पटना में बारिश के बाद बीमारियां बढ़ीं, टाइफाइड के 300 से अधिक मरीज मिले, रहें सावधान

बारिश

पटना में बारिश के बाद टाइफाइड के 300 से अधिक मरीज मिले

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में बारिश और बदलते मौसम के बाद संक्रामक बीमारियों का असर बढ़ता दिखाई दे रहा है। राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में बुखार, टाइफाइड और वायरल संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।

पिछले एक सप्ताह के दौरान पीएमसीएच, आईजीआईएमएस, एनएमसीएच, एम्स पटना और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में 300 से अधिक मरीजों में टाइफाइड की पुष्टि होने की रिपोर्ट सामने आई है। पांच अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार पीएमसीएच में 98, आईजीआईएमएस में 92, एनएमसीएच में 45, एम्स पटना में 58 और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में 7 मरीजों में टाइफाइड की पुष्टि हुई।

बारिश के बाद अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

मौसम में बदलाव और बारिश के बाद पटना के अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। बाढ़ और जलजमाव प्रभावित इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग बुखार, दस्त और संक्रमण संबंधी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। पीएमसीएच में हाल के दिनों में वायरल बुखार, दस्त और टाइफाइड से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई है।

निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: IIT Mumbai में छात्र की मौत से IIT पटना में जांच की मांग…

डॉक्टर मरीजों के लक्षणों के आधार पर जरूरी जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। बारिश में लगातार बुखार या अन्य लक्षण बने रहने पर मरीजों को खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा जा रहा है।

पटना में पांच अस्पतालों में टाइफाइड के आंकड़े

बारिश के बाद पिछले एक सप्ताह में सामने आए आंकड़ों में पीएमसीएच सबसे अधिक मामलों वाले अस्पतालों में शामिल है। यहां 98 मरीजों में टाइफाइड की पुष्टि बताई गई है। इसके बाद आईजीआईएमएस में 92, एम्स पटना में 58, एनएमसीएच में 45 और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में 7 मरीजों के टाइफाइड से संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों को जोड़ने पर संख्या 300 से अधिक पहुंचती है।

अस्पतालों के अनुसार कुछ समय पहले तक टाइफाइड के मरीजों की संख्या इससे काफी कम थी। बारिश के बाद संक्रमण से जुड़े मरीजों की बढ़ती संख्या ने अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ाया है।

बीमारियां बढ़ने के बीच वायरल बुखार की भी जांच

टाइफाइड के अलावा वायरल बुखार और अन्य संक्रमण के लक्षण वाले मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। मरीजों में तेज बुखार, कमजोरी, चक्कर, गले में दर्द, खांसी और शरीर में दर्द जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।

खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े

हालांकि ऐसे लक्षण केवल किसी एक बीमारी की पुष्टि नहीं करते। डॉक्टर जरूरत के अनुसार अलग-अलग जांच कराने के बाद बीमारी का पता लगा रहे हैं। मौसम में बदलाव के बीच वायरल संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई है।

पटना में जलजमाव से बढ़ी परेशानी

बारिश के बाद पटना के कई इलाकों में जलजमाव की समस्या भी सामने आई है। कंकड़बाग, बुद्धा कॉलोनी, राजीव नगर, बोरिंग रोड, गर्दनीबाग, दानापुर, महेंद्रू और नेपाली नगर समेत कई क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर पानी जमा होने की शिकायतें बताई जा रही हैं।

जलजमाव लंबे समय तक रहने पर गंदगी और मच्छरों के पनपने की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा दूषित पानी और खराब स्वच्छता व्यवस्था के कारण पानी और भोजन से फैलने वाले संक्रमण का जोखिम भी बढ़ सकता है।

बीमारियां रोकने के लिए फॉगिंग और एंटी-लार्वा पर जोर

शहर के कुछ इलाकों में स्थानीय लोगों ने नियमित फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव नहीं होने की शिकायत की है। टूटी नालियां, जमा पानी, तालाबों के आसपास उगी घास और गंदगी को भी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल स्थिति माना जा रहा है।

बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ने पर डेंगू और अन्य मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। सितंबर में पटना में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी की रिपोर्ट भी सामने आई है।

टाइफाइड के मामलों को लेकर बिहार में भी चिंता

पटना में बढ़ते मामलों को राज्य के व्यापक स्वास्थ्य परिदृश्य से अलग करके नहीं देखा जा सकता। सरकारी अस्पतालों में अगस्त 2026 के दौरान बिहार में 4,102 टाइफाइड मामलों की पुष्टि होने और सितंबर के शुरुआती दिनों में भी नए मामले सामने आने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।

इसे भी पढ़ें: जमुई कांड में मुख्य आरोपी का एनकाउंटर, मुठभेड़ में पुलिस ने मारी गोली, अबतक 6 गिरफ्तार

इससे संकेत मिलता है कि टाइफाइड केवल राजधानी तक सीमित समस्या नहीं है। हालांकि अलग-अलग अस्पतालों और जिलों के आंकड़ों की जांच पद्धति और रिपोर्टिंग अवधि अलग हो सकती है, इसलिए आंकड़ों की सीधी तुलना करते समय सावधानी जरूरी है।

स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों पर भी नजर

मौसम बदलने के साथ सांस संबंधी लक्षणों वाले मरीजों की भी जांच की जा रही है। अस्पतालों में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों के सैंपल लिए जाने की जानकारी सामने आई है। संदिग्ध मरीजों के नमूने जांच के लिए आरएमआरआई सेंटर भेजे जा रहे हैं।

बुखार के साथ खांसी, गले में दर्द, कमजोरी या शरीर में दर्द होने पर मरीजों की चिकित्सकीय जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य अलग-अलग संक्रमणों के लक्षणों में अंतर करना और जरूरत के अनुसार इलाज शुरू करना है।

मरीज किन बातों का रखें ध्यान?

बारिश के मौसम में लोगों को पीने के पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर का खुला या संदिग्ध भोजन खाने से बचना, भोजन को ढककर रखना और हाथों की साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है।

घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना भी महत्वपूर्ण है। कूलर, गमले, पुराने डिब्बे, टायर या अन्य ऐसे स्थान जहां पानी ठहर सकता है, उन्हें नियमित रूप से साफ करना चाहिए। मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े और मच्छरदानी जैसे उपाय किए जा सकते हैं।

लगातार बुखार को नजरअंदाज न करें

चिकित्सकों के अनुसार बारिश के बाद सामान्य वायरल बुखार और दूसरी संक्रामक बीमारियों के लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर खुद से दवा शुरू करना उचित नहीं है।

अगर बुखार लगातार बना रहता है, कमजोरी बढ़ती है, शरीर में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

फिलहाल पटना में बारिश के बाद संक्रमण संबंधी बीमारियों को लेकर अस्पतालों में सतर्कता बढ़ी हुई है। पांच प्रमुख अस्पतालों में एक सप्ताह में 300 से अधिक टाइफाइड मामलों की रिपोर्ट के बीच वायरल बुखार और मच्छरजनित बीमारियों की भी निगरानी की जा रही है। जलजमाव और बदलते मौसम के बीच आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या पर स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों की नजर बनी रहेगी।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

You may have missed