शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की चुनौती, बोले- FIR में मेरा नाम भी जोड़ना

अभिजीत दीपके

अभिजीत दीपके मदन दिलावर विवाद

निष्कर्ष भारत संवाददाता- राजस्थान में सरकारी स्कूलों की कथित बदहाली को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को चुनौती दी है कि यदि सरकार उनके या उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहती है, तो उनका नाम भी उसमें शामिल किया जाए। अभिजीत दीपके ने यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए दी।

दरअसल, आशुतोष रांका ने आरोप लगाया था कि उदयपुर के देमत गांव में स्कूलों का दौरा कर वहां की जर्जर स्थिति सामने लाने के बाद संबंधित शिक्षकों और ग्रामीणों पर दबाव बनाया जा रहा है। रांका ने अपने पोस्ट में राजस्थान सरकार और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को लेकर सवाल उठाए और एफआईआर की स्थिति में खुद और अपनी टीम का नाम शामिल करने की चुनौती दी।

आशुतोष रांका का आरोप- शिक्षकों और ग्रामीणों पर बनाया जा रहा दबाव

CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि उदयपुर के देमत गांव में जिन स्कूलों का उन्होंने हाल ही में दौरा किया था, वहां के शिक्षकों को कथित तौर पर डराया-धमकाया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूलों की बदहाली सामने लाने के लिए उन्हें बुलाने वाले ग्रामीणों पर एफआईआर दर्ज कराने का दबाव बनाया जा रहा है।

रांका ने अपने पोस्ट में लिखा कि यदि सरकार एफआईआर दर्ज कराने में रुचि रखती है, तो सबसे पहले उनका नाम और उसके बाद उनकी टीम के सदस्यों के नाम शामिल किए जाएं। उन्होंने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को संबोधित करते हुए कहा कि स्कूलों की स्थिति सुधारने के बजाय यदि सरकार एफआईआर की कार्रवाई करना चाहती है, तो वह उन्हें गिरफ्तार करा सकती है।

हालांकि, शिक्षकों को धमकाने और ग्रामीणों पर दबाव बनाने से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में संबंधित प्रशासन और शिक्षा विभाग का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

‘मेरा नाम भी जोड़ना’, अभिजीत दीपके ने किया पोस्ट रिपोस्ट

आशुतोष रांका की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने लिखा कि उनका नाम भी एफआईआर में जोड़ा जाए। इस प्रतिक्रिया के जरिए उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर चल रही मुहिम में अपना समर्थन जताया।

रांका ने अपने पोस्ट में अपनी टीम के पांच अन्य साथियों का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो उनकी टीम के सदस्यों को भी एफआईआर में शामिल किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने गिरफ्तारी की स्थिति में पूरे प्रदेश में जेल भरो आंदोलन शुरू करने की बात कही।

रांका ने यह भी कहा कि स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग जारी रहेगी। उनके बयान का मुख्य केंद्र राजस्थान के सरकारी स्कूलों की इमारतों, सुविधाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक वातावरण को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं।

चार दिनों में 25 स्कूलों के दौरे का दावा

आशुतोष रांका ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि उन्होंने पिछले चार दिनों के दौरान उदयपुर जिले के 25 स्कूलों का दौरा किया है। उनके अनुसार, इन स्कूलों में ऐसी कमियां देखने को मिलीं, जिनके कारण अभिभावक अपने बच्चों को वहां पढ़ाना पसंद नहीं करेंगे।

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रांका ने स्कूलों की जर्जर इमारतों और कथित अव्यवस्थाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे खराब परिस्थितियों में पढ़ने को मजबूर हैं।

उनके इन दावों के बाद सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं, भवनों की स्थिति और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, सभी 25 स्कूलों की स्थिति और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच या विस्तृत रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

‘फिक्स ट्राइबल स्कूल्स’ अभियान की घोषणा

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 16 सितंबर को आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों की कथित जर्जर स्थिति और सरकारी उपेक्षा के खिलाफ एक राष्ट्रीय अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। इस अभियान का नाम ‘फिक्स ट्राइबल स्कूल्स’ रखा गया है, जिसका उद्देश्य आदिवासी इलाकों के स्कूलों की समस्याओं को सामने लाना और उनमें सुधार की मांग करना बताया गया है।

अभियान के तहत स्कूल भवनों की स्थिति, विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाने की कोशिश की जा रही है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए।

शिक्षा विभाग की जवाबदेही पर उठे सवाल

राजस्थान के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सामने आए आरोपों ने शिक्षा विभाग की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए हैं। स्कूल भवनों की मरम्मत, सुरक्षित कक्षाओं, पेयजल, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

यदि किसी स्कूल की इमारत जर्जर है या वहां विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ी समस्या है, तो प्रशासन को उसका निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, स्कूलों की कमियों को उजागर करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

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वहीं, सरकार और शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि देमत गांव के स्कूलों से जुड़े आरोपों पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं और एफआईआर या दबाव बनाए जाने के दावों में कितनी सच्चाई है।

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की कथित बदहाली को लेकर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं की ओर से सोशल मीडिया पर एफआईआर की चुनौती दिए जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

अब इस विवाद में प्रशासन और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, स्कूलों की वास्तविक स्थिति, शिक्षकों पर कथित दबाव और ग्रामीणों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच से ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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