Bhooth Bangla Review: हॉरर-कॉमेडी में Akshay Kumar की दमदार वापसी, लेकिन लंबाई और कमजोर क्लाइमैक्स बनी चुनौती

Bhooth Bangla

बॉलीवुड में हॉरर-कॉमेडी जॉनर लगातार लोकप्रिय हो रहा है, और इसी कड़ी में निर्देशक Priyadarshan अपनी नई फिल्म Bhooth Bangla लेकर आए हैं।

मंगलपुर की रहस्यमयी हवेली, श्राप और गायब होती दुल्हनों के बीच अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी—क्या ‘Bhooth Bangla’ डर और मनोरंजन का सही संतुलन बना पाती है?

बॉलीवुड में हॉरर-कॉमेडी जॉनर लगातार लोकप्रिय हो रहा है, और इसी कड़ी में निर्देशक Priyadarshan अपनी नई फिल्म Bhooth Bangla लेकर आए हैं। फिल्म में अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में नजर आते हैं और उनके साथ मिथिला पालकर, वामिका गब्बी, परेश रावल, राजपाल यादव, मनोज जोशी और तब्बू जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं।

यह फिल्म एक रहस्यमयी कहानी, पारिवारिक ड्रामा और कॉमिक एलिमेंट्स का मिश्रण पेश करती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह दर्शकों को अंत तक बांधे रख पाती है? आइए जानते हैं इस विस्तृत रिव्यू में।


कहानी: श्राप, रहस्य और एक डरावनी हवेली

फिल्म की कहानी उत्तर भारत के एक छोटे से कस्बे मंगलपुर में सेट है, जहां एक अजीबोगरीब श्राप की कहानी सालों से लोगों के बीच प्रचलित है। मान्यता है कि यहां शादी के दिन दुल्हनें गायब हो जाती हैं, और इसके पीछे एक राक्षस और अप्सरा से जुड़ी कहानी है।

लंदन में रहने वाला अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार) तब इस कस्बे में आता है, जब उसे पता चलता है कि उसके दादा दुश्यंत आचार्य (राजेश शर्मा) ने उसे और उसकी बहन मीरा (मिथिला पालकर) को एक पुरानी हवेली और अरबों की संपत्ति विरासत में दी है।

मीरा की शादी उसके बॉयफ्रेंड राहुल से तय हो चुकी है, और पंडित महाराज (मनोज जोशी) के अनुसार शादी एक खास मुहूर्त पर ही होनी चाहिए। अर्जुन फैसला करता है कि शादी उसी हवेली में होगी, जो अब खंडहर बन चुकी है और भूत-प्रेत की कहानियों से घिरी हुई है।


हवेली में शुरू होता है असली खेल

मंगलपुर पहुंचने के बाद अर्जुन को हवेली की हालत और उससे जुड़ी डरावनी कहानियों का सामना करना पड़ता है। परिवार के गुरु वशिष्ठ (जाकिर हुसैन) इस श्राप की पुष्टि करते हैं, लेकिन अर्जुन इसे अंधविश्वास मानता है।

वह हवेली को ठीक करवाने का फैसला करता है और इसके लिए वह वेडिंग प्लानर जगदीश (परेश रावल) और उसके भांजे बाली (राजपाल यादव) को काम पर लगाता है।

इसी दौरान अर्जुन की मुलाकात प्रिया (वामिका गब्बी) से होती है, जो एक लेखक के रूप में वहां आती है, लेकिन उसकी असली मंशा कुछ और होती है।

जैसे-जैसे शादी की तैयारियां आगे बढ़ती हैं, हवेली में अजीब घटनाएं शुरू हो जाती हैं—रहस्यमयी आवाजें, गायब होते लोग और डरावने संकेत। कहानी धीरे-धीरे अर्जुन की मां यशोधरा (तब्बू) के अतीत से भी जुड़ती है।


क्या मीरा भी हो जाएगी गायब?

