नॉर्मल BP और कोलेस्ट्रॉल के बाद भी हार्ट अटैक का खतरा, जानें इस ब्लड टेस्ट की अहमियत
फिट और पतले लोगों में भी बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता- हार्ट अटैक को अक्सर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और मोटापे से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन कुछ लोगों में इन जोखिम कारकों के सामान्य होने के बावजूद हृदय रोग का खतरा बना रह सकता है। इसकी एक वजह लिपोप्रोटीन(a), यानी Lp(a) का बढ़ा हुआ स्तर भी हो सकता है। यह खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का लिपोप्रोटीन है, जिसका स्तर मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों से तय होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी जांच से हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की 2026 की गाइडलाइन में वयस्कों के लिए जीवन में कम से कम एक बार Lp(a) की जांच कराने की सिफारिश की गई है। हालांकि, इस जांच का परिणाम डॉक्टर की सलाह के साथ ही समझना चाहिए।
क्या है लिपोप्रोटीन(a), जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
लिपोप्रोटीन(a) एक ऐसा कण है, जिसकी संरचना LDL यानी लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन से मिलती-जुलती है। LDL को आमतौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। Lp(a) में एक अतिरिक्त प्रोटीन, एपोलिपोप्रोटीन(a), जुड़ा होता है। इसका स्तर बढ़ने पर धमनियों में प्लाक बनने, सूजन और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।
लिपोप्रोटीन(a) का बढ़ा हुआ स्तर हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम से जुड़ा है। इसकी खास बात यह है कि किसी व्यक्ति का सामान्य LDL कोलेस्ट्रॉल होने पर भी Lp(a) बढ़ा हुआ हो सकता है। ऐसे में केवल सामान्य लिपिड प्रोफाइल के आधार पर हृदय रोग के पूरे जोखिम का अंदाजा लगाना हमेशा पर्याप्त नहीं होता।
पतले और फिट लोगों में भी बढ़ा हो सकता है Lp(a)
Lp(a) के स्तर पर आनुवंशिक कारणों का बड़ा प्रभाव होता है। इसका मतलब है कि अगर परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या अन्य करीबी रिश्तेदारों में इसका स्तर अधिक है, तो परिवार के दूसरे सदस्यों में भी इसके बढ़े होने की आशंका हो सकती है।
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यही वजह है कि केवल शरीर का वजन, फिटनेस या खानपान देखकर Lp(a) के स्तर का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। कोई व्यक्ति नियमित व्यायाम करता हो, उसका वजन सामान्य हो और वह संतुलित आहार लेता हो, तब भी उसका Lp(a) बढ़ा हुआ हो सकता है।
अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या अन्य हृदय रोगों का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर से Lp(a) जांच के बारे में बात करना उपयोगी हो सकता है।
सामान्य लिपिड प्रोफाइल से क्यों नहीं चलता पता?
रूटीन लिपिड प्रोफाइल में आमतौर पर कुल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स जैसे मानों की जांच होती है। Lp(a) का स्तर जानने के लिए अलग से इसकी जांच करानी पड़ती है।
यानी लिपिड प्रोफाइल सामान्य होने का मतलब यह नहीं कि हृदय रोग का जोखिम पूरी तरह खत्म हो गया है। डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान की आदत, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों को ध्यान में रखकर अतिरिक्त जांच की सलाह दे सकते हैं।
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Lp(a) की जांच के लिए आमतौर पर विशेष तैयारी या खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती, लेकिन जांच से पहले लैब और डॉक्टर से निर्देश लेना बेहतर है।
Lp(a) की रिपोर्ट में कितना स्तर माना जाता है अधिक?
Lp(a) के परिणाम को समझने के लिए उसकी यूनिट पर ध्यान देना जरूरी है। रिपोर्ट में इसका स्तर mg/dL या nmol/L में दिया जा सकता है। इन दोनों यूनिट को एक निश्चित अनुपात से बदलना सही नहीं माना जाता।
नेशनल लिपिड एसोसिएशन के अनुसार, 30 mg/dL से कम स्तर को कम जोखिम की श्रेणी में रखा जाता है, जबकि 50 mg/dL या इससे अधिक स्तर को बढ़ा हुआ जोखिम माना जाता है। 30 से 50 mg/dL के बीच का स्तर मध्यवर्ती श्रेणी में आ सकता है। हालांकि, हृदय रोग का वास्तविक जोखिम दूसरे कारकों पर भी निर्भर करता है।
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इसलिए रिपोर्ट में Lp(a) का स्तर बढ़ा मिलने पर घबराने के बजाय डॉक्टर से इसका अर्थ समझना चाहिए। केवल एक नंबर के आधार पर हार्ट अटैक होने या न होने की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
Lp(a) बढ़ा हो तो क्या करें?
Lp(a) का स्तर मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों से तय होता है और जीवनशैली में बदलाव से इसमें बहुत अधिक कमी आना आमतौर पर संभव नहीं होता। फिर भी हृदय रोग के दूसरे जोखिम कारकों को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
इन बातों पर ध्यान दें:
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार LDL कोलेस्ट्रॉल और जरूरत पड़ने पर ApoB को नियंत्रित करें।
- ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं।
- धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं।
- नियमित शारीरिक गतिविधि करें और संतुलित आहार लें।
- परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास हो, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।
- Lp(a) बढ़ा होने पर दवा या अन्य उपचार के विकल्पों पर विशेषज्ञ से चर्चा करें।
फिलहाल Lp(a) को विशेष रूप से कम करने वाले उपचारों पर शोध जारी है। उपचार का चुनाव व्यक्ति के कुल हृदय जोखिम और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर किया जाता है। खुद से कोई दवा शुरू न करें।
हार्ट हेल्थ के लिए सिर्फ एक टेस्ट पर निर्भर न रहें
Lp(a) की जांच हृदय रोग के जोखिम को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती है, लेकिन यह हार्ट अटैक से बचाव की गारंटी नहीं है। सामान्य रिपोर्ट आने पर भी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, अचानक कमजोरी या दर्द का बांह, पीठ अथवा जबड़े तक फैलना हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, जोखिम कारकों पर नियंत्रण और जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
