बिहार में MLC चुनाव से पहले महागठबंधन टूटा? कांग्रेस का बड़ा बयान, मचा सियासी घमासान

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MLC चुनाव से पहले महागठबंधन पर कांग्रेस का बड़ा बयान, बढ़ी हलचल

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। महागठबंधन बिहार की राजनीति में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने छह सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। आरजेडी के इस फैसले के बाद कांग्रेस और आरजेडी के बीच महागठबंधन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि क्या दोनों दलों की राह अलग हो चुकी है।

इस बीच कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने महागठबंधन को लेकर पार्टी का रुख साफ कर दिया है। एक मीडिया बातचीत में उन्होंने कहा कि आरजेडी के साथ कांग्रेस का गठबंधन बिहार विधानसभा चुनाव तक ही था। महागठबंधन में विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों की राह अलग हो गई है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु की मौजूदगी में दिए गए इस बयान के बाद बिहार की सियासत में हलचल और बढ़ गई है।

कांग्रेस ने साफ की गठबंधन की स्थिति

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के बयान को विधान परिषद चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद आरजेडी और कांग्रेस अलग-अलग रास्ते पर हैं। ऐसे में आगामी विधान परिषद चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच सीटों के तालमेल की संभावना फिलहाल कमजोर नजर आ रही है।

कांग्रेस की ओर से भी चुनाव को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। राजेश राम ने बताया कि पार्टी के अंदर संभावित उम्मीदवारों के नाम पर मंथन चल रहा है और जल्द ही प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी।

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कांग्रेस की तैयारी को देखते हुए यह चुनाव केवल विधान परिषद की आठ सीटों का मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि इसे बिहार में विपक्षी दलों की भविष्य की राजनीतिक रणनीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

महागठबंधन के बाद अब अलग-अलग मैदान

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस समेत विपक्षी दल एक साथ चुनावी मैदान में थे। उस समय दोनों दलों के बीच गठबंधन की वजह से सीटों का बंटवारा और संयुक्त चुनावी रणनीति देखने को मिली थी। अब विधान परिषद चुनाव में तस्वीर पूरी तरह अलग दिखाई दे रही है।

महागठबंधन में आरजेडी ने अपने स्तर पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, जबकि कांग्रेस भी अलग से उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। कांग्रेस के सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ने की चर्चा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पार्टी को फिलहाल तीन सीटों के लिए एक-एक आवेदन मिले हैं।

महागठबंधन में कांग्रेस के सामने उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की चुनौती भी है। आने वाले दिनों में पार्टी की ओर से प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

RJD ने इन छह सीटों पर उतारे उम्मीदवार

महागठबंधन में आरजेडी ने आठ में से छह सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से दिलीप कुमार को मैदान में उतारा गया है। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नितेश कुमार, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अनिल कुमार झा, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रो. जयराम यादव और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को टिकट दिया गया है।

पार्टी की ओर से दो अन्य सीटों के उम्मीदवारों के नाम बाद में घोषित किए जाने की बात कही गई है। छह उम्मीदवारों के ऐलान के साथ ही आरजेडी ने चुनावी तैयारियों को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

आठ सीटों पर होगा विधान परिषद चुनाव

बिहार विधान परिषद की जिन आठ सीटों पर चुनाव होना है, उनमें चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। मौजूदा विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है।

इसी वजह से इन सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया शुरू होनी है। चुनाव की आधिकारिक प्रक्रिया की घोषणा सितंबर में होने की उम्मीद है। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद नामांकन से लेकर मतदान तक की तस्वीर स्पष्ट होगी। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले उम्मीदवार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।

महागठबंधन के बीच जन सुराज की एंट्री

आरजेडी और कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी की चर्चा के बीच जन सुराज ने भी चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने बिहार विधान परिषद की खाली हो रही सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत के बाद जन सुराज का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है। पार्टी अब विधान परिषद चुनाव के जरिए बिहार की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। जन सुराज की ओर से सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद मुकाबले में एक और राजनीतिक ताकत जुड़ गई है। इससे कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना भी बन सकती है।

BJP के गढ़ में जन सुराज की नजर

जन सुराज की खास नजर पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर भी बताई जा रही है। इस सीट पर भाजपा के समर्थन से नवल किशोर यादव वर्ष 1996 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। नवल किशोर यादव की लंबे समय से चली आ रही जीत को देखते हुए पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। अब जन सुराज की ओर से इस सीट पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी की चर्चा है।

इसी क्रम में दिव्या ज्योति को जन सुराज के साथ जोड़े जाने के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि पार्टी उन्हें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नवल किशोर यादव के खिलाफ मैदान में उतार सकती है।

दिव्या ज्योति फिर दे सकती हैं चुनौती

दिव्या ज्योति पहले भी नवल किशोर यादव के खिलाफ चुनाव लड़ चुकी हैं। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब अगर जन सुराज उन्हें दोबारा इसी सीट से उम्मीदवार बनाता है तो मुकाबला राजनीतिक रूप से काफी दिलचस्प हो सकता है। एक तरफ लंबे समय से इस सीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले नवल किशोर यादव होंगे, तो दूसरी तरफ जन सुराज अपनी नई राजनीतिक ताकत के साथ चुनौती पेश करने की कोशिश करेगा।

हालांकि, दिव्या ज्योति की उम्मीदवारी पर अंतिम फैसला पार्टी की ओर से होना बाकी है। इसी तरह कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम भी सामने नहीं आए हैं। इसलिए अभी सभी दलों की अंतिम रणनीति स्पष्ट नहीं है।

MLC चुनाव से बदल सकता है सियासी समीकरण

बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। आरजेडी और कांग्रेस के अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति ने विपक्षी राजनीति के समीकरणों पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं जन सुराज की एंट्री ने मुकाबले को और व्यापक बना दिया है।

महागठबंधन में आरजेडी पहले ही छह सीटों पर उम्मीदवार उतारकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर चुका है। कांग्रेस भी प्रत्याशियों के चयन में जुटी है। जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जबकि भाजपा के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में भी चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। अब नजर चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा और कांग्रेस के उम्मीदवारों पर है।

महागठबंधन में इसके बाद यह साफ होगा कि आठ सीटों पर किस दल की रणनीति कितनी मजबूत है और किन सीटों पर सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। फिलहाल इतना तय है कि विधान परिषद चुनाव ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और महागठबंधन के भविष्य को लेकर जारी चर्चा को भी नई दिशा मिल गई है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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