रूस में पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत, फिर उठा सवाल- जब सत्ता परिवर्तन की संभावना कम तो चुनाव क्यों?

पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूनाइटेड रशिया पार्टी की चुनावी जीत

निष्कर्ष भारत संवाददाता- रूस में संसदीय चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनकी सत्ताधारी पार्टी यूनाइटेड रशिया की मजबूत पकड़ को सामने रखा है। केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, 95 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती के बाद यूनाइटेड रशिया को 57.83 प्रतिशत वोट मिले और पार्टी को 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में 355 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। इससे पार्टी का संवैधानिक बहुमत बरकरार रहा।

हालांकि, इस चुनाव को सीधे रूस के राष्ट्रपति चुनाव के तौर पर देखना सही नहीं होगा। हालिया मतदान मुख्य रूप से रूस की संसद के निचले सदन यानी स्टेट ड्यूमा के लिए हुआ था। पुतिन की पार्टी की जीत से उनकी सरकार को विधायी समर्थन मिलता है, लेकिन संसदीय चुनाव का परिणाम अपने आप राष्ट्रपति का कार्यकाल तय नहीं करता।

रूस में चुनाव प्रक्रिया, सत्ता में निरंतरता और मतदाताओं की भूमिका को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि जब चुनाव में सत्ताधारी पार्टी की जीत की संभावना पहले से अधिक मानी जा रही हो, तब भी मतदान का राजनीतिक और संस्थागत महत्व क्यों बना रहता है।

यूनाइटेड रशिया को मिली 355 सीटें

रूस की केंद्रीय चुनाव आयोग के शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यूनाइटेड रशिया ने पार्टी-लिस्ट वोट में 57.83 प्रतिशत मत हासिल किए। 2021 के पिछले संसदीय चुनाव में पार्टी को 49.8 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार पार्टी को 450 सीटों वाली स्टेट ड्यूमा में 355 सीटें मिलने की जानकारी सामने आई है।

यह परिणाम पार्टी को संवैधानिक बहुमत देता है। इस बहुमत के कारण यूनाइटेड रशिया को कई विधायी प्रक्रियाओं में अन्य दलों के समर्थन पर निर्भरता कम रहती है। संवैधानिक संशोधन शुरू करने और महत्वपूर्ण कानूनों को आगे बढ़ाने में भी इस बहुमत की भूमिका हो सकती है।

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यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के सैन्य हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव था। पुतिन ने इसे युद्ध और अपनी नीतियों के प्रति समर्थन के आकलन के रूप में पेश किया था।

क्या चुनाव से पुतिन का राष्ट्रपति पद तय होता है?

रूस में संसदीय चुनाव और राष्ट्रपति चुनाव अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। स्टेट ड्यूमा के चुनाव में मतदाता संसद के निचले सदन के प्रतिनिधियों का चयन करते हैं, जबकि राष्ट्रपति का चुनाव अलग प्रक्रिया के तहत होता है।

इसलिए यूनाइटेड रशिया की जीत का अर्थ यह नहीं है कि इसी चुनाव के जरिए पुतिन दोबारा राष्ट्रपति चुने गए हैं। हां, संसद में पार्टी का मजबूत बहुमत पुतिन के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों को लागू करने में मदद कर सकता है।

राष्ट्रपति के कार्यकाल और चुनाव से जुड़े संवैधानिक प्रावधान अलग हैं। 2020 में रूस के संविधान में किए गए बदलावों ने पुतिन के संभावित भविष्य के कार्यकालों का रास्ता बदला था। इस कारण संसदीय चुनाव के नतीजों को राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम से अलग समझना जरूरी है।

रूस में चुनाव की जरूरत क्यों पड़ती है?

जब किसी देश में सत्ताधारी पार्टी की जीत की संभावना काफी अधिक हो, तो यह सवाल उठ सकता है कि चुनाव कराने का उद्देश्य क्या है। इसका जवाब कई स्तरों पर समझा जा सकता है।

सबसे पहले, चुनाव संसद के गठन की औपचारिक प्रक्रिया है। स्टेट ड्यूमा में अलग-अलग दलों और निर्वाचन क्षेत्रों से प्रतिनिधि चुने जाते हैं। इसके अलावा चुनाव सत्ताधारी पार्टी के लिए जनता के समर्थन का दावा पेश करने का माध्यम भी बन सकता है।

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रूस के अधिकारियों ने चुनाव को देश की एकता और सरकार के समर्थन के प्रदर्शन के रूप में पेश किया। दूसरी ओर, आलोचकों ने राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, विपक्षी उम्मीदवारों की भागीदारी और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

इस तरह चुनाव का महत्व केवल सत्ता बदलने तक सीमित नहीं होता। यह सरकार को राजनीतिक वैधता का दावा करने, मतदाताओं की भागीदारी दर्ज करने और संसद के लिए प्रतिनिधियों का चयन करने का अवसर भी देता है।

रूस में वोट का क्या महत्व है?

