उज्जैन में मस्जिद विवाद के पीछे AI का खेल! फर्जी वीडियो से फैली अफवाह, पुलिस ने दर्ज की FIR

मस्जिद

उज्जैन में मस्जिद विवाद के पीछे AI का खेल

निष्कर्ष भारत संवाददाता- उज्जैन: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन की शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने को लेकर हुए विवाद में सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक संदेशों और AI से तैयार किए गए वीडियो की भूमिका सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो में यह गलत दावा किया गया कि प्रशासन पूरी शाही मस्जिद को गिराने जा रहा है। इन संदेशों के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुटे और सोमवार को स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भीड़ की ओर से पुलिस पर पथराव किए जाने के बाद पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।

पुलिस अब उन सोशल मीडिया अकाउंट्स और लोगों की पहचान कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर भ्रामक या भड़काऊ सामग्री प्रसारित की। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

AI वीडियो ने बढ़ाया विवाद

पुलिस जांच के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो प्रसारित किए गए जिनमें AI की मदद से शाही मस्जिद को पूरी तरह गिराते हुए दिखाया गया था। इन वीडियो के जरिए लोगों के बीच यह धारणा बनने लगी कि प्रशासन पूरी मस्जिद को तोड़ने की कार्रवाई कर रहा है।

जबकि प्रशासन के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया चल रही थी। पूरी मस्जिद को गिराने की बात को पुलिस ने भ्रामक बताया है।

पुलिस का कहना है कि इसी तरह की अफवाहों ने लोगों को मौके पर जुटने के लिए प्रभावित किया और इसके बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।

सोशल मीडिया पोस्ट में लोगों को जुटने की अपील

पुलिस के अनुसार, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में लोगों से उज्जैन के छत्री चौक और शाही मस्जिद के आसपास पहुंचने की अपील की गई थी। जांच एजेंसियां ऐसे पोस्ट और वीडियो के स्रोत की पड़ताल कर रही हैं।

निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: CM Samrat Chaudhary का दावा— RJD ड्राफ्ट लिस्ट में कटे एक भी जायज वोटर का नाम नहीं गिना पाई

पुलिस के मुताबिक, कुछ पोस्ट में मस्जिद की कार्रवाई की तुलना बाबरी मस्जिद विध्वंस से भी की गई। इसके अलावा कुछ संदेशों में प्रशासन पर पूरी मस्जिद गिराने का आरोप लगाते हुए लोगों से मौके पर पहुंचने की अपील की गई।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन पोस्ट और वीडियो को सबसे पहले किसने तैयार या अपलोड किया और इसके बाद इन्हें किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया गया।

किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?

भ्रामक और कथित तौर पर भड़काऊ सोशल मीडिया सामग्री के मामले में पुलिस ने BNS की धारा 196(1), 299, 353(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस ने कुछ ऐसे लोगों की पहचान करने का दावा किया है, जिनके सोशल मीडिया पोस्ट को जांच के दायरे में लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल सामग्री की जांच के साथ यह भी देखा जा रहा है कि किस पोस्ट या वीडियो के बाद लोगों की भीड़ मौके पर पहुंची।

खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े

सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की भूमिका की जांच इस पूरे मामले का एक अहम हिस्सा बन गई है।

रातभर चली बातचीत, सुबह बनी सहमति

शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने को लेकर प्रशासन और मस्जिद समिति के प्रतिनिधियों के बीच रातभर बातचीत चली। रविवार रात बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा रहे।

प्रशासन के अनुसार, सुबह करीब चार से पांच बजे के बीच प्रभावित हिस्से को हटाने को लेकर सहमति बनी। इसके बाद सोमवार को मस्जिद समिति के सदस्यों ने खुद सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को हटाने का काम शुरू किया।

इसी दौरान दोबारा बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और स्थिति बिगड़ गई।

पथराव के बाद पुलिस ने किया लाठीचार्ज

मौके पर भीड़ बढ़ने के बाद पुलिस और लोगों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस के मुताबिक, कुछ लोगों ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया।

इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इलाके में पहले से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

ये भी पढ़े: उज्जैन में शाही मस्जिद पर हथौड़ा चलते ही बवाल, पथराव, भारी पुलिस बल तैनात

घटना के बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की भी जांच शुरू कर दी।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का हिस्सा है सड़क चौड़ीकरण

शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई उज्जैन में चल रहे सड़क चौड़ीकरण और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सिंहस्थ 2028 के दौरान शहर में आने वाले श्रद्धालुओं और वाहनों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर यातायात व्यवस्था को बेहतर करना है।

रिपोर्टों के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत कई अन्य संरचनाओं को भी प्रभावित क्षेत्र में चिन्हित किया गया है।

प्रशासन का कहना है कि शाही मस्जिद के मामले में प्रभावित हिस्से को हटाने पर मस्जिद समिति के साथ सहमति बनी थी।

इलाके में पुलिस बल तैनात

उज्जैन के कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल शाही मस्जिद परिसर और आसपास के क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण है। एहतियात के तौर पर पुलिस बल की तैनाती जारी है।

प्रशासन के अनुसार, प्रभावित हिस्से को हटाने का काम सुरक्षा व्यवस्था के बीच आगे बढ़ाया जाएगा। मस्जिद समिति के सदस्य ही प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया में शामिल हैं।

पुलिस सोशल मीडिया पर अफवाह और भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है।

AI और सोशल मीडिया की भूमिका पर जांच

उज्जैन की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि AI की मदद से तैयार किए गए फर्जी वीडियो किस तरह वास्तविक घटनाओं को लेकर भ्रम पैदा कर सकते हैं। इस मामले में पुलिस का कहना है कि AI से बनाए गए ऐसे वीडियो ने लोगों के बीच पूरी मस्जिद गिराए जाने की गलत धारणा पैदा की।

अब जांच का फोकस केवल मौके पर हुई हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्जी वीडियो बनाने, उसे पोस्ट करने और आगे प्रसारित करने वाली डिजिटल कड़ी पर भी है। पुलिस संबंधित अकाउंट्स और पोस्ट की जांच कर रही है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से शांति बनाए रखने की अपील की गई है और पुलिस ने साफ किया है कि भ्रामक या भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट