शिक्षा मंत्री का नया प्लान, बिहार के सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों को देंगे टक्कर, जाने कैसे
शिक्षा मंत्री का नया प्लान, बिहार के सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों
निष्कर्ष भारत संवाददाता बिहार। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने बड़ी योजना तैयार की है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में कम से कम एक सरकारी स्कूल को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने की योजना है। इन स्कूलों में आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ डिजिटल क्लासरूम, स्मार्ट लैब, कंप्यूटर, इंटरनेट, रोबोटिक्स, कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ तकनीकी, खेल, कला, संस्कृति और व्यावसायिक कौशल के विकास के अवसर भी मिल सकें। बिहार सरकार पहले से ही डिजिटल और तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ाने के लिए कई पहल कर रही है। जुलाई 2026 में ‘बिहार स्कूल लाइव क्लासेज’ की शुरुआत करते हुए AI, STEM, कोडिंग, डिजाइन थिंकिंग और परियोजना आधारित शिक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करने की जानकारी सरकार ने दी थी।
पुराने और बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को मिलेगी प्राथमिकता
शिक्षा विभाग की प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत राज्य के चुनिंदा उच्च और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए पुराने, प्रतिष्ठित और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है।
इन स्कूलों को केवल भवन और कक्षाओं के स्तर पर अपग्रेड नहीं किया जाएगा, बल्कि पढ़ाई के तरीके में भी बदलाव पर जोर रहेगा। विद्यार्थियों को कॅरियर से जुड़े विभिन्न विकल्पों की जानकारी देने और उन्हें भविष्य की प्रतियोगिता के लिए तैयार करने की दिशा में विशेष व्यवस्था की जाएगी।
AI, कोडिंग और रोबोटिक्स की पढ़ाई
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूलों में विज्ञान और तकनीक आधारित शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा। विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कोडिंग, रोबोटिक्स और कंप्यूटेशनल स्किल्स से परिचित कराने की योजना है।
स्कूलों में आईसीटी लैब, कंप्यूटर लैब और इनोवेशन लैब विकसित करने का प्रावधान होगा। कुछ विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब और एस्ट्रोनॉमी किट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी योजना बताई गई है।
बिहार सरकार की मौजूदा डिजिटल शिक्षा पहल में भी AI, STEM शिक्षा, कोडिंग, डिजाइन थिंकिंग और AI आधारित मूल्यांकन जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
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स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लाइब्रेरी
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूलों में पारंपरिक कक्षाओं के साथ स्मार्ट क्लासरूम विकसित किए जाएंगे। इंटरएक्टिव पैनल, स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर और मल्टीमीडिया सामग्री के माध्यम से पढ़ाई को अधिक डिजिटल और व्यावहारिक बनाने की योजना है।
इसके अलावा स्कूलों में हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई कनेक्टिविटी और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा। बिहार सरकार पहले ही 38 जिलों के 700 मॉडल विद्यालयों में 24×7 शिक्षक सहायता वाले ‘बिहार विद्या साथी’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत कर चुकी है।
विज्ञान की आधुनिक लैब और बेहतर लाइब्रेरी
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किए जाने वाले स्कूलों में भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान की प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने की योजना है।
लाइब्रेरी में पुस्तकों के साथ डिजिटल संसाधन भी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। विद्यार्थियों के लिए शांत अध्ययन क्षेत्र और ऑडियो-विजुअल सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं, ताकि पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और रुचिकर बनाया जा सके।

पढ़ाई के साथ खेल और कला पर भी फोकस
नई योजना में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी जोर दिया गया है। स्कूलों में फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और टेनिस जैसे खेलों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
कुछ प्रमुख केंद्रों में इंडोर स्पोर्ट्स हॉल और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी बताया गया है। इसके साथ योग और फिटनेस सेंटर विकसित करने की भी योजना है।
कला और संस्कृति को भी पाठ्यक्रम से जुड़े विकास का हिस्सा बनाया जाएगा। विद्यार्थियों के बीच नियमित क्विज, खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित कराने पर जोर रहेगा।
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डिजिटल स्किल और लीडरशिप ट्रेनिंग
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखने की योजना है। विद्यार्थियों को डिजिटल स्किल, कम्युनिकेशन और लीडरशिप ट्रेनिंग देने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए अलग-अलग गतिविधियों को शामिल किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों को स्कूल स्तर से ही रोजगार और कॅरियर से जुड़ी आवश्यक क्षमताओं से परिचित कराने का प्रयास होगा।
लड़कियों के लिए विशेष सुविधाएं
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूलों में छात्राओं के लिए बेहतर शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की योजना है। स्वच्छ और हाइजेनिक कैंपस तैयार करने के साथ विद्यार्थियों के लिए बेहतर पोषण व्यवस्था विकसित करने की भी बात सामने आई है।
कुछ विद्यालयों में प्रयोग के तौर पर विशेष पोषण कार्यक्रम शुरू किए जाने की योजना भी बताई गई है।
सबसे बड़ी चुनौती होगी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित शिक्षक
योजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कई चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। पुराने स्कूल भवनों में पर्याप्त जगह नहीं होने पर नई लैब, स्मार्ट क्लास और खेल सुविधाओं का निर्माण चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसके अलावा AI, रोबोटिक्स, कोडिंग और आईसीटी जैसे क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी। मौजूदा शिक्षकों को नई तकनीक के अनुरूप लगातार प्रशिक्षण देना भी महत्वपूर्ण होगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार में शिक्षा विभाग 38 जिलों में बड़े स्तर पर स्कूल और शिक्षक नेटवर्क संचालित कर रहा है। SCERT बिहार के अनुसार राज्य में लगभग 4.87 लाख शिक्षक और करीब 2.4 करोड़ बच्चे प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हैं।
सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा
बिहार में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की योजना सरकारी स्कूलों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं से जोड़ने की बड़ी पहल के रूप में सामने आई है। योजना के तहत यदि प्रस्तावित डिजिटल, तकनीकी, खेल और शैक्षणिक सुविधाएं प्रभावी तरीके से लागू होती हैं, तो इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ नई तकनीक और विभिन्न कॅरियर विकल्पों से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।
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हालांकि, योजना का वास्तविक असर स्कूलों में बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित शिक्षकों, इंटरनेट कनेक्टिविटी, रखरखाव और नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। बिहार सरकार की मौजूदा पहलों में भी स्मार्ट क्लास, लाइव लर्निंग और तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूल में क्या-क्या मिलेगा?
स्मार्ट क्लासरूम और इंटरएक्टिव पैनल
आधुनिक कंप्यूटर और आईसीटी लैब
हाई-स्पीड इंटरनेट और डिजिटल लाइब्रेरी
AI, कोडिंग और रोबोटिक्स से जुड़ी शिक्षा
इनोवेशन और एस्ट्रोनॉमी गतिविधियां
आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं
बेहतर पुस्तकालय और अध्ययन कक्ष
खेल मैदान और इंडोर स्पोर्ट्स सुविधाएं
योग और फिटनेस सेंटर
छात्राओं के लिए बेहतर शौचालय और सुरक्षा व्यवस्था
क्विज, खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं
डिजिटल स्किल, कम्युनिकेशन और लीडरशिप ट्रेनिंग
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट
