बिहार में बाढ़ का कहर, 1050 ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त, मरम्मत में होगी 1000 करोड़ की जरूरत
बिहार बाढ़ से 1050 ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त, मरम्मत पर खर्च होगा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में बाढ़ ने इस बार ग्रामीण इलाकों के सड़क नेटवर्क को भी बड़े स्तर पर प्रभावित किया है। राज्य के 17 जिलों में 1050 से अधिक ग्रामीण सड़कें बाढ़ के पानी की चपेट में आने की प्रारंभिक जानकारी सामने आई है। इन सड़कों की कुल लंबाई करीब 2000 किलोमीटर बताई जा रही है। ग्रामीण कार्य विभाग को जिलों से मिली शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि बाढ़ से प्रभावित सड़कों की मरम्मत और पुनर्बहाली पर करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।
हालांकि अभी यह अंतिम नुकसान का आंकड़ा नहीं है। बड़ी संख्या में सड़कें अब भी पानी में डूबी हुई हैं, इसलिए उनका वास्तविक नुकसान सामने नहीं आया है। विभाग का कहना है कि पानी पूरी तरह उतरने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सी सड़क कितनी क्षतिग्रस्त हुई है और किन सड़कों को पूरी तरह से दोबारा बनाने की जरूरत पड़ेगी।
बाढ़ से 17 जिलों का ग्रामीण सड़क नेटवर्क प्रभावित
ग्रामीण कार्य विभाग के स्तर से प्रभावित जिलों से सड़कों की स्थिति की दैनिक रिपोर्ट मांगी जा रही है। अधिकारियों को लगातार निगरानी करने और पानी कम होने के साथ ही मरम्मत की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है कि कई ग्रामीण सड़कें लंबे समय से पानी में डूबी हुई हैं। लगातार पानी में रहने से सड़क की सतह, किनारे और नीचे की संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ऐसे में पानी उतरने के बाद तकनीकी टीमों द्वारा सड़क की स्थिति का आकलन करना जरूरी होगा।
भागलपुर में सबसे ज्यादा सड़कें प्रभावित
बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण सड़कों के शुरुआती आंकड़ों में भागलपुर और पटना जिले सबसे ऊपर बताए जा रहे हैं। भागलपुर में 151 ग्रामीण सड़कें बाढ़ के पानी में डूबी होने की जानकारी मिली है। वहीं पटना जिले में 140 ग्रामीण सड़कें प्रभावित बताई गई हैं।
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इन सड़कों पर पानी लंबे समय तक बने रहने से आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि बाजार, अस्पताल, स्कूल और प्रखंड मुख्यालय तक पहुंच के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का असर स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
पटना में दानापुर क्षेत्र पर बाढ़ का ज्यादा असर
पटना जिले के भीतर भी सभी इलाकों में नुकसान एक जैसा नहीं है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार दानापुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा 44 ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुई हैं। बाढ़ का पानी कम होने के बाद इन सड़कों की वास्तविक स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा।
विभाग की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखें। पानी उतरने के बाद जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू किया जा सकता है।
बाढ़ के बाद सामने आएगा वास्तविक नुकसान
ग्रामीण कार्य विभाग के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती वास्तविक नुकसान का आकलन करना है। पानी में डूबी सड़क का केवल ऊपरी हिस्सा देखकर यह तय करना मुश्किल होता है कि सड़क की अंदरूनी संरचना कितनी प्रभावित हुई है।
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इसी वजह से विभाग ने अभी करीब 1000 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया है। पानी कम होने के बाद सड़कवार निरीक्षण और तकनीकी जांच के आधार पर वास्तविक लागत सामने आएगी। कुछ सड़कों पर मामूली मरम्मत से काम चल सकता है, जबकि ज्यादा क्षतिग्रस्त हिस्सों के पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ सकती है।
बाढ़ ने पेयजल व्यवस्था को भी पहुंचाया नुकसान
बाढ़ का असर केवल ग्रामीण सड़कों तक सीमित नहीं रहा है। पिछले महीने आई बाढ़ के दौरान ग्रामीण इलाकों की पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब 3800 चापाकल और नल-जल योजनाएं बाढ़ की चपेट में आई हैं।
कई चापाकल कई दिनों तक पानी में डूबे रहे। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण इनके खराब होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे स्थानों पर पुराने चापाकलों की मरम्मत के साथ नए चापाकल लगाने की जरूरत भी पड़ सकती है।
75 प्रखंडों की 307 पंचायतें प्रभावित
आपदा प्रबंधन विभाग को पीएचईडी की ओर से मिली जानकारी के अनुसार प्रभावित पेयजल योजनाएं राज्य के 75 प्रखंडों की 307 पंचायतों में हैं। बाढ़ का पानी कम होने के बाद इन इलाकों में पेयजल व्यवस्था को सामान्य करने का काम शुरू किया जाएगा।
प्रभावित चापाकलों और नल-जल योजनाओं की संख्या को देखते हुए विभाग ने इसके लिए भी खर्च का प्रारंभिक अनुमान तैयार किया है। मरम्मत और नए चापाकल लगाने समेत अन्य कार्यों पर करीब 24.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
भागलपुर में 760 चापाकल प्रभावित
पेयजल व्यवस्था के नुकसान के मामले में भागलपुर सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। भागलपुर पीएचईडी प्रमंडल में 760 चापाकल प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
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इसके बाद खगड़िया में 450 चापाकल प्रभावित बताए गए हैं। पटना पूर्वी और पश्चिमी प्रमंडल में कुल 294 चापाकलों के प्रभावित होने की जानकारी है। इसके अलावा किशनगंज में 206, हाजीपुर में 136 और बेगूसराय में 134 चापाकल खराब होने की रिपोर्ट मिली है।
बाढ़ का पानी उतरते ही शुरू होगी बहाली
विभागों की प्राथमिकता फिलहाल पानी कम होने के बाद जरूरी सेवाओं को तेजी से बहाल करना है। ग्रामीण कार्य विभाग सड़क नेटवर्क की स्थिति का आकलन करेगा, जबकि पीएचईडी की ओर से प्रभावित पेयजल स्रोतों और योजनाओं की जांच की जाएगी।

जिन इलाकों में चापाकल पूरी तरह खराब हो चुके हैं, वहां जरूरत के अनुसार नए चापाकल लगाए जा सकते हैं। वहीं नल-जल योजनाओं में आई खराबी को दूर करने का भी प्रयास किया जाएगा।
ग्रामीण इलाकों में सामान्य स्थिति लौटाने की चुनौती
बिहार बाढ़ के बाद ग्रामीण इलाकों में सामान्य जनजीवन बहाल करना सरकार और संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती होगी। सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर असर पड़ने से बाढ़ प्रभावित लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अभी सामने आए आंकड़े प्रारंभिक रिपोर्ट पर आधारित हैं। पानी पूरी तरह उतरने के बाद सड़क और पेयजल व्यवस्था को हुए नुकसान की विस्तृत तस्वीर सामने आएगी। इसके बाद मरम्मत और पुनर्निर्माण की वास्तविक जरूरत तथा खर्च का आकलन किया जा सकेगा।
फिलहाल ग्रामीण कार्य विभाग और पीएचईडी दोनों स्तरों पर प्रभावित इलाकों की निगरानी की जा रही है। विभागों का जोर पानी कम होते ही जरूरी मरम्मत कार्य शुरू करने और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन तथा पेयजल व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य करने पर है।
राज कुमार की रिपोर्ट
