AI Summit में ‘हरे गमछे’ वाले बयान पर सियासी बवाल, सम्राट चौधरी पर विपक्ष का हमला तेज

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पटना में आयोजित AI Summit के मंच से बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा दिए गए “हरे गमछे” वाले बयान ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद विपक्ष लगातार हमलावर है।

पटना में आयोजित AI Summit के मंच से बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा दिए गए “हरे गमछे” वाले बयान ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद विपक्ष लगातार हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, राजद नेता रोहिणी आचार्य और सांसद पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक और सामाजिक रूप से गलत बताया है।

दरअसल, एआई समिट के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमता को समझाते हुए कहा था कि पटना में करीब 4 हजार एआई कैमरे लगाए गए हैं और यदि सिस्टम को निर्देश दिया जाए कि “हरे गमछे वाले को खोजो”, तो वह तुरंत ऐसे लोगों की पहचान कर लेगा। हालांकि, बयान के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इशारा किसी विशेष व्यक्ति, संगठन या समुदाय की ओर नहीं था।

लेकिन मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्षी दलों का आरोप है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी भाषा और प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिससे किसी वर्ग या राजनीतिक समूह को निशाना बनाने का संदेश जाए।

तेजस्वी यादव ने कहा- बयान से झलकती है मानसिकता

मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि यह टिप्पणी मुख्यमंत्री की सोच और मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि बिहार में बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था और महिलाओं से जुड़े मुद्दे गंभीर बने हुए हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में लगी हुई है।

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तेजस्वी यादव ने कहा कि “सरकार का खजाना खाली है, महिलाओं को दूसरी किश्त कब मिलेगी, बिजली दरें लगातार बढ़ रही हैं और जनता परेशान है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री का यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।

रोहिणी आचार्य का पलटवार, सोशल मीडिया पर पूछे 11 सवाल

लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “AI से पूछ कर देखिए… AI ये सब भी बता देता है।”

इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से जुड़े 11 सवाल सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। इन सवालों में फर्जी डिग्री, अलग-अलग हलफनामों, राजनीतिक दल बदलने, पुराने मामलों और पारिवारिक बयानों को लेकर सवाल उठाए गए।

रोहिणी आचार्य ने एक कार्टून भी शेयर किया और आरोप लगाया कि कानून-व्यवस्था के नाम पर राजनीतिक विरोधियों को डराने और एक खास वर्ग को टारगेट करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि बिहार हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाने वाली धरती रही है। एआई जैसे गंभीर और तकनीकी मंच से राजनीतिक कटाक्ष करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

रोहिणी ने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री एआई की बात कर रहे थे, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए था कि “भगवा गमछा वालों के सारे गुनाह माफ हैं।”

पप्पू यादव बोले- रंगों को राजनीति से जोड़ना गलत

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी और उनके पिता भी कभी लालू यादव के साथ राजनीति कर चुके हैं।

पप्पू यादव ने कहा कि किसी रंग को राजनीति या विवाद से जोड़ना ठीक नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केसरिया रंग त्याग और संस्कृति का प्रतीक है, लाल रंग क्रांति का प्रतीक है और हरा रंग हरियाली और जीवन का प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने कहा, “क्या अब पूरे देश में हरे कपड़े बंद कर दिए जाएंगे? क्या फैक्ट्रियों को कह दिया जाएगा कि हरा कपड़ा बनाना बंद कर दें?”

पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि बिहार में बेरोजगारी, अपराध, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कई अहम मुद्दे हैं, जिन पर सरकार को काम करना चाहिए।

राजनीतिक बयान से गरमाई बिहार की सियासत

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बयान ऐसे समय में आया है, जब बिहार में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। एआई समिट जैसे तकनीकी कार्यक्रम में दिए गए इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है।

विपक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण से जोड़कर देख रहा है, जबकि भाजपा और एनडीए के कुछ नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने केवल तकनीक की क्षमता समझाने के लिए उदाहरण दिया था और विपक्ष अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार की राजनीति में प्रतीकों और रंगों का हमेशा बड़ा महत्व रहा है। ऐसे में किसी रंग विशेष का जिक्र राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है।

एआई और निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

इस पूरे विवाद के बीच एक और बहस सामने आई है, जो एआई आधारित निगरानी प्रणाली और उसकी सीमाओं से जुड़ी है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को एआई तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और अपराध नियंत्रण के लिए करना चाहिए, न कि राजनीतिक उदाहरण देने के लिए।

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक सफाई नहीं आई है। मुख्यमंत्री ने केवल इतना कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उनका उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं था।

फिलहाल “हरे गमछे” वाला बयान बिहार की राजनीति में नया विवाद बन चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है, खासकर तब जब विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर बना हुआ है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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