CEC के खिलाफ CJP का प्रदर्शन आज भी जारी, दीपके, सौरव और आशुतोष 23 घंटे बाद रिहा, कोर्ट ने रखी शर्त
CJP Protest: दीपके, सौरव और आशुतोष रिहा, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी चर्चा में है। प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार सुबह रिहा कर दिया गया। दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेशी के बाद तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर छोड़ा गया। पुलिस के अनुसार, तीनों ने 50-50 हजार रुपये का जमानती मुचलका भरा। इस बीच, प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों के रद्द होने से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है।
CJP Protest: एयरपोर्ट से हिरासत में लिए गए थे तीनों नेता
CJP के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। तीनों जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए राजधानी पहुंचे थे। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी और उसके समर्थकों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस का कहना था कि प्रस्तावित जुटान से कानून-व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इसी पृष्ठभूमि में राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर मिली रिहाई
दिल्ली पुलिस के अनुसार, तीनों CJP नेताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।
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अदालत ने उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया। इसके लिए प्रत्येक नेता ने 50 हजार रुपये का जमानती मुचलका भरा। CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी रिहाई की पुष्टि की। इस तरह करीब 23 घंटे की हिरासत के बाद तीनों नेता बाहर आए।
सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाओं पर सुनवाई
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं पहुंची हैं। पहली याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 9 अक्टूबर को सार्वजनिक परिवहन को लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
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याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की अध्यक्ष डी. थारा के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है। आरोप है कि प्रदर्शन के मद्देनजर बड़ी संख्या में ट्रेनों को रद्द किया गया और मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास पर प्रतिबंध लगाए गए, जिससे आम यात्रियों को परेशानी हुई।

दूसरी याचिका में विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी गई है। इसमें दलील दी गई है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार मौलिक अधिकारों से जुड़ा है और एहतियातन हिरासत का इस्तेमाल इस अधिकार को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पुलिस कार्रवाई और नागरिकों की आवाजाही से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
CJP Protest के दौरान मेट्रो और रेल सेवाओं पर असर
शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त कर दी गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार निर्धारित अवधि के लिए बंद किए गए थे। इसके अलावा दिल्ली आने वाली कई ट्रेनों को रद्द या प्रभावित किए जाने की खबरें सामने आईं।
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय सेवाओं को नियंत्रित तरीके से चलाने की जरूरत पर जोर दिया था। अदालत की टिप्पणी के बाद अधिकारियों से प्रतिबंधों की समीक्षा करने और सार्वजनिक सुविधा का ध्यान रखने को कहा गया था। अब इस मामले में कथित आदेश उल्लंघन को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हो रही है।
प्रदर्शन के दौरान 20 से ज्यादा FIR दर्ज होने का दावा
दिल्ली पुलिस के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक, शनिवार के घटनाक्रम को लेकर 20 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन मामलों में सरकारी काम में बाधा डालने, कानून-व्यवस्था प्रभावित करने और पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले में आरोपों और जांच की स्थिति अलग हो सकती है; एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोप साबित होना नहीं है।
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इसके अलावा, सिविक सेंटर के पास प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के एक वायरल वीडियो के मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई है। पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की जांच के बीच संबंधित मामलों के तथ्यों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
ध्रुव राठी भी हिरासत से रिहा
CJP के प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बना रहे यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी शनिवार को गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, उन्हें देर रात रिहा कर दिया गया। पुलिस सूत्रों ने कहा कि यदि वह प्रतिबंधों के बावजूद जंतर-मंतर जाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें दोबारा हिरासत में लिया जा सकता है या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ध्रुव राठी की हिरासत और रिहाई का मामला भी प्रदर्शन से पहले की गई पुलिस कार्रवाई के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। पुलिस का पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रतिबंधों को लागू करने से जुड़ा है, जबकि प्रदर्शन समर्थक शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सवाल उठा रहे हैं।
अभिजीत दीपके की दादी के निधन से जुड़ा भावनात्मक मामला
CJP के अभिजीत दीपके की हिरासत के दौरान महाराष्ट्र के हिंगोली में उनके परिवार ने उनकी दादी सावित्रीबाई शंकरराव दीपके के निधन की जानकारी दी। परिवार के मुताबिक, 85 वर्षीय सावित्रीबाई का शनिवार सुबह निधन हुआ था। अभिजीत की मां अनीता दीपके ने कहा कि यदि उनके बेटे को समय पर रिहा कर दिया गया होता, तो वह अंतिम संस्कार में शामिल हो सकता था।

परिवार ने यह भी कहा कि अभिजीत से संपर्क करने में कठिनाई हो रही थी और उनके पहुंचने तक अंतिम संस्कार रोकने की बात कही गई। पुलिस की ओर से पहले कहा गया था कि अभिजीत को निधन की जानकारी दे दी गई है। इस घटनाक्रम ने हिरासत की अवधि और परिवार से संपर्क के सवाल को भी चर्चा में ला दिया।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, दूसरे दिन भी प्रदर्शन का ऐलान
CJP ने रविवार को भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया था। राजधानी में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई। रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, बस टर्मिनल और दिल्ली की सीमाओं पर निगरानी तेज की गई। होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में सत्यापन तथा सोशल मीडिया पर निगरानी की खबरें भी सामने आईं।
CJP प्रदर्शन को लेकर एक ओर पुलिस कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा का हवाला दे रही है, वहीं प्रदर्शन से जुड़े पक्ष हिरासत और परिवहन प्रतिबंधों पर सवाल उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई इस विवाद का अहम हिस्सा है। अदालत की कार्यवाही, पुलिस की जांच और प्रदर्शनकारियों की आगे की रणनीति से तय होगा कि CJP मामला आने वाले दिनों में किस दिशा में बढ़ता है। फिलहाल तीनों CJP नेताओं की रिहाई के बाद भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद जारी है।
राज कुमार की रिपोर्ट