फिल्म का सबसे बड़ा सस्पेंस यही है कि क्या मीरा भी उन दुल्हनों की तरह गायब हो जाएगी, या अर्जुन इस रहस्य को सुलझा पाएगा?

कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न हैं, लेकिन इनमें से कई पहले से अनुमानित लगते हैं। हालांकि, फिल्म एक दिलचस्प संदेश देती है—जब इंसान खुद को भगवान समझने लगता है, तो उसके परिणाम खतरनाक हो सकते हैं।


स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले: दमदार आइडिया, कमजोर पकड़

फिल्म की कहानी आकाश कौशिक ने लिखी है, जो इससे पहले भूल भुलैया 2 जैसी फिल्मों में भी काम कर चुके हैं।

कहानी का आइडिया मजबूत है, लेकिन स्क्रीनप्ले में कई जगह ढील नजर आती है। फिल्म की लंबाई ज्यादा है और क्लाइमैक्स को अनावश्यक रूप से खींचा गया है।

डायलॉग्स में कुछ जगहों पर अच्छा ह्यूमर है, लेकिन कुछ कॉमेडी सीन काफी साधारण और नीचे स्तर के लगते हैं, जो प्रियदर्शन की स्टाइल से मेल नहीं खाते।


अभिनय: अक्षय कुमार का शो

अगर इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत की बात करें, तो वह हैं अक्षय कुमार।

अक्षय कुमार अर्जुन के किरदार में पूरी तरह छा जाते हैं। उनका कॉन्फिडेंट, तर्कशील और हल्का-फुल्का गुस्सैल अंदाज फिल्म को संभालता है।

मिथिला पालकर अपनी सीमित भूमिका में अच्छा काम करती हैं। वामिका गब्बी भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं, हालांकि उनका किरदार ज्यादा गहराई नहीं पकड़ पाता।

तब्बू जैसी दमदार अभिनेत्री का रोल काफी छोटा और प्रभावहीन लगता है।

कॉमिक स्टारकास्ट—परेश रावल, राजपाल यादव और असरानी—इस बार उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाते, जितनी उनसे उम्मीद थी।


निर्देशन और म्यूजिक: मिला-जुला अनुभव

निर्देशक प्रियदर्शन ने फिल्म को दिलचस्प बनाने की कोशिश की है, लेकिन कई सबप्लॉट्स के कारण कहानी बिखरी हुई लगती है।

म्यूजिक की बात करें तो फिल्म के गाने औसत हैं। “राम जी आके भला करेंगे” गाना अच्छा लगता है, लेकिन इसे सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया।

एक रोमांटिक गाना “Tu Hi Disda” फिल्म की कहानी से मेल नहीं खाता और अचानक आ जाता है, जो दर्शकों को कन्फ्यूज करता है।


क्या फिल्म देखने लायक है?

Bhooth Bangla एक ऐसी फिल्म है जिसमें दमदार स्टारकास्ट, अच्छा कॉन्सेप्ट और मनोरंजन के कई तत्व हैं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और लंबाई इसकी रफ्तार को प्रभावित करते हैं।

अगर आप अक्षय कुमार के फैन हैं, तो यह फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी। वहीं, हॉरर-कॉमेडी पसंद करने वाले दर्शकों के लिए भी यह एक बार देखने लायक है।

हालांकि, नई पीढ़ी के दर्शकों को यह फिल्म थोड़ी जटिल और लंबी लग सकती है।


निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Bhooth Bangla एक औसत लेकिन मनोरंजक फिल्म है, जो कुछ जगहों पर हंसाती है, कुछ जगहों पर डराती है, लेकिन पूरी तरह प्रभावित नहीं कर पाती।

अक्षय कुमार की दमदार परफॉर्मेंस और फिल्म का दिलचस्प कॉन्सेप्ट इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं, लेकिन बेहतर एडिटिंग और मजबूत क्लाइमैक्स इसे और बेहतर बना सकते थे।

रेटिंग: 3/5

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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