पटना में गणेश चतुर्थी की धूम : बप्पा की सोने-चांदी से जड़ित मुकुट बना आकर्षण, आकर्षक लाइटों से सजा पंडाल

गणेश चतुर्थी को लेकर पटना में उत्साह

पटना में गणपति को 55 लाख का रत्नजड़ित सोने का मुकुट पहनाया गया

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में गणेश चतुर्थी इस बार खास आकर्षण के साथ मनाई जा रही है। महाराष्ट्र मंडल की ओर से गणेश चतुर्थी पर मदुरई के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार किया गया है। पंडाल में मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा की प्रतिमा स्थापित की गई है। करीब साढ़े पांच फीट ऊंची गणपति की प्रतिमा मुंबई से पटना लाई गई है। भगवान गणेश को हीरा, पन्ना और माणिक से जड़ित करीब 55 लाख रुपये का सोने का मुकुट पहनाया गया है।

गणपति पूजा में राज्यपाल भी पहुंचे

बता दे की गणेश चतुर्थी पर महाराष्ट्र मंडल के आयोजन में राज्यपाल सैयद अता हसनैन भी शामिल हुए। वह पंडाल में सिर पर पगड़ी पहनकर पहुंचे और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के भी गणपति पूजा में शामिल होने की जानकारी दी गई है। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर तैयार हुआ पंडाल

इस बार गणेश चतुर्थी पर महाराष्ट्र मंडल ने गणेशोत्सव को खास बनाने के लिए पंडाल की थीम दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर पर रखी है। पंडाल की बाहरी संरचना के साथ-साथ अंदर की सजावट को भी मंदिर के स्वरूप के अनुरूप तैयार किया गया है।

गणेश चतुर्थी पर महाराष्ट्र मंडल के सचिव संजय भोंसले के अनुसार, पंडाल तैयार करने के लिए मुंबई से 12 कारीगर पटना पहुंचे थे। इन कारीगरों ने कई दिनों की मेहनत के बाद मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित पंडाल तैयार किया है। पंडाल में की गई सजावट और धार्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बना हुआ है।

55 लाख का मुकुट बना खास आकर्षण

गणेश चतुर्थी पर गणपति की प्रतिमा को इस बार विशेष रूप से तैयार किए गए सोने के मुकुट से सजाया गया है। इसमें हीरा, पन्ना और माणिक जैसे कीमती रत्न जड़े हुए हैं। इसकी कीमत करीब 55 लाख रुपये बताई गई है। मुकुट के कारण गणपति की प्रतिमा श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

आयोजकों ने बताया कि गणपति की प्रतिमा साढ़ू मिट्टी से तैयार की गई है। प्रतिमा निर्माण में प्राकृतिक सामग्री के इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

गणेश चतुर्थी पर मिट्टी की प्रतिमा को बताया शुभ

आचार्य राकेश झा ने बताया कि गणेश पूजा में मिट्टी से बनी प्रतिमा को विशेष रूप से शुभ और उत्तम माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मिट्टी की प्रतिमा में पंचतत्वों का समावेश होता है। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश को पंचतत्व कहा जाता है और इन्हीं तत्वों से मानव शरीर के निर्माण की भी धार्मिक व्याख्या की जाती है।

मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का एक पर्यावरणीय पक्ष भी है। ऐसी प्रतिमाएं पानी में आसानी से घुल जाती हैं, जिससे विसर्जन के बाद पर्यावरण पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव पड़ता है। गणेशोत्सव में पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं को बढ़ावा देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

14 सितंबर को होगी प्राण प्रतिष्ठा

गणेश चतुर्थी पर महाराष्ट्र मंडल की ओर से गणपति स्थापना के लिए महाराष्ट्र के सांगली से पांच पंडित पटना पहुंचेंगे। प्रशांत जागीरदार के नेतृत्व में आने वाले पंडित 14 सितंबर को विधि-विधान के साथ गणपति की प्राण प्रतिष्ठा कराएंगे।

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प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहले दिन भगवान गणेश को 501 मोदक का भोग लगाया जाएगा। गणपति पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर मंडल की ओर से विशेष तैयारियां की गई हैं।

गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलेगा

आचार्य राकेश झा के अनुसार, इस वर्ष चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7:28 बजे के बाद शुरू हो रही है। इसी वजह से कई श्रद्धालु इसी दिन गणेश चतुर्थी का व्रत और पूजन करेंगे। वहीं उदयातिथि को मानने वाले श्रद्धालु 15 सितंबर को भी गणेश पूजा कर सकते हैं।

गणेशोत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। इस दौरान करीब 10 दिनों तक पटना में धार्मिक आयोजनों और गणपति पूजा का माहौल बना रहेगा।

कोलकाता की लाइटिंग भी रहेगी आकर्षण

महाराष्ट्र मंडल के गणेशोत्सव में सिर्फ पंडाल और गणपति की प्रतिमा ही नहीं, बल्कि सजावट और रोशनी भी खास रखी गई है। पंडाल में कोलकाता के चंदन नगर की प्रसिद्ध लाइटिंग लगाई गई है। बंगाल से मंगाए गए फूलों से भी विशेष सजावट की गई है।

आयोजकों के मुताबिक, शाम के समय रोशनी और फूलों की सजावट के बीच पंडाल का स्वरूप और अधिक आकर्षक दिखाई देगा। गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

20 सितंबर को महाप्रसाद और विसर्जन

गणेशोत्सव के समापन कार्यक्रम को भी विशेष बनाया गया है। 20 सितंबर को सुबह 11 बजे से महाप्रसाद का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद गणपति विसर्जन के लिए जुलूस निकाला जाएगा।

विसर्जन जुलूस में महाराष्ट्र और नासिक की पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। नासिक से 60 सदस्यीय झांझ पथक टीम पटना पहुंचेगी। इसमें 20 लड़कियां और 40 लड़के शामिल होंगे। टीम पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तुति और करतब दिखाएगी।

इससे विसर्जन जुलूस में धार्मिक उत्साह के साथ सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिलेगा। महाराष्ट्र मंडल की तैयारियों के बीच इस बार गणेशोत्सव में मंदिर की थीम वाला पंडाल, लालबाग के राजा की प्रतिमा, रत्नजड़ित मुकुट, चंदन नगर की लाइटिंग और नासिक का झांझ पथक मुख्य आकर्षण रहने वाला है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट