नवादा में लोन के नाम पर बड़ा फ्रॉड, 2 साइबर ठग गिरफ्तार, प्रोसेसिंग फीस के नाम पर करते थे वसूली

नवादा में ऑनलाइन लोन ठगी, 2 गिरफ्तार

नवादा में ऑनलाइन लोन के नाम पर ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नवादा)। नवादा में ऑनलाइन लोन साइबर ठगी करने वाले कथित गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। वारिसलीगंज थाना क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने बाघी और चकवाय गांव के आसपास छापेमारी कर दो युवकों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, दोनों पर बजाज फाइनेंस, रिलायंस फाइनेंस समेत अन्य कंपनियों के नाम पर लोगों को ऑनलाइन लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 9,770 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

नवादा पुलिस का कहना है कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों का मोबाइल नंबर हासिल करते थे। इसके बाद फोन कर खुद को बैंक मैनेजर या किसी वित्तीय कंपनी का कर्मचारी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। लोन स्वीकृत कराने के नाम पर जरूरी दस्तावेज लेने के बाद प्रोसेसिंग फीस के तौर पर रकम वसूली जाती थी।

गुप्त सूचना पर नवादा पुलिस की छापेमारी

साइबर ठगी की लगातार मिल रही शिकायतों और संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई थी। टीम को वारिसलीगंज थाना क्षेत्र में ऑनलाइन लोन के नाम पर लोगों से ठगी किए जाने की सूचना मिली थी।

इसके बाद नवादा पुलिस ने सूचना की पुष्टि करते हुए बाघी और चकवाय गांव के आसपास कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान दो युवकों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और प्रारंभिक जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

नवादा पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई वारिसलीगंज थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी के नेतृत्व में की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मीरबिघा निवासी रूपांशु कुमार और चकवाय निवासी राजेश कुमार के रूप में हुई है।

सोशल मीडिया से जुटाते थे मोबाइल नंबर

नवादा पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों का ठगी करने का तरीका पूरी तरह डिजिटल माध्यम पर आधारित था। कथित तौर पर वे फेसबुक समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लोगों के मोबाइल नंबर हासिल करते थे।

इसके बाद लोगों को फोन करके ऑनलाइन लोन की सुविधा देने की बात कही जाती थी। बातचीत के दौरान आरोपी खुद को कभी बैंक मैनेजर तो कभी किसी वित्तीय कंपनी का कर्मचारी बताते थे। इससे सामने वाले व्यक्ति को विश्वास में लेने की कोशिश की जाती थी।

लोन की जरूरत वाले लोगों को कम समय में लोन स्वीकृत कराने का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे व्यक्तिगत और बैंकिंग दस्तावेज मांगे जाते थे।

आधार-पैन से लेकर बैंक पासबुक तक लेते थे

नवादा पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और पासपोर्ट साइज फोटो समेत कई जरूरी दस्तावेज मांगे जाते थे। लोन दिलाने की प्रक्रिया का हिस्सा बताकर लोग आसानी से ये दस्तावेज साझा कर देते थे।

दस्तावेज हासिल करने के बाद कथित तौर पर आरोपियों की ओर से लोन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पैसे की मांग की जाती थी। यहीं से ठगी का अगला चरण शुरू होता था।

नवादा पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया है और कितनी रकम की ठगी की गई है। बरामद मोबाइल फोन इस जांच में अहम साक्ष्य साबित हो सकते हैं।

प्रोसेसिंग फीस के नाम पर वसूली

नवादा पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का मुख्य तरीका प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम वसूलना था। फोन पर लोन मंजूर होने की जानकारी देकर पीड़ितों को भरोसा दिलाया जाता था कि रकम जल्द ही उनके बैंक खाते में पहुंच जाएगी।

इसके बाद अलग-अलग तरह के शुल्क के नाम पर पैसे मांगे जाते थे। लोन मिलने की उम्मीद में लोग आरोपियों के बताए तरीके से रकम भेज देते थे। पैसे मिलने के बाद कथित तौर पर आरोपी संपर्क से बचने लगते थे।

इस तरह कम ब्याज या आसान प्रक्रिया के नाम पर ऑनलाइन लोन की तलाश कर रहे लोग साइबर ठगी का शिकार हो जाते थे।

तीन मोबाइल और 9,770 रुपये बरामद

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 9,770 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन की तकनीकी जांच कर रही है।

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मोबाइल में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच की जा रही है। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी की रकम किन खातों में भेजी जाती थी। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो पुलिस उनके खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।

नवादा में साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच

मामले में वारिसलीगंज थाना कांड संख्या 659/26 दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि आरोपियों को लोगों के मोबाइल नंबर कहां से मिलते थे और फर्जी बैंककर्मी बनकर लोगों से संपर्क करने के लिए किन संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता था।

इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों ने किन-किन वित्तीय कंपनियों के नाम का इस्तेमाल किया। पुलिस के सामने चुनौती यह भी है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए।

लोन लेने से पहले सावधानी जरूरी

ऑनलाइन लोन के नाम पर होने वाली साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी अनजान व्यक्ति के फोन पर बैंक या वित्तीय कंपनी का कर्मचारी बताने पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।

लोन के लिए आधार, पैन, बैंक संबंधी जानकारी या अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज साझा करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। किसी अनजान खाते में प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर पैसे भेजने से भी बचना चाहिए।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। मोबाइल फोन और वित्तीय लेन-देन की जांच के बाद इस मामले में साइबर ठगी के नेटवर्क की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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