रूस में स्टेट ड्यूमा के 450 सदस्यों का चुनाव दो तरीकों से होता है। आधी यानी 225 सीटें पार्टी-लिस्ट आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से चुनी जाती हैं। इस व्यवस्था में पार्टियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त वोट के आधार पर सीटें मिलती हैं और संसद में प्रवेश के लिए 5 प्रतिशत की सीमा महत्वपूर्ण होती है।

बाकी 225 सीटें सिंगल-मेंबर निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं। इन क्षेत्रों में मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवारों के बीच मतदान करते हैं। जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, वह सीट जीत सकता है।

इस व्यवस्था के कारण एक वोट का प्रभाव उसके क्षेत्र और चुनावी मुकाबले के अनुसार अलग हो सकता है। पार्टी-लिस्ट चुनाव में वोट किसी पार्टी के राष्ट्रीय मत प्रतिशत और सीटों के वितरण में योगदान करता है। वहीं, सिंगल-मेंबर सीट पर कुछ वोटों का अंतर भी उम्मीदवार की जीत या हार तय कर सकता है।

पांच प्रतिशत की सीमा क्यों महत्वपूर्ण है?

रूस की पार्टी-लिस्ट प्रणाली में 5 प्रतिशत की चुनावी सीमा का विशेष महत्व है। यदि कोई पार्टी इस सीमा को पार नहीं कर पाती है, तो उसे पार्टी-लिस्ट के जरिए संसद में प्रतिनिधित्व हासिल करने में कठिनाई होती है।

इसका अर्थ यह है कि किसी पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कुछ प्रतिशत वोट हासिल करना केवल आंकड़ा नहीं है, बल्कि संसद में प्रवेश से जुड़ी शर्त भी हो सकती है। इसलिए छोटे दलों के लिए प्रत्येक वोट महत्वपूर्ण हो जाता है।

हालिया चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी, एलडीपीआर और न्यू पीपल्स पार्टी समेत अन्य दलों ने भी वोट हासिल किए। आधिकारिक शुरुआती परिणामों के अनुसार, यूनाइटेड रशिया के अलावा चार अन्य पार्टियां संसद में पहुंचने की स्थिति में थीं।

चुनाव की निष्पक्षता को लेकर उठे सवाल

रूस के हालिया संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया की जीत के बाद चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी चर्चा हुई। आलोचकों ने विपक्षी दलों और उम्मीदवारों की भागीदारी, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।

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एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव में विश्वसनीय विपक्ष की सीमित मौजूदगी और इलेक्ट्रॉनिक मतदान को लेकर आलोचनाएं सामने आईं। वहीं, रूसी अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया को वैध और व्यवस्थित बताया।

ऐसे मामलों में आधिकारिक चुनाव परिणाम और चुनाव की स्वतंत्र निगरानी या आलोचनात्मक आकलन को अलग-अलग देखना जरूरी है। किसी चुनाव में मतदान होना और उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता या निष्पक्षता पर सहमति होना दो अलग बातें हैं।

पुतिन की पार्टी की जीत का राजनीतिक असर

यूनाइटेड रशिया की 355 सीटों की जीत से संसद में पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है। इससे सरकार को कानूनों और नीतियों को आगे बढ़ाने में अधिक समर्थन मिल सकता है। यूक्रेन युद्ध के बीच हुए इस चुनाव को पुतिन प्रशासन ने घरेलू समर्थन के संकेत के तौर पर भी प्रस्तुत किया।

हालांकि, चुनावी नतीजों से जनता की सभी राय या देश के हर नागरिक के विचारों का एक समान निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। मतदान प्रतिशत, राजनीतिक परिस्थितियां, विपक्ष की उपलब्धता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता जैसे कई कारक नतीजों की व्याख्या को प्रभावित करते हैं।

रूस का हालिया चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक ओर सत्ताधारी पार्टी का संसदीय बहुमत मजबूत हुआ है, वहीं दूसरी ओर चुनावी प्रतिस्पर्धा, विपक्ष की भूमिका और मतदाताओं के वास्तविक प्रभाव को लेकर बहस भी जारी है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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