शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, इन 3 कारणों से टूटा मार्केट, जानें वजह
शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1200 अंक तक टूटा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। शेयर बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में दबाव के बाद दोपहर तक बिकवाली तेज हो गई और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार में बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा कंपनियों के शेयरों पर खास दबाव रहा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी।
इसके साथ ही मजबूत अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक तनाव ने भी घरेलू बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर किया। 24 सितंबर के बाजार अपडेट में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ था और अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5.11 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
शेयर बाजार में दोपहर तक बढ़ी बिकवाली
कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता गया। दिए गए बाजार अपडेट के अनुसार दोपहर करीब दो बजे सेंसेक्स लगभग 1.65 प्रतिशत टूटकर 73,604.25 के आसपास आ गया था। इस दौरान इसमें करीब 1,200 अंकों की गिरावट देखी गई। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 1.64 प्रतिशत नीचे 23,070.05 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
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हालांकि बाजार के शुरुआती अपडेट में गिरावट कुछ कम थी। सुबह करीब 9.30 बजे सेंसेक्स 576 अंक और निफ्टी लगभग 202 अंक नीचे था। इसके बाद जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव बढ़ता गया।
वित्तीय और बीमा शेयरों पर खास दबाव
गिरावट का असर कई बड़े शेयरों पर दिखाई दिया। एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, श्रीराम फाइनेंस और बजाज फिनसर्व जैसे शेयरों में कमजोरी ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के साथ बीमा कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली रही।
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ऐसे समय में जब बाजार के प्रमुख इंडेक्स में बड़ी कंपनियों का वजन अधिक होता है, इन शेयरों में गिरावट का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ता है। यही वजह है कि कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी से पूरे बाजार का माहौल तेजी से खराब हुआ।
कच्चा तेल बना शेयर बाजार की सबसे बड़ी चिंता
शेयर बाजार में गिरावट की पहली बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। 24 सितंबर के शुरुआती कारोबार में यह करीब 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता के कारण तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव, महंगाई की चिंता और कंपनियों की लागत बढ़ने जैसी आशंकाएं पैदा होती हैं। यही कारण है कि कच्चे तेल में तेज उछाल को भारतीय शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई बाजार की चिंता
गिरावट की दूसरी महत्वपूर्ण वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी है। अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5.11 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसे बाजार ने गंभीरता से लिया। ऊंची बॉन्ड यील्ड का मतलब है कि सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी बॉन्ड से निवेशकों को अधिक रिटर्न मिल सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों की इक्विटी में निवेश को लेकर जोखिम की धारणा बदल सकती है।
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इसके अलावा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से महंगाई और आगे ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में चिंता बढ़ी है। अमेरिकी यील्ड में तेज वृद्धि ने डॉलर को मजबूती दी है और इसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं और शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है।
डॉलर मजबूत हुआ, रुपये पर भी दबाव
शेयर बाजार की कमजोरी के साथ मुद्रा बाजार में भी रुपये पर दबाव रहा। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में रुपया 11 पैसे कमजोर होकर 95.84 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कारोबारियों के मुताबिक घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली, ऊंची कच्चे तेल की कीमतें और मजबूत अमेरिकी मुद्रा रुपये पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारण रहे।

डॉलर इंडेक्स भी मजबूती के साथ कारोबार कर रहा था। मजबूत डॉलर और महंगे तेल का संयोजन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे आयात की लागत बढ़ सकती है। रुपये की कमजोरी का असर कंपनियों की लागत और बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।
शेयर बाजार में छोटे शेयरों की तस्वीर अलग
बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कुछ अलग रुझान देखने को मिला। घरेलू निवेशकों की ओर से आने वाली पूंजी ने कई छोटे शेयरों को सहारा दिया है। बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता बनी हुई है। 24 सितंबर के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुद्ध रूप से 1,617.45 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि छोटे शेयर गिरावट से पूरी तरह सुरक्षित हैं। यदि कच्चे तेल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर व्यापक बाजार पर पड़ सकता है। ऊंचे वैल्युएशन वाले शेयरों में उतार-चढ़ाव भी बढ़ सकता है।
आगे शेयर बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर
अब बाजार की नजर मुख्य रूप से तीन बड़े संकेतकों पर रहेगी। पहला, कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं। दूसरा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें क्या रहती हैं। तीसरा, रुपये और विदेशी पूंजी का रुख कैसा रहता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार तेल की कीमतों में राहत और अमेरिकी यील्ड में स्थिरता आने पर भारतीय शेयरों पर दबाव कुछ कम हो सकता है। इसके विपरीत यदि तेल महंगा बना रहता है और अमेरिकी यील्ड लगातार ऊपर जाती है, तो निवेशकों में सतर्कता बनी रह सकती है।
शेयर बाजार की आज की गिरावट किसी एक घरेलू कारण का नतीजा नहीं दिखती। महंगा कच्चा तेल, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, मजबूत डॉलर और वित्तीय शेयरों में बिकवाली ने मिलकर बाजार का सेंटीमेंट कमजोर किया। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन वैश्विक संकेतकों की दिशा यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि बाजार में दबाव आगे कितना रहता है।
राज कुमार की रिपोर्ट
