IRCTC केस में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ीं, 9 पर आरोप तय, 7 आरोपी केस से बाहर

IRCTC

IRCTC केस में लालू परिवार समेत 9 पर आरोप, 7 आरोपी हुए केस से बाहर

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)।  IRCTC केस में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कुल नौ आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत के इस आदेश के साथ ही मामले की सुनवाई अब ट्रायल के चरण में आगे बढ़ेगी। वहीं, इस मामले में आरोपी बनाए गए कुल 16 लोगों में से सात को अदालत ने आरोपों से मुक्त कर दिया है।

IRCTC मामले में अदालत का यह आदेश 18 सितंबर 2026 को आया। मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में हुई। आरोप तय करने का मतलब आरोप साबित होना नहीं है। अब अभियोजन पक्ष को अपने साक्ष्य पेश करने होंगे और बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

IRCTC केस में अब किन 9 आरोपियों पर चलेगा मुकदमा?

अदालत के IRCTC आदेश के बाद जिन नौ आरोपियों के खिलाफ मामला आगे बढ़ेगा, उनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, प्रेम चंद गुप्ता, सरला गुप्ता, विनय कोचर, विजय कोचर और दो कंपनियां लारा प्रोजेक्ट्स तथा सुजाता होटल्स शामिल हैं। ये सभी अब PMLA से जुड़े आरोपों में ट्रायल का सामना करेंगे।

निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: क्या BJP को फिर गच्चा देने की तैयारी में नीतीश बाढ़ के बीच JDU विधायकों को क्यों बुलाया…..

IRCTC मामले में आरोपों का केंद्र रांची और पुरी स्थित रेलवे के दो होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका तथा पटना की जमीन से जुड़े कथित लेन-देन को बनाया गया है। CBI के अनुसार, इन दोनों घटनाओं के बीच कथित लेन-देन का संबंध था। बाद में इसी आधार पर ED ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की।

IRCTC होटल टेंडर से शुरू हुई पूरी कहानी

IRCTC मामला उस दौर से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। CBI के आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेलवे के रांची और पुरी स्थित BNR होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका सुजाता होटल्स को दिया गया था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि ठेका देने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ और इसके बदले पटना की एक कीमती जमीन को कथित तौर पर कम कीमत पर हासिल किया गया। एजेंसी के मुताबिक, जमीन का लेन-देन एक ऐसी कंपनी के माध्यम से हुआ, जिसका संबंध प्रेम चंद गुप्ता के परिवार से बताया गया था।

खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े

यही कथित जमीन सौदा बाद में इस मामले का अहम हिस्सा बना। जांच एजेंसियों का दावा है कि होटल ठेका और जमीन का लेन-देन एक-दूसरे से जुड़ा हुआ था। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम परीक्षण अब ट्रायल के दौरान अदालत में पेश होने वाले सबूतों के आधार पर होगा।

लालू यादव पर क्या है आरोप?

जांच एजेंसियों का आरोप है कि रेल मंत्री के पद पर रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने सुजाता होटल्स को रेलवे के दो होटलों का ठेका दिलाने में प्रभाव डाला। CBI के मामले के मुताबिक, ठेका मिलने के बाद पटना की जमीन से जुड़ा कथित लेन-देन सामने आया।

IRCTC में ED ने इसी कथित लेन-देन से जुड़े धन और संपत्तियों की जांच PMLA के तहत की। एजेंसी का कहना है कि बाद में जमीन रखने वाली कंपनी के शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नियंत्रण में आए। जांच में इस हिस्से को भी कथित मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ी के रूप में देखा गया।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत ने इस स्तर पर आरोपों को दोष सिद्ध नहीं माना है। आरोप तय करने का आदेश केवल यह बताता है कि अदालत को मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार दिखाई दिया है। दोष सिद्ध या निर्दोष होने का फैसला ट्रायल के बाद होगा।

7 आरोपियों को मिली बड़ी राहत

मामले में कुल 16 आरोपी बनाए गए थे, लेकिन अदालत ने सात आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया। इनमें राहुल यादव, गौरव गुप्ता, नाथ मल कंकड़िया, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुल्स्यान, राजीव रेलन और एबिहेक्स फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। अदालत के अनुसार इनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया गया। इसका मतलब है कि अब मुकदमे का दायरा नौ आरोपियों तक सीमित रहेगा। अदालत में आगे की कार्रवाई इन्हीं नौ आरोपियों के खिलाफ आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

IRCTC केस में जमीन की डील क्यों बनी अहम कड़ी?

मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में पटना की जमीन का सौदा शामिल है। जांच एजेंसियों के अनुसार, जमीन पहले डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी थी, जिसे बाद में लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जाना गया।

ED के मुताबिक, कंपनी के शेयर बाद में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नियंत्रण में आए। एजेंसी ने आरोप लगाया कि शेयरों का हस्तांतरण कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर हुआ और इसके पीछे होटल ठेके से जुड़े लाभ की कड़ी थी।

यही वजह है कि मामले में केवल रेलवे होटल का टेंडर ही नहीं, बल्कि उसके बाद हुए जमीन और कंपनी के शेयरों से जुड़े लेन-देन को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।

44.75 करोड़ की संपत्ति का मामला क्या है?

IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने वर्ष 2017 में पटना की 11 जमीनों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब ₹44.75 करोड़ बताया गया था। 2018 में PMLA की संबंधित प्राधिकरण प्रक्रिया के तहत इन संपत्तियों की कुर्की की पुष्टि से जुड़ी कार्रवाई भी हुई थी।

ये जमीनें डिलाइट मार्केटिंग कंपनी से जुड़ी बताई गई थीं, जिसका नाम बाद में लारा प्रोजेक्ट्स हुआ। इसलिए ₹44.75 करोड़ की संपत्ति का उल्लेख इस मामले की पुरानी जांच और कुर्की कार्रवाई के संदर्भ में किया जाना चाहिए, न कि 2026 में हुई नई कुर्की के तौर पर।

IRCTC केस में अब आगे क्या होगा?

अदालत के आदेश के बाद मामला अब ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ेगा। अभियोजन पक्ष दस्तावेज, लेन-देन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपने आरोप साबित करने की कोशिश करेगा। इसके बाद बचाव पक्ष को इन आरोपों और साक्ष्यों पर अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।

इस मामले में CBI का मूल मामला रेलवे होटलों के कथित टेंडर अनियमितताओं से जुड़ा है, जबकि ED की कार्रवाई PMLA के तहत कथित अपराध से प्राप्त रकम और संपत्तियों की जांच पर केंद्रित है। दोनों पहलुओं से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

इस बीच, अदालत में आरोप तय होने को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि यह दोषसिद्धि नहीं है। अब मामले में सबूतों की जांच होगी और दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। ट्रायल पूरा होने के बाद ही अदालत यह तय करेगी कि अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोप कानूनी रूप से साबित होते हैं या नहीं।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

You may have missed