नाबालिगों के सोशल मीडिया बैन पर भड़के CJP प्रमुख, बोले- ‘Gen Alpha’ को चुप कराने की कोशिश

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CJP दीपके ने नाबालिगों के सोशल मीडिया बैन पर उठाए सवाल, जानें मामला

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर देश में बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार से नियम बनाने पर विचार करने को कहे जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।

CJP के दीपके ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन सुरक्षा के नाम पर नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोशिश कहीं युवाओं की आवाज को सीमित करने की दिशा में तो नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में फिलहाल किसी अंतिम सोशल मीडिया बैन का आदेश नहीं दिया गया है। अदालत ने केंद्र से मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट को नियंत्रित करने के लिए वैधानिक नियम बनाने पर विचार करने को कहा है

CJP ने उठाए सोशल मीडिया बैन पर सवाल

CJP ने कहा कि सोशल मीडिया आज की युवा पीढ़ी के लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि अपनी बात रखने और सत्ता से सवाल पूछने का भी एक जरिया बन चुका है। उनके मुताबिक, जेन जी ने इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सवाल उठाने, राजनीतिक मुद्दों पर बहस करने और सरकार की नीतियों की आलोचना के लिए किया है।

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CJP के दीपके का कहना है कि अब जेन अल्फा की पीढ़ी धीरे-धीरे उसी डिजिटल दुनिया में प्रवेश कर रही है। ऐसे में नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर व्यापक प्रतिबंध की कोशिश को केवल बच्चों की सुरक्षा के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इससे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित होगी या उनकी अभिव्यक्ति भी प्रभावित होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से क्या कहा

यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका के बाद सामने आया है। याचिका Just Rights for Children Alliance की ओर से दायर की गई है। इसमें नाबालिगों को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट बनाने से रोकने तथा बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग की गई है।

28 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र से इस विषय में वैधानिक व्यवस्था पर विचार करने को कहा। अदालत के सामने यह तर्क रखा गया कि नाबालिग भारतीय कानून के तहत स्वतंत्र रूप से अनुबंध नहीं कर सकते, जबकि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वे शर्तों को स्वीकार करके अपना अकाउंट बना लेते हैं।

CJP प्रमुख ने सुरक्षा व्यवस्था पर दिया जोर

दीपके ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना चाहती है तो पूरे आयु वर्ग पर रोक लगाने के बजाय उन गतिविधियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए जिनसे बच्चे प्रभावित होते हैं। उन्होंने ऑनलाइन गाली-गलौज, उत्पीड़न, साइबर बुलिंग और लड़कियों को परेशान करने वाले अकाउंट पर सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई।

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सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश याचिका में भी बच्चों को ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, साइबर बुलिंग और उम्र के अनुकूल नहीं होने वाली सामग्री से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों की आवश्यकता बताई गई है। सितंबर में अदालत ने केंद्र से इस मामले पर जवाब भी मांगा था।

CJP का आरोप, इंटरनेट पर आवाज दबाने की कोशिश

CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने अपने बयान में आरोप लगाया कि सरकार की ओर से सोशल मीडिया पर आलोचनात्मक सामग्री को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की आलोचना करने वाली सामग्री हटाई जा रही है और सिस्टम की कमियों को सामने रखने वाले कुछ कंटेंट क्रिएटर्स के अकाउंट भी बंद किए जा रहे हैं।

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इन दावों पर अदालत की ओर से कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है और न ही इन आरोपों को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का हिस्सा माना जा सकता है। इसलिए दीपके के इन बयानों को उनके राजनीतिक आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

जेन जी और जेन अल्फा को लेकर बहस

दीपके ने अपने बयान में जेन जी और जेन अल्फा के बीच सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर तुलना की। उनका कहना है कि जेन जी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को राजनीतिक और सामाजिक सवालों के लिए इस्तेमाल किया। अब जेन अल्फा के सामने भी यही डिजिटल स्पेस है, लेकिन उम्र और सुरक्षा से जुड़े नियमों के कारण उनके सोशल मीडिया इस्तेमाल पर अलग तरह के प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

CJP नेता ने इसे केवल तकनीकी या कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि डिजिटल अधिकार और अभिव्यक्ति से जुड़ा विषय बताया। उनके मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा और उनकी डिजिटल स्वतंत्रता के बीच संतुलन जरूरी है।

सरकार ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ किया जा सकता है और किया जाना चाहिए। सरकार मामले की कानूनी स्थिति की समीक्षा कर रही है। अदालत ने केंद्र को मौजूदा कानूनों के अनुरूप समाधान तलाशने का संकेत दिया है।

अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नाबालिगों को अकाउंट बनाने और उनकी सेवाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति किस कानूनी आधार पर देते हैं। याचिका में उम्र सत्यापन और अभिभावकीय सहमति जैसे सुरक्षा उपायों पर भी जोर दिया गया है।

अभी अंतिम फैसला बाकी

यह कहना सही नहीं होगा कि भारत में नाबालिगों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अंतिम रूप से प्रतिबंध लागू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कानून और नियमों के दायरे में इस विषय पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। मामले की आगे सुनवाई भी होनी है।

ऐसे में आने वाले समय में सरकार की ओर से उम्र सत्यापन, अभिभावकीय सहमति, अकाउंट नियंत्रण और बच्चों के लिए अलग सुरक्षा व्यवस्था जैसे विकल्पों पर फैसला हो सकता है। दूसरी ओर, CJP प्रमुख अभिजीत दीपके के बयान ने इस बहस में डिजिटल अभिव्यक्ति और युवाओं की ऑनलाइन भागीदारी का मुद्दा भी जोड़ दिया है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट