बिहार महिला आयोग के 25 साल पूरे, CM सम्राट ने जारी किया डाक टिकट, दिखाई गई डॉक्यूमेंट्री
महिला आयोग के 25 साल पूरे, CM सम्राट ने डाक टिकट जारी किया
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार महिला आयोग ने शनिवार, 19 सितंबर को अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर लिए। पटना के बापू सभागार में आयोजित रजत जयंती समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार राज्य महिला आयोग के विशेष डाक टिकट का विमोचन किया। कार्यक्रम में आयोग की 25 वर्षों की यात्रा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिसमें महिलाओं से जुड़े मामलों, उनकी सुनवाई, समाधान और आयोग की विभिन्न गतिविधियों को सामने रखा गया।
रजत जयंती समारोह में बिहार सरकार के मंत्री, महिला आयोग से जुड़े पदाधिकारी, पूर्व अध्यक्ष और सदस्य, महिला विधायक, सांसद तथा अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाएं भी शामिल हुईं। समारोह का उद्देश्य आयोग की अब तक की यात्रा को याद करने के साथ उसके कामकाज और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर आगे की भूमिका को सामने रखना भी रहा।
महिला आयोग के 25 साल के सफर की झलक
बिहार राज्य महिला आयोग की स्थापना महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई और उनके अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। पिछले 25 वर्षों में आयोग के पास बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंचीं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में 90,788 मामले दर्ज हुए और करीब 75 हजार मामलों का निपटारा किया गया। इनमें 15 हजार से अधिक मामलों को काउंसिलिंग के माध्यम से सुलझाया गया।
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आयोग की रजत जयंती के मौके पर इन्हीं गतिविधियों और उपलब्धियों को डॉक्यूमेंट्री के जरिए प्रदर्शित किया गया। इसमें यह बताने की कोशिश की गई कि अलग-अलग समय में महिलाओं से संबंधित किस तरह के मामले आयोग के सामने आए और उन्हें सुलझाने के लिए किस स्तर पर प्रयास किए गए।
महिला आयोग का अपना डाक टिकट क्यों खास
समारोह में जारी किया गया डाक टिकट भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। आयोग की सदस्य सजल झा के अनुसार, आयोग की ओर से भेजे जाने वाले नोटिस, समन और दूसरे आधिकारिक पत्रों पर डाक टिकट का इस्तेमाल होता है। ऐसे में आयोग के लोगो वाला अपना डाक टिकट जारी करने के पीछे एक अलग पहचान और संदेश देने की सोच है।
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आयोग के लोगो वाले इस विशेष डाक टिकट को उसके कामकाज और संस्थागत पहचान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले समय में आयोग से संबंधित आधिकारिक पत्राचार में इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
डॉक्यूमेंट्री में दिखा 25 साल का पूरा सफर
महिला आयोग की रजत जयंती पर दिखाई गई डॉक्यूमेंट्री में आयोग के 25 वर्षों के कामकाज को समेटने का प्रयास किया गया। इसमें आयोग के पास पहुंचे मामलों और उनके निपटारे से जुड़े आंकड़ों के साथ विभिन्न गतिविधियों को दिखाया गया।

डॉक्यूमेंट्री में यह भी बताया गया कि किन मामलों में काउंसिलिंग के जरिए परिवारों के बीच समझौता कराया गया और किन मामलों में महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके अलावा महिला कैंप और जमीनी स्तर पर की गई गतिविधियों की जानकारी भी इसमें शामिल रही। इस तरह डॉक्यूमेंट्री केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आयोग के कामकाज से जुड़े अनुभवों और चुनौतियों को भी सामने लाने का माध्यम बनी।
महिला आयोग ने लगाए महिला कैंप
बिहार जैसे बड़े राज्य में महिलाओं तक संस्थागत मदद पहुंचाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। इसी वजह से आयोग की ओर से अलग-अलग जिलों में कैंप आयोजित कर मामलों की सुनवाई करने की व्यवस्था भी की गई।
