बिहार की विश्वविद्यालयों में लागू होगी AI पॉलिसी, परीक्षा से पढ़ाई तक बदलेगा सिस्टम
Bihar AI Policy 2026 के तहत बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, परीक्षा, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और शोध में AI के इस्तेमाल की तैयारी है
निष्कर्ष भारत संवाददाता- पटना– बिहार के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई, परीक्षा और प्रशासनिक कामकाज को आधुनिक बनाने की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार सभी विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के लिए एक विशेष नीति तैयार करने की योजना बना रही है। प्रस्तावित नीति के तहत उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, प्रश्नपत्र तैयार करने, वर्चुअल लैब, शोध, पाठ्यक्रम निर्माण और विद्यार्थियों के कौशल विकास में AI का उपयोग किया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि नई नीति को अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले लागू करने की दिशा में काम किया जाए।
हालांकि, यह नीति अभी प्रस्तावित है। इसके अंतिम नियम, लागू होने की तारीख और अलग-अलग संस्थानों में इसके इस्तेमाल की सीमा नीति तैयार होने के बाद स्पष्ट होगी।
बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में AI के इस्तेमाल की तैयारी
उच्च शिक्षा में तेजी से बढ़ती तकनीक को देखते हुए बिहार सरकार विश्वविद्यालयों में AI के व्यवस्थित इस्तेमाल की योजना बना रही है। प्रस्ताव के दायरे में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को लाने की तैयारी है।
इस नीति का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को AI की पढ़ाई कराना नहीं, बल्कि शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों में भी इस तकनीक का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके तहत पढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने, शोध कार्यों में सहायता देने तथा संस्थानों के कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जाएगा।
सरकार की प्रस्तावित योजना के अनुसार, AI के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम और दिशा-निर्देश बनाए जाएंगे, ताकि तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ हो सके।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो विभागों को दी जिम्मेदारी
प्रस्तावित AI नीति का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग और विज्ञान, प्रावैधिकी तथा तकनीकी शिक्षा विभाग को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। इन विभागों को नीति बनाने के लिए विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की मदद लेने को कहा गया है।
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: IIIT रांची में SC/ST से दुर्व्यवहार के मामले को किसने दबाया? झारखंड पुलिस पर भी सवाल
उच्च शिक्षा में AI का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार चाहती है कि विश्वविद्यालयों में इसका इस्तेमाल बिना स्पष्ट नियमों के न हो। नीति के जरिए यह तय करने की कोशिश होगी कि शिक्षक, विद्यार्थी और प्रशासनिक कर्मचारी किन कार्यों में AI की मदद ले सकेंगे और इसके लिए किन नियमों का पालन करना होगा।
AI नीति के लिए बनेंगी दो कमेटियां
प्रस्तावित योजना के तहत AI नीति के निर्माण और क्रियान्वयन के लिए दो अलग-अलग समितियां गठित करने की तैयारी है।
पहली: AI पॉलिसी एडवाइजरी कमेटी
यह समिति AI के इस्तेमाल से जुड़े ढांचे, नियमों और दिशा-निर्देशों को तैयार करने में भूमिका निभाएगी। इसमें विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की मदद से यह तय किया जा सकेगा कि उच्च शिक्षा में AI का उपयोग किस तरह किया जाए।
दूसरी: AI पॉलिसी इंप्लीमेंटेशन कमेटी
इस समिति की जिम्मेदारी नीति को जमीन पर लागू कराने से जुड़ी होगी। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में निर्धारित नियमों के अनुसार AI के इस्तेमाल को आगे बढ़ाना होगा।
खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े
इन समितियों के गठन और उनकी विस्तृत जिम्मेदारियों को लेकर अंतिम व्यवस्था नीति के औपचारिक स्वरूप में स्पष्ट होगी।
परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और प्रश्नपत्र बनाने में होगा AI का उपयोग
प्रस्तावित AI नीति में परीक्षा व्यवस्था को भी शामिल किया जा रहा है। इसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और प्रश्नपत्र तैयार करने में AI आधारित तकनीक की मदद लेने की योजना है।
यदि इसका व्यवस्थित क्रियान्वयन होता है, तो परीक्षा से जुड़े कुछ कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, मूल्यांकन की निष्पक्षता, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और मानवीय निगरानी जैसे पहलुओं पर स्पष्ट नियम बनाना जरूरी होगा।
AI का उपयोग पूरी परीक्षा व्यवस्था को किस हद तक प्रभावित करेगा, यह नीति के अंतिम दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इसे प्रस्तावित योजना के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
पढ़ाई, वर्चुअल लैब और शोध में भी मिलेगी मदद
AI नीति का दायरा परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें पाठ्यक्रम निर्माण, शिक्षण सामग्री तैयार करने, वर्चुअल लैब और चैटबॉट जैसी सुविधाओं को भी शामिल करने की योजना है।
वर्चुअल लैब के माध्यम से विद्यार्थी डिजिटल वातावरण में विभिन्न प्रयोगों और प्रक्रियाओं को समझ सकते हैं। वहीं, AI आधारित चैटबॉट विद्यार्थियों को विषयों से जुड़े सवालों के जवाब और पढ़ाई में शुरुआती सहायता उपलब्ध करा सकते हैं।
इसके अलावा, शोध कार्यों, नवाचार और कौशल विकास में भी AI की मदद लेने पर जोर दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराने और रोजगार से जुड़े कौशल विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
शिक्षकों और छात्रों को बताना होगा AI का इस्तेमाल
प्रस्तावित नीति में पारदर्शिता को महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। इसके तहत शिक्षकों को पाठ्यक्रम, नोट्स या प्रश्नपत्र तैयार करने में AI की मदद लेने पर इसकी जानकारी देनी पड़ सकती है।
ये भी पढ़े: बिहार में फिर कटेगा वोटर लिस्ट से नाम, 12 नवंबर को आएगा ड्राफ्ट, जानें जोड़ने और सुधार का तरीका
इसी तरह विद्यार्थियों को असाइनमेंट और प्रोजेक्ट तैयार करते समय यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने AI का इस्तेमाल किया है या नहीं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि विद्यार्थी ने स्वयं कितना काम किया और तकनीक की मदद किस स्तर पर ली।
हालांकि, AI के इस्तेमाल की घोषणा किस प्रारूप में करनी होगी और किन कार्यों में इसकी अनुमति होगी, यह अंतिम नीति में निर्धारित किया जाएगा।
डेटा सुरक्षा और नकल रोकने पर रहेगा जोर
AI के इस्तेमाल के साथ डेटा गोपनीयता, शैक्षणिक ईमानदारी और तकनीक के दुरुपयोग जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित नीति में AI के नैतिक और सुरक्षित इस्तेमाल के लिए नियम तय करने की योजना है।
शिक्षकों और विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने और दिशा-निर्देश जारी करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि AI का इस्तेमाल सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए हो, न कि नकल या अनुचित लाभ हासिल करने के लिए।
बिहार में प्रस्तावित AI नीति लागू होने पर विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, परीक्षा, शोध और प्रशासनिक कामकाज के तरीके में बदलाव आ सकता है। हालांकि, अभी नीति निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इसके वास्तविक प्रभाव का पता अंतिम नियमों, क्रियान्वयन की समयसीमा और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने की व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद ही चलेगा।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
