BPSC AEDO परीक्षा घोटाला: ‘मास्टर’ की तलाश में EOU, बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध से उजागर हुआ बड़ा नेटवर्क

AEDO

बिहार में पहली बार आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा अब एक बड़े घोटाले की वजह से सुर्खियों में है।

बिहार में पहली बार आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा अब एक बड़े घोटाले की वजह से सुर्खियों में है। Bihar Public Service Commission द्वारा आयोजित इस परीक्षा में धांधली के ऐसे संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड ‘मास्टर’ नाम का एक रहस्यमयी शख्स बताया जा रहा है, जिसकी पहचान अब तक जांच एजेंसियों के लिए पहेली बनी हुई है।

कैसे खुला पूरा मामला?

13 अप्रैल की रात मुंगेर के जिलाधिकारी को मिली एक गुप्त सूचना ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। सूचना थी कि 14 अप्रैल को होने वाली परीक्षा में बड़े स्तर पर नकल की तैयारी चल रही है। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रात करीब 12:30 बजे छापेमारी कर सुजल कुमार नाम के युवक को गिरफ्तार किया।

सुजल के पास से लैपटॉप, आईपैड, 20 अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए। जांच में सामने आया कि यह सिर्फ एक छोटा मोहरा था, असली खेल ‘मास्टर’ के इशारों पर चल रहा था।

बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध

इस घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें बायोमेट्रिक सिस्टम को ही हथियार बनाया गया। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान के लिए लगाए गए फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन सिस्टम में हेरफेर की गई।

जिस कंपनी को यह जिम्मेदारी दी गई थी—साईं एडूकेयर प्राइवेट लिमिटेड—उसके स्टाफ के साथ कथित रूप से सेटिंग की गई। असली कर्मचारियों की जगह ‘मास्टर’ के लोगों को बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर बनाकर परीक्षा केंद्रों में बैठाने की योजना थी।

WhatsApp ग्रुप से चलता था खेल

जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया जा रहा था। ‘एम मुंगेर’ और ‘मुंगेर सॉल्यूशन’ नाम से दो ग्रुप बनाए गए थे।

  • पहले ग्रुप में अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड शेयर किए जाते थे
  • दूसरे ग्रुप में परीक्षा के सवालों के जवाब भेजे जाते थे

प्लान यह था कि परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक ऑपरेटर प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर ‘मास्टर’ को भेजेंगे। इसके बाद ‘मास्टर’ जवाब तैयार कर वापस भेजेगा, जिन्हें अभ्यर्थियों तक पहुंचाया जाएगा।

गिरफ्तारी और जांच की स्थिति

अब तक इस मामले में 36 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सबसे ज्यादा 22 गिरफ्तारी मुंगेर से हुई है। बिहार के 6 जिलों में कुल 8 FIR दर्ज की गई हैं।

मामले की जांच Economic Offences Unit (EOU) कर रही है, जिसने इस पूरे नेटवर्क को जोड़ने के लिए डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं।

‘मास्टर’ कौन है?

सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर ‘मास्टर’ कौन है?

अब तक पुलिस के पास सिर्फ एक मोबाइल नंबर है, जिससे व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि ‘मास्टर’ अकेला नहीं है, बल्कि उसका एक क्राइम पार्टनर भी है। मुंगेर की एक कोचिंग संस्था ‘राठौड़ क्लासेज’ के मालिक का नाम भी जांच में सामने आया है, जो फिलहाल फरार है।

परिवार तक फैला नेटवर्क

चौंकाने वाली बात यह भी है कि ‘मास्टर’ की बहन भी इस परीक्षा में शामिल थी। सासाराम के एक परीक्षा केंद्र पर उसके लिए भी पूरी सेटिंग की गई थी। उसके प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर जवाब उपलब्ध कराने की योजना थी।

विवादित कंपनी को मिला ठेका

इस मामले ने National Testing Agency (NTA) पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, जिस कंपनी को BPSC ने बायोमेट्रिक का ठेका दिया था, उसे NTA पहले ही एक साल के लिए डिबार कर चुकी थी।

इसके बावजूद इस कंपनी को जिम्मेदारी कैसे दी गई, यह अब जांच का विषय है। BPSC ने कंपनी को शो-कॉज नोटिस जारी किया है और आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

पेपर लीक हुआ या नहीं?

अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि प्रश्नपत्र लीक हुआ था या नहीं। हालांकि, EOU ने माना है कि परीक्षा सिस्टम में सेंध लगाई गई थी और नकल कराने की पूरी कोशिश हुई।

बरामद आंसर-की को BPSC को भेजा गया है, ताकि यह जांचा जा सके कि वह असली है या नहीं।

अभ्यर्थियों की भूमिका

नालंदा से गिरफ्तार एक अभ्यर्थी श्वेता कुमारी के पास से आंसर-की मिली है। उसने कबूल किया कि उसे बायोमेट्रिक कर्मचारियों ने ही उत्तर उपलब्ध कराए थे।

इसके अलावा ब्लूटूथ डिवाइस और मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच भी जारी है।

परीक्षा का पैमाना

AEDO परीक्षा बिहार में पहली बार आयोजित की गई थी, जिसमें:

  • 935 पदों के लिए
  • करीब 11 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया
  • 38 जिलों में 746 केंद्र बनाए गए
  • 3 चरणों में परीक्षा आयोजित हुई

इतने बड़े पैमाने पर हुई परीक्षा में इस तरह की धांधली ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे क्या?

EOU जल्द ही गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। उम्मीद है कि इससे ‘मास्टर’ और उसके नेटवर्क के बारे में अहम सुराग मिल सकते हैं।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

  • क्या इससे पहले भी ऐसी धांधली हुई है?
  • क्या इसमें अंदरूनी लोग शामिल हैं?
  • और क्या यह एक संगठित परीक्षा माफिया का हिस्सा है?

BPSC AEDO परीक्षा घोटाला सिर्फ एक नकल का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध का उदाहरण बन चुका है, जिसमें टेक्नोलॉजी, अंदरूनी सेटिंग और पैसों का बड़ा खेल शामिल है। ‘मास्टर’ की गिरफ्तारी इस पूरे मामले की कुंजी मानी जा रही है। जब तक वह पकड़ में नहीं आता, इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आना मुश्किल है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

You may have missed