बिहार में बाढ़ में नया खतरा! पानी घटते ही तेज होगा कटाव, सरकार ने जिलों को भेजा अलर्ट

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बिहार बाढ़ में पानी घटते ही बढ़ेगा कटाव, जिलों को अलर्ट

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच अब पानी घटने के साथ एक नया खतरा सामने आया है। राज्य की कई नदियों के जलस्तर में तेजी से गिरावट हो रही है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सभी संबंधित जिलों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है।

विभाग ने चेतावनी दी है कि नदी का जलस्तर घटने के दौरान कई जगहों पर अचानक और तेज कटाव शुरू हो सकता है। इससे नदी किनारे बसे संवेदनशील इलाकों के साथ-साथ पहले से कमजोर तटबंधों पर भी खतरा बढ़ सकता है। विभाग ने अधिकारियों को लगातार निगरानी और पेट्रोलिंग करने तथा कटाव की सूचना मिलते ही तत्काल सुरक्षात्मक कार्रवाई शुरू करने को कहा है।

बाढ़ के बाद अब कटाव पर नजर

जल संसाधन विभाग की ओर से शनिवार को जारी अलर्ट में कहा गया है कि जलस्तर में गिरावट के दौरान नदी के तटों की स्थिति पर विशेष नजर रखनी होगी। खासकर कटाव वाले स्थानों और पहले से कमजोर हिस्सों में अचानक स्थिति बिगड़ सकती है।

विभाग के निर्देश के मुताबिक संबंधित पदाधिकारियों को संवेदनशील स्थलों पर लगातार पेट्रोलिंग करनी होगी। नदी के किनारे तट धंसने, अचानक कटाव शुरू होने या नदी की धारा के तट की तरफ तेजी से बढ़ने के संकेत मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचेंगे।

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इसके बाद स्थिति का आकलन कर आवश्यक निरोधात्मक और सुरक्षात्मक कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कटाव की सूचना पहुंचने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।

बाढ़ प्रभावित जिलों में पर्याप्त संसाधन रखने का निर्देश

जल संसाधन विभाग ने जिलों को संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त संसाधन और जरूरी सामग्री उपलब्ध रखने को कहा है। इसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में बिना समय गंवाए बचाव और सुरक्षात्मक कार्य शुरू करना है।

अधिकारियों को संभावित अचानक और तीव्र कटाव के प्रति विशेष रूप से अलर्ट रहने के साथ स्थिति की लगातार समीक्षा करने को कहा गया है। विभाग का मानना है कि जलस्तर घटने के इस चरण में तटबंधों और नदी किनारे के कमजोर स्थानों की निगरानी बेहद जरूरी है।

स्थानीय लोगों को भी कटाव के खतरे के बारे में जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन से कहा गया है कि लोगों को संवेदनशील नदी किनारे के इलाकों में सावधानी बरतने की जानकारी दी जाए।

सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर घट रहा

राज्य में कई नदियों की स्थिति अलग-अलग बनी हुई है। भागलपुर के सुल्तानगंज में शनिवार शाम गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया। यहां पानी घटने की प्रवृत्ति बनी हुई है।

वहीं वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक और वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्तर स्थिर बताया गया है। दूसरी तरफ इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का पानी अभी भी बढ़ रहा है। ऐसे में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ की स्थिति एक जैसी नहीं है। प्रशासन को लगातार नदियों के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर नजर रखनी पड़ रही है। पानी घटने वाले इलाकों में अब कटाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर

जलस्तर में कहीं कमी तो कहीं स्थिरता के बावजूद कई स्थानों पर नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बलतारा और कुरसेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक और पटना के दीघा, गांधीघाट और हाथीदह में गंगा खतरे के निशान से ऊपर है।

इसके अलावा भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती तथा दरौली और सिसवन में घाघरा नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

इस स्थिति में जलस्तर घटने के बावजूद प्रशासन की चुनौती खत्म नहीं हुई है। एक ओर जहां प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं, वहीं दूसरी ओर नदी किनारे कटाव के खतरे से निपटने की तैयारी की जा रही है।

बिहार बाढ़ से 48 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार राज्य के 15 जिले अभी बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं।

इन जिलों के 87 प्रखंडों की 574 ग्राम पंचायतों में करीब 48.22 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में है। बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के कारण प्रशासन की ओर से राहत कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाने के लिए 1,248 सामुदायिक रसोईघरों का संचालन किया जा रहा है। इनके माध्यम से अब तक 82.19 लाख बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है।

राहत शिविरों में भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 13 राहत शिविर भी चलाए जा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से 12,260 बाढ़ शरणार्थियों को आवासन, भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन की कोशिश है कि जिन इलाकों में लोगों का घर से निकलना मुश्किल है, वहां राहत सामग्री और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके लिए सरकारी स्तर पर नावों और राहत टीमों की मदद ली जा रही है। अब तक राहत सामग्री के तौर पर करीब 3.53 लाख पॉलीथीन शीट, 59,500 ड्राई राशन पैकेट और 1,400 फूड पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए 11,424 क्विंटल पशुचारा भी बांटा गया है।

1794 सरकारी नावें राहत कार्य में जुटीं

बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 1,794 सरकारी नावों का संचालन किया जा रहा है। पानी से घिरे गांवों में लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक ले जाने में इन नावों की मदद ली जा रही है।

त्वरित राहत और बचाव के लिए एसडीआरएफ की 27 टीमें और एनडीआरएफ की 10 टीमें विभिन्न जिलों में तैनात हैं। इन टीमों को जरूरत के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।

बाढ़ का पानी घटने के बाद भी चुनौती बरकरार

बिहार में बाढ़ का पानी कई स्थानों पर घटने लगा है, लेकिन प्रशासन इसे राहत की अंतिम स्थिति नहीं मान रहा है। जलस्तर कम होने के साथ कटाव का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। अब प्रशासन की प्राथमिकता दोहरी हो गई है। एक तरफ बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना और दूसरी तरफ कमजोर तटबंधों तथा कटाव वाले स्थानों को सुरक्षित रखना जरूरी है।

नदियों के जलस्तर में आने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों को किसी भी तरह की आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों में निगरानी और बढ़ाई जाएगी, ताकि पानी घटने के दौरान होने वाले संभावित तेज कटाव से बड़े नुकसान को रोका जा सके।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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