सरकारी स्कूलों की जमीन पर सरकार की रहेगी नजर, हर जिले में बनेगा लैंड रजिस्टर, अतिक्रमण पर कसेगा शिकंजा

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बिहार के सरकारी स्कूलों की जमीन का बनेगा लैंड रजिस्टर, अतिक्रमण पर नजर

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। सरकारी स्कूलों की जमीन को सुरक्षित रखने के लिए बिहार शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। सरकारी स्कूलों की जमीन का अब जिलेवार लैंड रजिस्टर तैयार किया जाएगा। इसमें राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों की जमीन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होंगी। शिक्षा विभाग का यह कदम स्कूल की जमीन पर होने वाले अतिक्रमण को रोकने, पुराने रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और भविष्य में जमीन से जुड़े विवादों पर प्रभावी तरीके से नजर रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अधिकारियों को इस संबंध में जरूरी निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार सरकारी विद्यालयों की जमीन सार्वजनिक संपत्ति है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। ऐसे में अब जमीन के रिकॉर्ड को एक जगह व्यवस्थित करने के साथ-साथ उसकी वास्तविक स्थिति की भी जानकारी जुटाई जाएगी।

हर जिले में स्कूलों का बनेगा लैंड रजिस्टर

शिक्षा विभाग की योजना के तहत बिहार के प्रत्येक जिले में सरकारी विद्यालयों की जमीन का अलग लैंड रजिस्टर तैयार किया जाएगा। इसे संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी यानी डीईओ के कार्यालय में सुरक्षित रखा जाएगा। रजिस्टर में जिले के सरकारी स्कूलों की जमीन से संबंधित दस्तावेज और जरूरी जानकारियां दर्ज रहेंगी।

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इस प्रक्रिया के दौरान जिले में मौजूद सभी सरकारी विद्यालयों की जमीन को चिह्नित किया जाएगा। विभाग उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों को एकत्र कर उनका रिकॉर्ड तैयार करेगा। इससे किसी स्कूल की जमीन से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।

स्कूलों की जमीन का पूरा ब्योरा होगा दर्ज

लैंड रजिस्टर में प्रत्येक सरकारी विद्यालय की जमीन से जुड़ी कई अहम जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इसमें स्कूल का नाम, जमीन का कुल क्षेत्रफल, खाता संख्या और खेसरा संख्या प्रमुख रूप से शामिल होंगे। इसके अलावा उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और जमीन की मौजूदा स्थिति का भी विवरण तैयार किया जाएगा।

विभाग की कोशिश है कि कागजों पर उपलब्ध जानकारी और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्थिति के बीच किसी तरह का अंतर है तो उसे भी सामने लाया जा सके। इसके लिए पुराने दस्तावेजों का मिलान जमीन की वर्तमान स्थिति से कराया जाएगा।

रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति का होगा मिलान

अक्सर जमीन से जुड़े विवादों में कागजी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर महत्वपूर्ण कारण बनता है। शिक्षा विभाग अब स्कूलों की जमीन के मामले में इस अंतर को पहचानने पर भी जोर दे रहा है। इसके लिए उपलब्ध दस्तावेजों को व्यवस्थित करने के साथ उनका सत्यापन और मिलान कराया जाएगा।

अगर किसी विद्यालय की जमीन का क्षेत्रफल, खाता-खेसरा या उपयोग से संबंधित जानकारी रिकॉर्ड से अलग पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के स्तर पर इसकी जांच की जा सकेगी। इससे भविष्य में स्कूल की जमीन को लेकर विवाद की स्थिति बनने से पहले ही आवश्यक कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण हुआ तो कार्रवाई

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों की जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी विद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जे या अतिक्रमण की जानकारी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इसके लिए विभागीय अधिकारियों को स्कूलों की जमीन की स्थिति पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया गया है। लैंड रजिस्टर तैयार होने के बाद अधिकारियों के पास संबंधित विद्यालय की जमीन का रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध रहेगा। इससे किसी शिकायत या विवाद की स्थिति में कार्रवाई की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

पुराने रिकॉर्ड को एक जगह लाने की तैयारी

शिक्षा विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती स्कूलों की जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों को एकत्र करना भी है। अलग-अलग जगहों पर उपलब्ध अभिलेखों को जुटाकर उन्हें व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाएगा। इसके बाद संबंधित विद्यालय की जमीन की पहचान और रिकॉर्ड तैयार करने का काम आगे बढ़ेगा।

इस व्यवस्था का एक फायदा यह भी होगा कि अधिकारियों के बदलने या लंबे समय के बाद किसी मामले की जानकारी लेने पर रिकॉर्ड आसानी से मिल सकेगा। जमीन से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रहने से भविष्य में किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया में सुविधा होगी।

विकास योजनाओं में भी मिलेगी मदद

लैंड रजिस्टर तैयार होने का असर सिर्फ जमीन की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। स्कूलों की जमीन का क्षेत्रफल और उपलब्धता स्पष्ट होने के बाद शिक्षा विभाग भविष्य की विकास योजनाओं को भी बेहतर तरीके से तैयार कर सकेगा।

किस विद्यालय के पास कितनी जमीन उपलब्ध है और उसका वर्तमान उपयोग क्या है, इसकी जानकारी रहने से स्कूल भवन के विस्तार, अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण या अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए योजना बनाने में आसानी होगी। जरूरत के अनुसार उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग भी किया जा सकेगा।

अतिक्रमण रोकने के साथ बढ़ेगी जवाबदेही

सरकारी स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण रोकने के लिए केवल रिकॉर्ड तैयार करना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ नियमित निगरानी और समय पर कार्रवाई भी जरूरी होगी। विभाग का नया कदम इसी दिशा में एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

लैंड रजिस्टर में रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद किसी जमीन की स्थिति में बदलाव होने पर उसे पहचानना भी आसान हो सकता है। इससे संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी और स्कूल की संपत्ति की सुरक्षा को लेकर निगरानी मजबूत हो सकेगी।

अब जिलों में रिकॉर्ड तैयार होने का इंतजार शिक्षा विभाग ने अधिकारियों को लैंड रजिस्टर तैयार करने की दिशा में काम शुरू करने का निर्देश दिया है। आने वाले समय में जिलों के सरकारी विद्यालयों की जमीन से जुड़े दस्तावेज जुटाए जाएंगे और उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।

सभी जिलों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के सरकारी स्कूलों की जमीन का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। इससे स्कूलों की संपत्ति की पहचान, सुरक्षा और भविष्य की विकास योजनाओं में मदद मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि जिलों में यह प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और अतिक्रमण की शिकायतों पर विभाग किस स्तर तक प्रभावी कार्रवाई कर पाता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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