SIR विवाद के बीच चिराग पासवान का विपक्ष पर हमला, बोले- चुनाव आयोग की आलोचना ‘सेलेक्टिव क्रिटिसिज्म’
SIR विवाद पर Chirag Paswan का विपक्ष पर हमला
निष्कर्ष भारत संवाददाता- चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देश की राजनीति में जारी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष के रुख पर निशाना साधा है। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज पर लगातार सवाल उठाने को लेकर विपक्ष की आलोचना की और इसे “सेलेक्टिव क्रिटिसिज्म” बताया। चिराग ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसकी विश्वसनीयता को लेकर किसी भी तरह का भ्रम पैदा नहीं होना चाहिए।
चिराग ने विपक्ष की आलोचना को बताया ‘सेलेक्टिव क्रिटिसिज्म’
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग के नतीजों और प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, लेकिन जहां विपक्षी दल चुनाव जीतकर सरकार बनाते हैं, वहां इसी तरह की आपत्तियां सामने नहीं आतीं।
चिराग पासवान ने केरल और हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में विपक्षी दलों की सरकार बनने के बाद चुनाव आयोग के नतीजों पर उसी तरह सवाल नहीं उठाए गए। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया को लेकर इस तरह का अलग-अलग रवैया “सेलेक्टिव क्रिटिसिज्म” की स्थिति पैदा करता है।
चुनाव आयोग की गरिमा बनाए रखने की बात
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग देश की स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं में से एक है। ऐसे में उसकी गरिमा और चुनावी प्रक्रिया में लोगों के भरोसे को बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: Chirag Paswan का NDA से मोह भंग ? सम्राट सरकार पर साधा निशाना !
चिराग का कहना है कि अगर किसी राजनीतिक दल को चुनाव प्रक्रिया या मतदाता सूची से जुड़ी कोई आपत्ति है तो उसे तथ्यों और उचित प्रक्रिया के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। इससे जनता के बीच अनावश्यक भ्रम की स्थिति बनने से बचाया जा सकता है।
SIR को लेकर क्यों मचा है विवाद?
दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विवाद के बीच चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी राजनीतिक बहस तेज हुई है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR से जुड़े एक मामले पर सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग से जुड़े कुछ फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने SIR और उससे जुड़े फैसलों की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि ये याचिका में लगाए गए आरोप हैं, जिन पर अदालत में सुनवाई होनी है।
चुनाव आयोग पहले ही दे चुका है सफाई
SIR और आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर चुनाव आयोग अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है। आयोग के मुताबिक, किसी संस्थान के भीतर विचार-विमर्श या अलग-अलग राय सामने आना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। चुनाव आयोग खुद को एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था के रूप में परिभाषित करता है।
खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े
इस पूरे विवाद के बीच चिराग पासवान पहले भी कह चुके हैं कि चुनाव आयोग को उठ रहे सवालों पर जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह न रहे। उन्होंने यह भी कहा था कि आयोग की सफाई का उद्देश्य केवल विपक्ष को जवाब देना नहीं, बल्कि आम मतदाताओं की शंकाओं को दूर करना होना चाहिए।
विपक्ष कर रहा है ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है। कांग्रेस समेत विपक्षी नेताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस की हालिया बैठक में भी SIR को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराई गई। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई।
चिराग की टिप्पणी से बढ़ी राजनीतिक बहस
चिराग पासवान की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब SIR और चुनाव आयोग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज है। एक तरफ विपक्ष आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता का बचाव कर रहे हैं।
ये भी पढ़े: रोहिणी का चिराग पर तंज़, बोली- इस्तीफे का शुभ मुहूर्त कब, अब भी आप सरकार में क्यों?
चिराग ने अपने बयान के जरिए यह सवाल उठाया है कि चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाने का राजनीतिक पैमाना सभी राज्यों और चुनावी नतीजों के लिए एक जैसा होना चाहिए।
जनता के भरोसे पर टिकी पूरी बहस
चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद सिर्फ राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया सीधे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ी होती है। ऐसे में SIR को लेकर चल रही बहस में पारदर्शिता, प्रक्रिया और मतदाताओं के भरोसे जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं।
आयोग की ओर से SIR-2026 से संबंधित जानकारी और मतदाता सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं, विपक्ष लगातार प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना रहा है।
SIR पर आगे भी जारी रह सकती है सियासी टक्कर
फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक टकराव खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष जहां चुनाव आयोग और उसके फैसलों पर सवाल उठा रहा है, वहीं चिराग पासवान जैसे NDA नेता विपक्ष की आलोचना के तरीके पर प्रश्न उठा रहे हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ न्यायिक स्तर पर होने वाली सुनवाई भी महत्वपूर्ण रहेगी। SIR से जुड़े विवाद का अगला चरण चुनाव आयोग की सफाई, अदालत में होने वाली सुनवाई और राजनीतिक दलों की आगे की रणनीति से तय होगा।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
