अनंत सिंह का बड़ा खुलासा…..हमने सरकार बचाई, चाहे तो अशोक चौधरी से पूछ लीजिए
अनंत सिंह का ऐलान, जेडीयू से निष्कासन के बाद बनाएंगे अपनी पार्टी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से निष्कासित होने के बाद मोकामा के विधायक अनंत सिंह के तेवर और तल्ख हो गए हैं। पार्टी की कार्रवाई के बाद उन्होंने नीतीश कुमार और मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए 2024 के विश्वास मत का जिक्र किया और दावा किया कि संकट के समय उन्होंने सरकार का साथ दिया था। अनंत सिंह ने कहा कि पार्टी के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया, यहां तक कि उनके शब्दों में, ‘गद्दारी’ तक की, लेकिन अब जेडीयू में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं बचा है जो उनके साथ न्याय कर सके।
अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने साफ संकेत दिया कि वह जेडीयू की कार्रवाई के सामने झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने अपनी पार्टी बनाने का ऐलान करते हुए कहा कि जनता उनके साथ है और निष्कासन से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। इस दौरान जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह और मगही गायक गुंजन सिंह भी मौजूद थे।
अनंत सिंह ने नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी को दिलाया 2024 की याद
अनंत सिंह ने अपनी बात रखते हुए 2024 में बिहार विधानसभा में हुए विश्वास मत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार को बहुमत साबित करना था, तब उन्होंने सरकार को बचाने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि दोनों उनसे जुड़े उस घटनाक्रम की सच्चाई की पुष्टि कर सकते हैं।
अनंत सिंह ने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि दोनों नेताओं से कसम खिलाकर पूछ लिया जाए कि उस समय सरकार के पक्ष में किसने साथ दिया था। उनका कहना था कि पार्टी के लिए किए गए कामों को आज भुला दिया गया है और उनके योगदान का उचित सम्मान नहीं हो रहा।
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हालांकि, 12 फरवरी 2024 के विश्वास मत से जुड़ी प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, नीतीश कुमार की सरकार के पक्ष में 129 विधायकों ने मतदान किया था और विपक्ष ने मतदान से पहले सदन से वॉकआउट किया था। उस समय राष्ट्रीय जनता दल की तीन विधायकों—प्रह्लाद यादव, नीलम देवी और चेतन आनंद—के एनडीए के पक्ष में जाने की भी खबर आई थी।
अनंत सिंह ने कहा, पार्टी के लिए की ‘गद्दारी’
पत्रकारों से बातचीत में अनंत सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने जेडीयू के लिए ‘गद्दारी’ तक की। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किसके साथ और किस संदर्भ में गद्दारी करने की बात कह रहे थे। उनके बयान के बाद इस शब्द के राजनीतिक अर्थ को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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इस संदर्भ में उनकी पत्नी नीलम देवी का नाम भी चर्चा में आता है। फरवरी 2024 के विश्वास मत के दौरान नीलम देवी राष्ट्रीय जनता दल की विधायक थीं और उन तीन विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का समर्थन किया था।
अनंत सिंह की नाराजगी का मुख्य केंद्र जेडीयू नेतृत्व और अपने खिलाफ हुई कार्रवाई है। उनका कहना है कि उन्होंने पार्टी के लिए लगातार काम किया, लेकिन अब उनकी बात सुनने और न्याय करने वाला कोई नहीं बचा है।
अनंत सिंह बोले, जेडीयू में अब न्याय करने वाला कोई नहीं
मोकामा विधायक ने पार्टी से निष्कासन को गलत बताते हुए कहा कि उन्होंने जेडीयू के खिलाफ कभी कोई गतिविधि नहीं की। उनके मुताबिक, वह हमेशा पार्टी के हित में काम करते रहे हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, जिसे वह अनुचित मानते हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी में अब ऐसा कोई व्यक्ति नहीं बचा है, जो उनके मामले में न्याय कर सके। उनके बयान से स्पष्ट है कि फिलहाल जेडीयू नेतृत्व के साथ उनका टकराव कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है।
अनंत सिंह ने अगले विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि अभी चुनाव में करीब 25 महीने का समय है। उनके इस बयान को आने वाले समय में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपनी प्रस्तावित पार्टी के नाम, संगठनात्मक ढांचे या संभावित सहयोगियों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
अनंत सिंह ने नीरज कुमार के सवाल पर धकेला माइक
बातचीत के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब पत्रकारों ने अनंत सिंह से जेडीयू के विधान परिषद प्रत्याशी नीरज कुमार को लेकर सवाल पूछा। सवाल सुनते ही विधायक नाराज हो गए और उन्होंने हाथ से माइक पीछे धकेल दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाने की बात दोहराई और कहा कि उनके साथ जनता है।

नीरज कुमार को लेकर अनंत सिंह की नाराजगी का संबंध पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव से है। जेडीयू ने अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था, जबकि अनंत सिंह ने जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया।
अनंत सिंह का रुख बताता है कि विवाद सिर्फ पार्टी से निष्कासन तक सीमित नहीं है। नीरज कुमार के समर्थन को लेकर शुरू हुआ टकराव अब जेडीयू नेतृत्व और अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ गया है।
जेडीयू ने छह साल के लिए किया निष्कासित
जेडीयू ने 24 अक्टूबर 2026 को अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने और उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया। पार्टी ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों, नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी और विधान परिषद चुनाव में पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के बजाय दूसरे दल के उम्मीदवार का समर्थन करने जैसे आरोप लगाए। उनकी पत्नी नीलम देवी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
पार्टी की ओर से विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की विधायकी पर भी कार्रवाई करने की सिफारिश किए जाने की खबर है। यह मामला दल-बदल से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के तहत उठाया गया है। हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता समाप्त होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। सदस्यता पर अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगी।
अपनी पार्टी बनाने के ऐलान से बढ़ी सियासी हलचल
अनंत सिंह ने साफ कहा है कि वह अपनी पार्टी बनाएंगे और उन्हें जेडीयू से बाहर किए जाने का अफसोस नहीं है। उनके इस ऐलान से बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, किसी नई पार्टी की घोषणा को वास्तविक राजनीतिक ताकत में बदलने के लिए संगठन, कार्यकर्ताओं, उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति की जरूरत होगी।
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फिलहाल अनंत सिंह ने अपने अगले कदमों की विस्तृत रूपरेखा सामने नहीं रखी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह आगामी चुनावों में अकेले उतरेंगे या किसी दल के साथ गठबंधन करेंगे। उनकी मौजूदगी और मोकामा क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव के मद्देनजर उनके फैसलों पर नजर रहेगी।
जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने समझौते के बजाय टकराव का रास्ता चुना है। 2024 के विश्वास मत का हवाला देकर उन्होंने अपने पुराने योगदान की याद दिलाई, जबकि नीरज कुमार को लेकर सवाल पर उनकी नाराजगी ने विवाद की तल्खी भी उजागर कर दी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अपनी पार्टी बनाने का उनका ऐलान आगे चलकर कितना ठोस रूप लेता है और इसका बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
