पटना में ट्रक चोर गैंग पर शिकंजा, 7 गिरफ्तार, कई वाहन बरामद

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पटना में ट्रक चोरी गैंग का खुलासा, 7 आरोपी गिरफ्तार, वाहन बरामद

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में ट्रक चोरी के मामलों की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। शहर और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही वाहन चोरी की घटनाओं के बीच पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो चोरी के ट्रकों को गैराज और कबाड़खाने में ले जाकर उनके पार्ट्स अलग करता था।

इसके बाद वाहनों के हुलिए और कुछ हिस्सों में बदलाव कर उन्हें बेचने की कोशिश की जाती थी। रानीतालाब और फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से चोरी के ट्रक, ट्रेलर और कटिंग-मॉडिफिकेशन में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण बरामद किए गए हैं।

वाहन चोरी रोकने के लिए बनी थी विशेष टीम

पश्चिमी पटना के अलग-अलग इलाकों से लगातार वाहन चोरी की शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने और गिरोह का पता लगाने के लिए विशेष टीम का गठन किया गया। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि रानीतालाब थाना क्षेत्र के निसरपुरा स्थित एक पेट्रोल पंप के पास गैराज में चोरी के ट्रकों को काटने का काम चल रहा है।

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सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने गैराज की घेराबंदी कर छापेमारी की। पुलिस के पहुंचने के समय वहां एक ट्रक को काटकर उसका हुलिया बदलने का काम चल रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से पांच लोगों को पकड़ लिया। इसके बाद पूछताछ शुरू की गई तो वाहन चोरी से जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आने लगी।

गैराज में काटे जा रहे थे चोरी के ट्रक

पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने गैराज के संचालन और चोरी के वाहनों से जुड़े कामकाज के बारे में जानकारी दी। पुलिस का दावा है कि गैराज का मालिक झारखंड और दूसरे इलाकों से चोरी किए गए ट्रक लाता था। यहां वाहनों की कटिंग कर उनके अलग-अलग पार्ट्स निकालने का काम किया जाता था।

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ट्रक के हिस्से अलग करने के बाद उनकी पहचान और बाहरी स्वरूप में बदलाव किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल चोरी के वाहनों की पहचान छिपाने और उनके पार्ट्स या बदले हुए वाहन को आगे बेचने के लिए किया जाता था। हालांकि, गिरोह ने अब तक कितने वाहनों को निशाना बनाया और कितने ट्रकों को इस तरीके से बदला गया, इसकी जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

पूछताछ में फुलवारीशरीफ का कनेक्शन

रानीतालाब के गैराज में कार्रवाई के बाद गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को फुलवारी शरीफ इलाके में भी चोरी के ट्रकों के रखे जाने और उनकी बिक्री से जुड़ी जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपियों की निशानदेही पर दूसरी जगह कार्रवाई की।

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फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र के नकटी भवानी स्थित वास्तु विहार अपार्टमेंट के आसपास सड़क के उत्तर तरफ चल रहे एक कबाड़खाने को पुलिस ने निशाना बनाया। टीम ने यहां छापेमारी की तो कई संदिग्ध वाहन और ट्रकों की कटिंग में इस्तेमाल होने वाले उपकरण मिले।

ट्रक और ट्रेलर समेत कई वाहन बरामद

कबाड़खाने से पुलिस ने 14 चक्का टाटा मोटर्स का एक ट्रक, कटा हुआ 12 चक्का ट्रक और एक ट्रेलर बरामद किया। इसके अलावा वेल्डिंग मशीन, ग्राइंडर, दो गैस सिलेंडर और दो गैस कटर भी मिले। मौके से एक मोटरसाइकिल समेत कई ऐसे उपकरण बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल ट्रकों की कटिंग और उनके स्वरूप में बदलाव करने के लिए किया जा सकता था।

पुलिस ने यहां से दो आरोपियों को 12 चक्का ट्रक के साथ गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद रानीतालाब और फुलवारी शरीफ की दोनों छापेमारी में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या सात हो गई।

कौन-कौन आरोपी गिरफ्तार हुए?

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद सागर, मोहम्मद सलाउद्दीन, मोहम्मद राजा, मोहम्मद उस्मान गनी, चंदन कुमार उर्फ चंदू, दिलीप कुमार और मोहम्मद जीशान के रूप में हुई है।

पुलिस के मुताबिक मोहम्मद सागर की उम्र 25 वर्ष, मोहम्मद सलाउद्दीन की 30 वर्ष, मोहम्मद राजा की 24 वर्ष, मोहम्मद उस्मान गनी की 19 वर्ष और चंदन कुमार उर्फ चंदू की उम्र 48 वर्ष है। दिलीप कुमार और मोहम्मद जीशान भी इस मामले में गिरफ्तार किए गए हैं।

आरोपियों के ठिकानों की बात करें तो सागर और सलाउद्दीन पटना के रहने वाले बताए गए हैं। राजा और उस्मान गनी फुलवारी शरीफ के निवासी हैं। चंदन कुमार उर्फ चंदू जहानाबाद, दिलीप कुमार मधुबनी और मोहम्मद जीशान अरवल का निवासी बताया गया है।

ट्रक चोरी के नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

पटना सिटी के पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि वाहन चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए गठित टीम को निसरपुरा के एक गैराज में चोरी के ट्रकों की कटिंग और मॉडिफिकेशन किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि गिरोह ने अब तक कितने ट्रक चोरी किए हैं। चोरी के वाहन किन-किन जिलों या राज्यों से लाए जाते थे और उन्हें पटना तक पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।

चोरी के ट्रक कहां बेचे जाते थे, इसकी भी तलाश

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ट्रकों से निकाले गए पार्ट्स और मॉडिफाइड वाहनों को कहां बेचा जाता था। पुलिस को आशंका है कि चोरी के वाहनों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर बेचने से उनकी पहचान छिपाना आसान हो जाता है।

बरामद वाहनों और उपकरणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि बरामद ट्रक और ट्रेलर किन मामलों में चोरी हुए थे और उनके असली मालिक कौन हैं। वाहनों के इंजन, चेसिस और अन्य पहचान संबंधी हिस्सों की जांच से चोरी के पुराने मामलों से भी कड़ियां जुड़ सकती हैं।

दो ठिकानों पर हुई कार्रवाई से खुला नेटवर्क

रानीतालाब के गैराज और फुलवारी शरीफ के कबाड़खाने में हुई कार्रवाई से पुलिस को वाहन चोरी के एक संगठित नेटवर्क का सुराग मिला है। खास बात यह है कि चोरी के बाद वाहनों को सीधे बेचने के बजाय उनके पार्ट्स अलग करने और हुलिया बदलने की व्यवस्था की गई थी। इससे पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती भी है कि गिरोह ने किन-किन स्थानों पर चोरी के वाहनों को खपाया।

सातों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामद वाहनों की जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर वाहन चोरी के दूसरे मामलों का भी खुलासा हो सकता है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और चोरी के वाहनों के खरीदारों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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