बसपा में बड़ा बदलाव: मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया राष्ट्रीय संयोजक, आकाश के बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी
मायावती ने ईशान आनंद को बनाया राष्ट्रीय संयोजक
निष्कर्ष भारत संवाददाता- लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है। पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार, 23 सितंबर को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की बैठक में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक (National Coordinator) नियुक्त किया। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां चल रही हैं और पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
बैठक के दौरान ईशान आनंद अपने पिता और मायावती के भाई आनंद कुमार के साथ मौजूद रहे। ईशान ने बैठक से पहले मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में उनकी भूमिका बढ़ने की संभावना है।
मायावती ने ईशान आनंद को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
लखनऊ स्थित बसपा मुख्यालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता मायावती ने की। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ संगठन, आगामी चुनाव और पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई। इसी बैठक में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने की घोषणा की गई।

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ईशान आनंद की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब उनके बड़े भाई आकाश आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाया जा चुका है। इसके बाद मायावती ने छोटे भतीजे ईशान को संगठन में आगे बढ़ाने का संकेत दिया था। अब उस घोषणा को अमल में लाते हुए उन्हें महत्वपूर्ण पद सौंप दिया गया है।
आकाश आनंद के बाद ईशान पर भरोसा
ईशान आनंद से पहले राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी उनके बड़े भाई आकाश आनंद के पास थी। आकाश आनंद को पहले मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर भी आगे बढ़ाया गया था। हालांकि, पिछले कुछ समय में पार्टी के भीतर उनकी भूमिका को लेकर कई बदलाव हुए।
सितंबर की शुरुआत में आकाश आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से अलग किया गया और बाद में उन्हें बसपा से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद मायावती ने अपने परिवार के सदस्यों को पार्टी में पद देने के संबंध में कई बयान दिए। पहले उन्होंने परिवार के दोनों बेटों को जिम्मेदारी नहीं देने की बात कही थी, लेकिन बाद में छोटे भतीजे ईशान आनंद को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने का संकेत दिया।
सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दिए थे संकेत
मायावती ने 20 सितंबर को सोशल मीडिया के माध्यम से ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देने की बात कही थी। वहीं, आकाश आनंद और दीपिका आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर रखने का संकेत दिया गया था।
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मायावती ने अपने बयानों में पार्टी के संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा था कि बसपा में परिवारवाद के बजाय संगठन और बहुजन समाज के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके बावजूद ईशान आनंद को पार्टी में जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया है।
ईशान आनंद की भूमिका क्या होगी?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईशान आनंद को पार्टी के कामकाज को समझने और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करना होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता राजाराम और रामजी गौतम उन्हें संगठन से जुड़े कामकाज की जानकारी देंगे।
राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर ईशान की भूमिका पार्टी के केंद्रीय संगठन, राज्यों में समन्वय और कार्यकर्ताओं से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, उनकी जिम्मेदारियों का वास्तविक दायरा पार्टी के आधिकारिक निर्देशों और आगे होने वाले संगठनात्मक फैसलों से स्पष्ट होगा।
आगामी विधानसभा चुनावों पर बसपा का फोकस
बसपा की यह बैठक आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब और उत्तराखंड में होने वाले चुनावों को लेकर पार्टी संगठन की समीक्षा कर रही है।
बैठक में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी रणनीति तैयार करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। पार्टी की कोशिश राज्य स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने और जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की है।
परिवार और संगठन को लेकर मायावती का रुख
ईशान आनंद को जिम्मेदारी देने के साथ ही मायावती ने परिवार और पार्टी संगठन से जुड़े अपने रुख को भी स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी में परिवार के सदस्य काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें किसी प्रकार के निजी स्वार्थ के बिना संगठन के लिए काम करना होगा।
ईशान आनंद की नियुक्ति के बाद बसपा के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईशान पार्टी की जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं और आगामी चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने में उनकी क्या भूमिका रहती है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
