बिहार में शिक्षकों के तबादले पर ब्रेक, अब चुनाव के बाद मौका, जानें कब खुलेगा पोर्टल

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बिहार में शिक्षकों के सामान्य तबादले पर चुनाव तक रोक लगी है। जानें ई-शिक्षा कोष पोर्टल कब खुलेगा और नई समय-सीमा कैसे तय होगी।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में सरकारी शिक्षकों के तबादले का इंतजार एक बार फिर बढ़ गया है। विधान परिषद चुनाव को लेकर लागू आदर्श आचार संहिता के कारण शिक्षा विभाग ने सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी है। अब चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शिक्षकों के तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल खोलने और नई समय-सीमा तय करने पर फैसला लिया जाएगा। इससे उन हजारों शिक्षकों को इंतजार करना पड़ेगा, जो अपने मनचाहे स्कूल या जिले में तबादले की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

शिक्षा विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। विभाग के उप सचिव अजय सतीश भेंगरा की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, राज्य के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़ी गतिविधियां अगले आदेश तक स्थगित रहेंगी। विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही इस संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर पर क्यों लगी रोक?

बिहार में विधान परिषद चुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता लागू है। इसी वजह से शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के सामान्य तबादले की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगी थी। विभाग की ओर से भेजे गए पत्र पर राज्य निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को अपना जवाब दिया।

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आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान स्थानांतरण प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखा जाए और चुनाव समाप्त होने के बाद ही इसे आगे बढ़ाया जाए। आयोग के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने भी तबादले पर रोक लगाने की अधिसूचना जारी कर दी।

इस फैसले का सीधा असर उन सरकारी शिक्षकों पर पड़ा है, जो तीसरे चरण में होने वाले सामान्य तबादले के लिए आवेदन करने की तैयारी कर रहे थे। अब शिक्षकों को पोर्टल खुलने की नई तारीख और विभाग के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।

शिक्षकों के सामान्य तबादले का पोर्टल कब खुलेगा?

शिक्षा विभाग ने सामान्य तबादले की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पहले 4 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की थी। योजना के अनुसार, ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से शिक्षक ऑनलाइन आवेदन करने वाले थे। हालांकि, चुनावी आचार संहिता के कारण आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इसे रोक दिया गया।

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फिलहाल विभाग ने पोर्टल दोबारा खोलने की कोई नई तारीख घोषित नहीं की है। अधिसूचना में कहा गया है कि विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद नई समय-सीमा जारी की जाएगी।

ऐसे में शिक्षकों को अभी किसी निश्चित तारीख के आधार पर आवेदन की तैयारी करने के बजाय शिक्षा विभाग के आधिकारिक निर्देशों पर नजर रखनी चाहिए। पोर्टल खुलने के बाद आवेदन की अवधि, पात्रता और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

पांच लाख से अधिक शिक्षकों के तबादले की तैयारी

बिहार के सरकारी स्कूलों में पांच लाख से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया के तहत शिक्षकों के ऐच्छिक तबादले किए जाने हैं। इसके लिए विभाग ने चरणबद्ध व्यवस्था अपनाई है, ताकि स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और जरूरत के बीच संतुलन बनाया जा सके।

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अब तक इस प्रक्रिया के दो चरण पूरे किए जा चुके हैं। पहले चरण में विद्यालयों में जरूरत से अधिक तैनात शिक्षकों का समायोजन किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में आपसी सहमति यानी म्युचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की गई।

इन दोनों चरणों के पूरा होने के बाद शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में रिक्त पदों की संशोधित सूची जारी की थी। इसी सूची को आधार बनाकर सामान्य तबादले की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। लेकिन चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण फिलहाल इस पर रोक लग गई है।

शिक्षकों के तबादले में रिक्त पदों की सूची क्यों अहम?

सामान्य तबादले की प्रक्रिया में स्कूलों के रिक्त पदों की सूची की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। समायोजन और म्युचुअल ट्रांसफर के बाद विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता में बदलाव आया है। ऐसे में संशोधित सूची के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि किन स्कूलों में पद उपलब्ध हैं और तबादले की प्रक्रिया में किन विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

शिक्षकों के लिए इसका मतलब है कि आवेदन करते समय उपलब्ध पदों और विभाग की ओर से तय नियमों को ध्यान में रखना होगा। हालांकि, नई समय-सीमा और आवेदन से जुड़ी विस्तृत शर्तों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।

पोर्टल खुलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिक्षक किस तरह अपनी पसंद के स्थान के लिए आवेदन कर सकेंगे और आवेदन की प्रक्रिया कितने दिनों तक चलेगी।

बाढ़ के कारण भी टला था शिक्षकों का तबादला

बिहार में शिक्षकों के सामान्य तबादले की प्रक्रिया पहले भी टाली जा चुकी है। इससे पहले राज्य के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति के कारण निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा था।

शुरुआत में 17 सितंबर से सामान्य तबादले के लिए पोर्टल खोलने की योजना थी। लेकिन मानसून के दौरान कई जिलों में बाढ़ और जलजमाव की स्थिति को देखते हुए प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद विभाग ने अक्टूबर में तबादले की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की थी।

शिक्षकों को उम्मीद थी कि अक्टूबर में ऑनलाइन आवेदन का रास्ता खुल जाएगा। लेकिन विधान परिषद चुनाव और आदर्श आचार संहिता के कारण अब यह प्रक्रिया एक बार फिर रुक गई है। लगातार तारीखों में बदलाव होने से उन शिक्षकों की चिंता बढ़ सकती है, जो पारिवारिक परिस्थितियों, आवागमन की परेशानी या अन्य निजी कारणों से स्थानांतरण चाहते हैं।

शिक्षकों को अब क्या करना चाहिए?

फिलहाल शिक्षकों को तबादले के लिए नई तारीख घोषित होने तक इंतजार करना होगा। आवेदन पोर्टल खुलने की आधिकारिक सूचना शिक्षा विभाग और ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से मिलने पर ही आवेदन किया जा सकेगा।

इस दौरान शिक्षकों को अपने जरूरी दस्तावेज, सेवा से संबंधित विवरण और विभागीय निर्देशों की जानकारी तैयार रखनी चाहिए। साथ ही, किसी अपुष्ट तारीख या सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचना के आधार पर आवेदन शुरू होने का दावा सही नहीं मानना चाहिए।

शिक्षा विभाग की ओर से नई समय-सीमा जारी होने के बाद ही सामान्य तबादले की प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा। तब तक शिक्षकों को चुनावी प्रक्रिया पूरी होने और विभाग के नए आदेश का इंतजार करना पड़ेगा।

बिहार में शिक्षकों के सामान्य तबादले पर लगी रोक ने एक बार फिर प्रक्रिया को अनिश्चित बना दिया है। पहले बाढ़ और अब विधान परिषद चुनाव के कारण आवेदन कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव के बाद पोर्टल कब खुलेगा और शिक्षकों को अपनी पसंद के स्थान पर तबादले के लिए आवेदन करने का अवसर कब मिलेगा। इसका जवाब शिक्षा विभाग की अगली अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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