामले से संबंधित दस्तावेज और अन्य तथ्यों की भी जांच की। हालांकि, कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
75 हजार की रिश्वत ने मचाया हड़कंप
फुल्लीडुमर प्रखंड के बीडीओ के खिलाफ हुई इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में भी हलचल मच गई है। एक प्रखंड स्तर के अधिकारी की रिश्वत लेते गिरफ्तारी ने सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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निगरानी विभाग समय-समय पर रिश्वतखोरी की शिकायतों पर कार्रवाई करता रहा है। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की सूचना और प्रारंभिक जांच के आधार पर ट्रैप की कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी शिकायत की जांच के बाद कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
बीडीओ की गिरफ्तारी के बाद आगे की कार्रवाई
रंगेहाथ गिरफ्तार किए जाने के बाद अब निगरानी विभाग मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगा। आरोपी अधिकारी से पूछताछ के अलावा रिश्वत की कथित मांग से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा सकती है।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि 75 हजार रुपये की कथित रिश्वत किस काम के लिए मांगी गई थी और इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।
सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार पर सवाल
बीडीओ जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर तैनात अधिकारी के खिलाफ रिश्वत लेने की कार्रवाई सामने आने के बाद सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रखंड कार्यालय आम लोगों के लिए कई जरूरी सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों का केंद्र होता है।
ऐसे में किसी अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगना आम लोगों के बीच प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल पैदा करता है। हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
निगरानी की कार्रवाई से बढ़ी सख्ती
बिहार में निगरानी विभाग की ट्रैप कार्रवाई का उद्देश्य रिश्वतखोरी की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई कर सरकारी तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। बांका में हुई इस कार्रवाई से भी यही संकेत मिलता है कि रिश्वत से जुड़े मामलों में निगरानी विभाग शिकायतों को लेकर सक्रिय है। फिलहाल बीडीओ अमित कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम मामले की आगे की जांच में जुटी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में रिश्वत की कथित मांग के पीछे की पूरी कहानी क्या सामने आती है और इस मामले में आगे किन लोगों की भूमिका उजागर होती है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