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आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी ‘महिला आयोग आपके द्वार’ कार्यक्रम के तहत विभिन्न जिलों में लंबित मामलों की सुनवाई और उनके निष्पादन का उल्लेख है। 2025-26 में बेगूसराय, मधुबनी, सीतामढ़ी और पटना में 1,717 लंबित मामलों की सुनवाई कर 1,561 मामलों का निष्पादन किया गया था। इस तरह के कैंप का उद्देश्य महिलाओं को हर मामले में पटना स्थित आयोग कार्यालय तक आने की जरूरत कम करना और स्थानीय स्तर पर शिकायतों की सुनवाई उपलब्ध कराना है।
पूर्व अध्यक्ष और सदस्यों को भी बुलाया गया
रजत जयंती समारोह में बिहार राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्षों और सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया। आयोग की सदस्य सजल झा ने कहा कि जिन लोगों ने अपने कार्यकाल के दौरान आयोग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया, उन्हें इस महत्वपूर्ण अवसर का साक्षी बनाया जाना जरूरी था। इसके अलावा बिहार की महिला विधायकों और सांसदों को भी समारोह में आमंत्रित किया गया। अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक रूप दिया।
रजत जयंती का यह आयोजन आयोग के मौजूदा सदस्यों के साथ-साथ उन पूर्व पदाधिकारियों को भी जोड़ने का अवसर बना, जिन्होंने अलग-अलग समय में आयोग की जिम्मेदारी संभाली थी।
महिलाओं से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई पर जोर
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिला आयोग की भूमिका और महिलाओं से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया पर बात की। उन्होंने आयोग की विश्वसनीयता और मामलों में त्वरित कार्यक्षमता की सराहना की।
महिलाओं से जुड़े विवादों में समय पर सुनवाई महत्वपूर्ण होती है। घरेलू विवाद, उत्पीड़न, हिंसा और दूसरे मामलों में शिकायतकर्ता को लंबे समय तक प्रक्रिया का इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में शिकायतों की सुनवाई और संबंधित पक्षों के साथ संवाद आयोग की भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है।
महिला आयोग में ऑनलाइन शिकायत की सुविधा
समय के साथ महिला आयोग की कार्यप्रणाली में भी बदलाव आया है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करने और मामले की स्थिति देखने की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही ‘महिला आयोग आपके द्वार’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए लंबित मामलों की सुनवाई को जिलों तक ले जाने का प्रयास किया गया है।
इससे महिलाओं के लिए शिकायत दर्ज कराने और मामले की जानकारी हासिल करने के विकल्प बढ़े हैं। हालांकि किसी भी शिकायत के निपटारे की प्रक्रिया मामले की प्रकृति और संबंधित तथ्यों पर निर्भर करती है।
रजत जयंती से आगे की भूमिका पर नजर
बिहार महिला आयोग के 25 वर्ष पूरे होने का समारोह सिर्फ स्थापना दिवस तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम में आयोग के अब तक के कामकाज को दस्तावेज के रूप में सामने रखा गया और भविष्य की भूमिका के लिए भी चर्चा का आधार तैयार हुआ।
पिछले 25 वर्षों में हजारों मामले आयोग तक पहुंचे हैं। ऐसे में आने वाले समय में शिकायतों की सुनवाई को और प्रभावी बनाने, महिलाओं तक संस्थागत मदद पहुंचाने और जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान महत्वपूर्ण रहेगा।
बिहार राज्य महिला आयोग की रजत जयंती पर जारी विशेष डाक टिकट और दिखाई गई डॉक्यूमेंट्री ने आयोग की 25 वर्ष की यात्रा को एक साथ सामने रखा। समारोह में पूर्व पदाधिकारियों, वर्तमान सदस्यों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने भी इस अवसर को व्यापक बनाया। अब 25 वर्ष पूरे होने के बाद आयोग की अगली पारी में महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई और समाधान की व्यवस्था किस तरह आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
