ममता बनर्जी की पार्टी को मिला नया नाम, ‘ममता टीएमसी’ नाम होगा, फुटबॉल खिलाड़ी सिंबल; बागी गुट को लिफाफा
ममता बनर्जी के गुट को फुटबॉल, बागी गुट को मिला लिफाफा सिंबल
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। ममता बनर्जी की पार्टी को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बीच आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को “Mamata All India Trinamool Congress” नाम और “Football Player” चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं, दूसरे गुट को “Democratic Trinamool Congress” नाम के साथ “Envelope” चुनाव चिह्न मिला है। यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है। आयोग ने इससे एक दिन पहले दोनों गुटों को “All India Trinamool Congress” नाम और पुराने “Flowers and Grass” चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था।
ममता बनर्जी की पार्टी को मिला नया नाम
चुनाव आयोग का यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद के बीच आया है। आयोग ने शुक्रवार को दोनों गुटों के लिए अलग पहचान तय कर दी, ताकि आगामी उपचुनावों में उम्मीदवार अलग-अलग नाम और चिह्न के साथ मैदान में उतर सकें।
ममता बनर्जी वाले गुट को “Mamata All India Trinamool Congress” नाम दिया गया है। इसके साथ फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। दूसरे गुट को “Democratic Trinamool Congress” नाम मिला है और उसके लिए लिफाफा चुनाव चिह्न तय किया गया है। दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना जाएगा।
पुराने नाम और सिंबल पर रोक क्यों लगी?
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों गुटों को “All India Trinamool Congress” नाम और “Flowers and Grass” वाले आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग के मुताबिक, दोनों पक्ष पार्टी पर नियंत्रण और वास्तविक ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में आगामी चुनाव से पहले दोनों को एक ही नाम और चिह्न देने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती थी।
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आयोग ने दोनों पक्षों को अलग नाम और मुक्त चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा। इसके बाद शुक्रवार को दोनों गुटों को नए नाम और चिह्न आवंटित किए गए। यह फैसला फिलहाल आगामी चुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लागू होगा।
नंदीग्राम और रेजीनगर में होगा मुकाबला
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है।
दूसरे गुट की ओर से भी इन सीटों पर उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव आयोग के नए आदेश के बाद संबंधित उम्मीदवार अपने-अपने गुटों के नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ेंगे। आयोग ने नामांकन से संबंधित प्रक्रिया को भी नई पहचान के अनुरूप आगे बढ़ाने की व्यवस्था की है।
ममता बनर्जी के गुट को फुटबॉल खिलाड़ी सिंबल
चुनाव चिह्न को लेकर भी दोनों गुटों के बीच अलग पहचान सामने आ गई है। ममता बनर्जी के गुट को “Football Player” चुनाव चिह्न मिला है, जबकि दूसरे गुट को “Envelope” दिया गया है। अब आगामी उपचुनाव में मतदाताओं को दोनों गुटों के नाम और चिह्न अलग-अलग दिखाई देंगे।
पुराना “Flowers and Grass” चिह्न फिलहाल दोनों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं है। चुनाव आयोग का अंतिम फैसला आने तक यही अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।
पार्टी के अंदर विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के भीतर मौजूदा विवाद की शुरुआत विधानसभा चुनाव के बाद संगठन और विधायी दल के नेतृत्व को लेकर हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 80 निर्वाचित टीएमसी विधायकों में से 58 ने पार्टी नेतृत्व की पसंद से अलग रुख अपनाते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना था। इसके बाद विवाद और बढ़ गया।

इसके बाद विवाद पार्टी के संसदीय दल तक भी पहुंचा। जून 2026 में 28 लोकसभा सदस्यों वाली टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग समूह के तौर पर सामने आने और एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम को लेकर पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और दल-बदल कानून से जुड़े सवाल भी उठे।
लोकसभा में भी बदले समीकरण
ममता बनर्जी की टीएमसी के भीतर हुए विभाजन का असर संसद में भी दिखाई दिया है। जून में 20 लोकसभा सांसदों के अलग होने के दावे के बाद पार्टी की संसदीय ताकत को लेकर विवाद शुरू हुआ। उस समय रिपोर्टों में टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 के अलग गुट के साथ जाने की बात सामने आई थी।
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राज्यसभा में भी पार्टी के सदस्यों के इस्तीफे से संख्या में बदलाव हुआ। हालांकि, अलग-अलग समय पर सामने आए आंकड़ों में अंतर रहा है, इसलिए वर्तमान संसदीय संख्या को संबंधित सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड से देखना अधिक उचित होगा।
विधानसभा में 58 विधायकों का अलग रुख
पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ा विभाजन सामने आया। 80 विधायकों में से 58 के अलग रुख अपनाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इन विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन दिया था। इसके बाद यह विवाद केवल नेतृत्व के सवाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी की वैध पहचान और नियंत्रण का मामला भी बन गया। यही वजह है कि चुनाव आयोग के सामने यह सवाल आया कि आगामी चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न का इस्तेमाल किस गुट को करने दिया जाए।
चुनाव आयोग के सामने अब असली सवाल
फिलहाल चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चिह्न देकर उपचुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है। लेकिन यह अंतिम फैसला नहीं है कि मूल “All India Trinamool Congress” नाम और “Flowers and Grass” चिह्न का अधिकार किस गुट को मिलेगा।
आयोग का अंतरिम आदेश मूल विवाद के अंतिम निपटारे तक दोनों पक्षों को अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति देता है। इस वजह से आने वाले समय में आयोग के अंतिम निर्णय पर राजनीतिक और कानूनी नजर बनी रहेगी।
उपचुनाव से पहले बदली पूरी तस्वीर
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव अब दोनों गुटों के लिए नई पहचान के साथ होने जा रहे हैं। ममता बनर्जी वाला गुट “Mamata All India Trinamool Congress” और फुटबॉल खिलाड़ी चिह्न के साथ मैदान में होगा, जबकि दूसरा गुट “Democratic Trinamool Congress” और लिफाफा चिह्न के साथ चुनाव लड़ेगा।

इस तरह चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले ने फिलहाल नाम और चुनाव चिह्न को लेकर तत्काल स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार का फैसला अभी बाकी है। 6 अक्टूबर के उपचुनाव दोनों गुटों के लिए पहली बड़ी चुनावी परीक्षा होंगे, जबकि 9 अक्टूबर को आने वाले नतीजों से अलग-अलग चुनावी पहचान के तहत उनकी स्थिति सामने आएगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
