बिहार में होगी IAS संजय कुमार सिंह की वापसी, बन सकते हैं CM के प्रधान सचिव

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बिहार लौटेंगे IAS संजय कुमार सिंह, CM सम्राट के प्रधान सचिव बनने की चर्चा

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ओडिशा कैडर के 1997 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय कुमार सिंह की बिहार वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चर्चा है कि बिहार लौटने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह केवल एक वरिष्ठ अधिकारी की वापसी नहीं होगी, बल्कि मुख्यमंत्री सचिवालय की प्रशासनिक टीम और सरकार की कार्यशैली के लिहाज से भी अहम घटनाक्रम माना जाएगा।

संजय कुमार सिंह पहले भी बिहार में करीब सात वर्षों तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। पटना और गया जैसे महत्वपूर्ण जिलों के जिलाधिकारी रहने के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय में भी जिम्मेदारी संभाली थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। अब सम्राट चौधरी की सरकार में उनकी संभावित वापसी को प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों नजरिए से देखा जा रहा है।

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हालांकि, अभी उनके बिहार आने और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव बनाए जाने को लेकर अंतिम आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। फिलहाल प्रतिनियुक्ति से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

बिहार वापसी की प्रक्रिया शुरू, केंद्र ने मांगी विजिलेंस रिपोर्ट

ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी संजय कुमार सिंह को बिहार लाने के लिए राज्य सरकार की ओर से अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति का अनुरोध किया गया है। इस संबंध में केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 22 अक्टूबर 2026 को ओडिशा सरकार से पत्राचार किया था।

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केंद्र ने ओडिशा सरकार से अधिकारी की सतर्कता स्थिति यानी विजिलेंस क्लीयरेंस और संपत्ति से संबंधित जानकारी मांगी है। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद प्रतिनियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद अब आवश्यक औपचारिकताओं पर काम किया जा रहा है।

प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संजय कुमार सिंह को बिहार के लिए कार्यमुक्त किया जा सकेगा। ऐसे में उनकी वापसी की संभावित समयसीमा को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

कौन हैं आईएएस संजय कुमार सिंह?

संजय कुमार सिंह 1997 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और ओडिशा कैडर से संबंधित हैं। मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले संजय कुमार सिंह ने प्रशासनिक सेवा में अपने लंबे करियर के दौरान बिहार और ओडिशा दोनों राज्यों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

अर्थशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने वाले संजय कुमार सिंह को जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों तक काम करने का अनुभव है। वर्तमान में वह ओडिशा सरकार में प्रधान सचिव स्तर के पद पर कार्यरत हैं।

उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए बिहार सरकार की ओर से उन्हें वापस बुलाने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सचिवालय जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्यालय में उनकी संभावित तैनाती की चर्चा ने इस घटनाक्रम को और खास बना दिया है।

पटना और गया के DM रह चुके हैं संजय कुमार सिंह

संजय कुमार सिंह का बिहार से पुराना प्रशासनिक संबंध रहा है। फरवरी 2008 से फरवरी 2015 तक वह अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर बिहार में कार्यरत रहे। इस दौरान उन्होंने गया और पटना के जिलाधिकारी के रूप में काम किया।

गया में जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने जिला प्रशासन की जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद पटना जैसे राज्य के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र में भी उन्हें जिलाधिकारी बनाया गया।

जिलाधिकारी के पद के अलावा उन्होंने बिहार के गृह विभाग में अपर सचिव के रूप में भी काम किया। मुख्यमंत्री सचिवालय में विशेष सचिव और बाद में मुख्यमंत्री के सचिव की जिम्मेदारी भी उनके पास रही।

यही वजह है कि बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी कामकाज और मुख्यमंत्री सचिवालय की कार्यप्रणाली से वह पहले से परिचित हैं। राज्य सरकार के लिए यह अनुभव नई जिम्मेदारी में उपयोगी साबित हो सकता है।

सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव बनने की क्यों हो रही चर्चा?

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव का पद बिहार प्रशासन में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्यमंत्री और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने, महत्वपूर्ण फाइलों को आगे बढ़ाने, प्रशासनिक बैठकों और सरकारी प्राथमिकताओं के क्रियान्वयन में इस पद की अहम भूमिका होती है।

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद सचिवालय में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में संजय कुमार सिंह की संभावित नियुक्ति को मुख्यमंत्री की नई प्रशासनिक टीम तैयार करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वयं संजय कुमार सिंह को बिहार में प्रतिनियुक्ति पर लाने की इच्छा जताई है। उनके अनुभव और पूर्व में बिहार में काम करने के रिकॉर्ड को देखते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, प्रधान सचिव के पद पर उनकी नियुक्ति को अभी संभावित ही माना जाना चाहिए। बिहार सरकार की ओर से इस संबंध में अंतिम आदेश आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।

क्या नीतीश कुमार के प्रशासनिक मॉडल की दिखेगी झलक?

संजय कुमार सिंह की संभावित वापसी के बीच सबसे दिलचस्प चर्चा नीतीश कुमार के समय की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर हो रही है। नीतीश कुमार के लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल में मुख्यमंत्री सचिवालय में अनुभवी अधिकारियों की एक टीम काम करती थी। अलग-अलग सामाजिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि के अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती थीं।

संजय कुमार सिंह भी उसी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। उन्हें नीतीश कुमार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री सचिवालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली थी। ऐसे में उनकी संभावित वापसी को पुराने प्रशासनिक अनुभव और नई सरकार की जरूरतों के बीच तालमेल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालने के बाद अपनी प्रशासनिक टीम में बदलाव किए हैं। अब अगर वह नीतीश कुमार के कार्यकाल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके अधिकारी को अपने सचिवालय में जगह देते हैं तो इसे प्रशासनिक निरंतरता के संकेत के रूप में भी देखा जा सकता है।

हालांकि, किसी अधिकारी की नियुक्ति को केवल पुराने राजनीतिक या प्रशासनिक संबंधों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार की प्राथमिकताएं, अधिकारी का अनुभव और प्रशासनिक जरूरतें भी ऐसे फैसलों में महत्वपूर्ण होती हैं।

बिहार की नौकरशाही में क्या बदल सकता है?

संजय कुमार सिंह की वापसी और संभावित नियुक्ति से बिहार के प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सचिवालय में प्रधान सचिव की भूमिका सरकार के निर्णयों को तेजी से लागू कराने में महत्वपूर्ण होती है।

सम्राट चौधरी के सामने फिलहाल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और विकास योजनाओं को गति देने जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी को मुख्यमंत्री सचिवालय में लाने की पहल को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया, ओडिशा सरकार की अंतिम मंजूरी और बिहार सरकार के नियुक्ति संबंधी आदेश पर टिकी हैं। यदि सभी औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं तो संजय कुमार सिंह की बिहार में दूसरी पारी शुरू हो सकती है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सम्राट चौधरी उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में प्रधान सचिव की जिम्मेदारी देंगे या उनके अनुभव का इस्तेमाल किसी अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर किया जाएगा। इसका जवाब आने वाले दिनों में सरकारी अधिसूचना से ही मिलेगा।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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