घाटानुदानित कॉलेजों के शिक्षकों की प्रोन्नति नियम में बड़ा बदलाव, 1992 की व्यवस्था खत्म

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घाटानुदानित कॉलेजों के शिक्षकों के नियम बदले

निष्कर्ष भारत, संवाददाता–पटना: बिहार में घाटानुदानित कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की प्रोन्नति व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने वर्ष 1992 में जारी उस नियम को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पद पर समयबद्ध प्रोन्नति देने का प्रावधान था। अब शिक्षकों की प्रोन्नति करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत लागू नियमों के अनुसार होगी। यह फैसला धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यक कॉलेजों पर भी लागू होगा।

बिहार में शिक्षकों की प्रोन्नति व्यवस्था में बदलाव

बिहार के विश्वविद्यालयों से संबद्ध घाटानुदानित कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के लिए प्रोन्नति से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। राज्यपाल के निर्देश पर लिया गया यह निर्णय उच्च शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 14 सितंबर 1992 के पत्र के माध्यम से लागू की गई उस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जिसके तहत संबद्ध कॉलेजों के व्याख्याताओं को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पद पर समयबद्ध प्रोन्नति देने का प्रावधान था।

इस बदलाव के बाद संबंधित कॉलेजों के शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए करियर एडवांसमेंट स्कीम यानी सीएएस के प्रावधान लागू होंगे। इससे सहायक प्राध्यापक और सह-प्राध्यापक सहित विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों की पदोन्नति निर्धारित नियमों के तहत की जाएगी।

23 सितंबर 1995 से प्रभावी माना जाएगा फैसला

अधिसूचना में इस निर्णय को 23 सितंबर 1995 से प्रभावी माने जाने का उल्लेख किया गया है। यानी वर्ष 1992 की अधिसूचना के तहत लागू समयबद्ध प्रोन्नति की व्यवस्था को इस प्रभावी तिथि से समाप्त माना जाएगा।

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से मंगलवार को अधिसूचना जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। इस निर्णय के दायरे में बिहार के विश्वविद्यालयों से संबद्ध घाटानुदानित कॉलेजों के साथ-साथ धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यक कॉलेज भी शामिल हैं।

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इसका मतलब है कि संबंधित संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया को अब सीएएस के अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुरूप देखा जाएगा। हालांकि, अलग-अलग शिक्षकों की पात्रता, सेवा अवधि और प्रोन्नति की स्थिति संबंधित नियमों तथा उनके सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तय होगी।

क्या है करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS)?

करियर एडवांसमेंट स्कीम यानी सीएएस शिक्षकों के करियर में आगे बढ़ने और पदोन्नति से संबंधित व्यवस्था है। इसके तहत निर्धारित पात्रता, सेवा अवधि और लागू शैक्षणिक मानकों के आधार पर शिक्षकों की प्रोन्नति पर विचार किया जाता है।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने चार कुलपतियों की समिति की अनुशंसा और उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त प्रस्ताव पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया है।

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नई व्यवस्था के अनुसार, घाटानुदानित कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की विभिन्न श्रेणियों की प्रोन्नति सीएएस के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप होगी। यह प्रक्रिया विश्वविद्यालयों और उनके अंगीभूत कॉलेजों में लागू संबंधित नियमों के अनुरूप रखी जाएगी।

इसके साथ ही प्रोन्नति के लिए समान प्रभावी तिथि और समय-समय पर लागू सीएएस के प्रावधानों का पालन किया जाएगा। इससे शिक्षकों की पदोन्नति के लिए नियमों की एकरूपता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यक कॉलेज भी दायरे में

इस फैसले का दायरा केवल सामान्य घाटानुदानित कॉलेजों तक सीमित नहीं है। अधिसूचना के मुताबिक, धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यक कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों पर भी यह बदलाव लागू होगा।

इन संस्थानों में शिक्षकों की प्रोन्नति से संबंधित पूर्व व्यवस्था को नए प्रावधानों के अनुरूप माना जाएगा। इससे संबंधित कॉलेजों में पदोन्नति की प्रक्रिया के दौरान सीएएस के नियमों का पालन करना आवश्यक होगा।

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हालांकि, अधिसूचना के आधार पर सभी शिक्षकों को तत्काल प्रोन्नति मिलने या उनकी पदोन्नति स्वतः स्वीकृत होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। प्रत्येक मामले में संबंधित नियमों, पात्रता और सेवा संबंधी शर्तों का पालन जरूरी होगा।

पुराने नियमों में संशोधन का भी प्रावधान

राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि सीएएस के तहत प्रोन्नति से संबंधित पहले जारी नियमों में भी इस निर्णय के अनुरूप संशोधन माना जाएगा। इससे संबंधित शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में पुराने प्रावधानों की जगह लागू सीएएस नियमों को आधार बनाया जाएगा।

कुल मिलाकर, बिहार के घाटानुदानित कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की प्रोन्नति व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव है। वर्ष 1992 की अधिसूचना के तहत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पद पर समयबद्ध प्रोन्नति देने वाली व्यवस्था समाप्त होने के बाद अब पदोन्नति के मामलों में सीएएस के प्रावधान प्रमुख होंगे। इस फैसले का प्रभाव संबंधित कॉलेजों के शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया और सेवा संबंधी मामलों पर पड़ेगा।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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