पटना यूनिवर्सिटी बंद, छात्रों ने बंद कराए क्लास व कार्यालय, 4 दिनों से चल रहा था भूख हड़ताल
पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों ने ऑफिस और क्लासरूम कराया बंद
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों का आंदोलन गुरुवार को और तेज हो गया। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले चार दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे AISF के छात्रों ने गुरुवार को विश्वविद्यालय बंद कराने का ऐलान किया। इसके बाद छात्र विश्वविद्यालय के अलग-अलग कार्यालयों में पहुंचे और कामकाज बंद कराया। इस दौरान कार्यालयों की लाइटें बंद कर दी गईं और अकादमिक काउंसिल में ताला भी लगा दिया गया।
छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर पटना यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से अब तक ठोस समाधान नहीं किया गया है। बुधवार को कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया था। AISF की ओर से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कुलपति कार्यालय पहुंचा। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बातचीत चली, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी। वार्ता विफल होने के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय बंद कराने का फैसला लिया।
पटना यूनिवर्सिटी में क्यों बढ़ा छात्रों का आंदोलन?
AISF के छात्र कई मुद्दों को लेकर लगातार पटना यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में एलएलबी प्रवेश परीक्षा में कथित पेपर लीक की जांच, पीजी पाठ्यक्रमों में फीस वृद्धि को वापस लेना और MFA की पढ़ाई शुरू करना शामिल है।
छात्रों का आरोप है कि इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से छात्रों ने भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया। चार दिनों से जारी भूख हड़ताल के बाद भी जब उनकी मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो गुरुवार को आंदोलन को और व्यापक करने का निर्णय लिया गया।

छात्रों का कहना है कि पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। प्रवेश परीक्षा, फीस और नए पाठ्यक्रमों से जुड़े मामलों में स्पष्टता और पारदर्शिता जरूरी है। इसी को लेकर AISF लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहा है।
ऑफिस में पहुंचकर छात्रों ने रुकवाया काम
गुरुवार को AISF के छात्र विश्वविद्यालय के कार्यालयों में पहुंचे। छात्रों ने कर्मचारियों से काम रोकने की अपील की और कार्यालयों का कामकाज बंद कराया। इस दौरान कुछ कार्यालयों की लाइटें भी बंद कर दी गईं। छात्रों ने अकादमिक काउंसिल के कार्यालय में ताला बंद कर अपना विरोध जताया।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि पटना यूनिवर्सिटी बंद कराने का फैसला उनकी मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए लिया गया है। छात्रों के मुताबिक, चार दिनों से भूख हड़ताल के बावजूद जब बातचीत से समाधान नहीं निकल पाया तो आंदोलन को आगे बढ़ाना जरूरी हो गया।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ी
पटना यूनिवर्सिटी में चल रहे इस आंदोलन के बीच भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सेहत भी चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले चार दिनों से छात्र बिना भोजन के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार भूख हड़ताल के कारण कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है।
हालांकि, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की स्वास्थ्य जांच के लिए चिकित्सकों की टीम मौजूद है। डॉक्टर समय-समय पर छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं और जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
बुधवार को हुआ था कुलपति का घेराव
भूख हड़ताल से पहले AISF के छात्रों ने बुधवार को कुलपति का घेराव भी किया था। छात्र अपनी मांगों को लेकर पटना यूनिवर्सिटी प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया।
AISF के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और कुलपति के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। छात्रों को उम्मीद थी कि वार्ता के जरिए उनकी मांगों को लेकर कोई समाधान निकल सकता है, लेकिन बातचीत के बाद भी कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
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वार्ता विफल होने के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय बंद कराने का निर्णय लिया। इससे साफ है कि छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।
छात्रों से समर्थन जुटाने की कोशिश
AISF ने अपने आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए पटना यूनिवर्सिटी परिसर में छात्रों के बीच भी संपर्क किया। संगठन के सदस्यों ने अन्य विद्यार्थियों से भूख हड़ताल और उनकी मांगों के समर्थन में आगे आने की अपील की।
AISF का दावा है कि कई छात्रों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। संगठन का कहना है कि छात्रों की समस्याएं किसी एक संगठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से जुड़े व्यापक मुद्दे हैं।

इससे पहले भी AISF की ओर से विश्वविद्यालय परिसर में विरोध मार्च निकाला गया था। लगातार प्रदर्शन, विरोध मार्च, कुलपति का घेराव और अब विश्वविद्यालय बंद कराने के फैसले से आंदोलन के बढ़ते स्वरूप का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पटना यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने चुनौती
छात्रों के आंदोलन के बीच अब पटना यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने स्थिति को सामान्य करने की चुनौती है। एक ओर छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों की स्वास्थ्य स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है।
छात्रों की मुख्य मांगों में एलएलबी प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक के मामले में कार्रवाई, पीजी में बढ़ी फीस पर पुनर्विचार और MFA की पढ़ाई शुरू करना शामिल है। इन मुद्दों पर प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर छात्रों की नजर है।
फिलहाल छात्रों ने विश्वविद्यालय बंद कराने का फैसला लेकर अपने आंदोलन को और आक्रामक रूप दे दिया है। बुधवार की विफल वार्ता के बाद गुरुवार को कार्यालयों में काम बंद कराने और अकादमिक काउंसिल में तालाबंदी से विश्वविद्यालय का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। आने वाले दिनों में प्रशासन और छात्रों के बीच फिर बातचीत होती है या आंदोलन और आगे बढ़ता है, यह देखने वाली बात होगी।
अमन कुमार की रिपोर्ट
