AKU में कर्मचारियों का प्रदर्शन, सचिव के इस्तीफे की मांग, कुलसचिव ने लगाए धमकाने के आरोप
AKU में विशेष सचिव के इस्तीफे की मांग पर कर्मचारियों का प्रदर्शन
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। AKU कर्मचारी प्रदर्शन के बीच आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में जांच समिति के गठन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को AKU परिसर में कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने बिहार के उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक विशेष सचिव कथित अमर्यादित व्यवहार के लिए माफी नहीं मांगते, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
कर्मचारियों ने जांच समिति की कार्यप्रणाली और उसके गठन को लेकर भी सवाल उठाए। धरनार्थियों की मांग है कि अधिकारियों के साथ कथित अमर्यादित व्यवहार और धमकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच के बाद आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
AKU में जांच समिति को लेकर बढ़ा विवाद
AKU प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग के बीच जांच समिति को लेकर विवाद पिछले कुछ समय से चल रहा है। AKU प्रशासन ने समिति के गठन की प्रक्रिया, उसके अधिकार क्षेत्र और जांच पूरी करने के लिए तय समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल सचिवालय को पत्र भेजा है।

वहीं, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. नीरंजन प्रसाद यादव ने जांच समिति के समन्वयक और उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा पर कथित अमर्यादित व्यवहार, आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
कुलसचिव की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जांच के दौरान विशेष सचिव का व्यवहार AKU के अधिकारियों के प्रति प्रशासनिक और संस्थागत मर्यादा के अनुरूप नहीं था। पत्र में कुलसचिव को कथित तौर पर “हाथ तुड़वाने की धमकी” जैसी भाषा इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
विश्वविद्यालय ने की कार्रवाई की मांग
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। कुलपति की ओर से इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी शिकायत भेजी गई है।
शिकायत में जांच समिति के गठन की प्रक्रिया, उसके कथित अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने, जांच के दौरान अधिकारियों के साथ कथित अमर्यादित व्यवहार और धमकीपूर्ण भाषा के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है।
कुलपति ने राज्य सरकार से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायत में आरोप सही पाए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारी के निलंबन सहित कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की गई है।
AKU प्रशासन ने समिति के अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल
AKU प्रशासन ने जांच समिति के गठन की वैधता और अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया है। कुलसचिव का कहना है कि कुलाधिपति या राज्यपाल की अनुमति के बिना विश्वविद्यालय के खिलाफ जांच समिति गठित करना अधिकार क्षेत्र से जुड़ा विषय है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय ने समिति के गठन को चुनौती दी है।
विश्वविद्यालय की ओर से भेजे गए पत्र के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव स्तर से 27 जुलाई 2026 को जांच समिति गठित करने का आदेश जारी किया गया था। उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा को समिति का समन्वयक बनाया गया था।
समिति में गृह विभाग, अभियोजन निदेशालय और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, समिति को जांच पूरी करने के लिए 15 दिनों की समय-सीमा दी गई थी।
15 दिन की समय-सीमा को लेकर भी आपत्ति
AKU प्रशासन का कहना है कि निर्धारित 15 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद जांच की अवधि बढ़ाने से संबंधित कोई विधिवत आदेश या पत्र उसे प्राप्त नहीं हुआ। इसके बावजूद समिति की ओर से जांच आगे बढ़ाए जाने पर प्रशासन ने आपत्ति जताई है।
विश्वविद्यालय का तर्क है कि किसी जांच की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद उसे आगे बढ़ाने के लिए विधिवत आदेश की आवश्यकता होती है। इसी बिंदु को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और जांच समिति के बीच मतभेद सामने आए हैं।
दूसरी ओर, कर्मचारियों का प्रदर्शन अब इसी विवाद के बीच तेज हो गया है। प्रदर्शनकारी विशेष सचिव से माफी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हैं।
समिति ने मांगे 1,344 पृष्ठों के दस्तावेज
कुलसचिव के पत्र के अनुसार, 12 सितंबर को सुबह करीब 11 बजे जांच समिति के सदस्य विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे थे। समिति ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जांच से संबंधित बड़ी संख्या में फाइलें और दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा।
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विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि समिति को करीब 1,344 पृष्ठों के दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। प्रशासन के अनुसार, दस्तावेज सौंपे जाने के बाद भी समिति की ओर से अतिरिक्त फाइलों और अभिलेखों की मांग की जाती रही।

इसी को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि समिति को पहले ही बड़ी संख्या में दस्तावेज उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
कर्मचारियों ने दी अनशन जारी रखने की चेतावनी
विवाद के बीच विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि कथित धमकी और अमर्यादित व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
कर्मचारियों ने विशेष सचिव से माफी की मांग करते हुए कहा कि माफी नहीं मिलने तक वे अनशन पर बैठे रहेंगे। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी राज्य सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने और अधिकारियों व कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
फिलहाल AKU में जांच समिति के गठन, उसके अधिकार क्षेत्र, जांच की समय-सीमा और अधिकारियों के साथ कथित व्यवहार को लेकर विवाद बना हुआ है। अब राज्य सरकार की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजर है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
