दिल्ली में 2001 के बाद सितंबर की सबसे ठंडी रात, समय से पहले आएगी सर्दी, जानें वजह

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दिल्ली की रात सितंबर में सबसे ठंडी, पारा 21°C तक पहुंचा

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। राजधानी दिल्ली में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम ने अचानक करवट ली है। 27 सितंबर की रात राजधानी का न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सितंबर में 2001 के बाद सबसे कम न्यूनतम तापमान रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के आंकड़ों के मुताबिक सफदरजंग में 21°C न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ, जो सामान्य से करीब 2.9 डिग्री कम था।

रात में अचानक बदले मौसम के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या दिल्ली में इस बार सर्दी समय से पहले दस्तक देने वाली है। लगातार बारिश, बादल और ठंडी हवाओं के कारण मौसम में जरूर ठंडक महसूस हो रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को सर्दियों की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी।

दिल्ली की रात क्यों हुई इतनी ठंडी?

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली में अचानक आई ठंडक के पीछे मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी से जुड़ा सक्रिय मौसम तंत्र है। लंबे समय तक सक्रिय रहे डिप्रेशन के कारण देश के कई हिस्सों में व्यापक बारिश हुई। इसके असर से दिल्ली और उत्तर भारत के कई इलाकों में बादल छाए रहे और तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

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लगातार बादल छाए रहने से दिन के समय धरती की सतह को मिलने वाली सौर गर्मी कम हुई। इसके साथ वातावरण में नमी बढ़ी और बारिश का दौर जारी रहा। इन परिस्थितियों ने तापमान को सामान्य से नीचे बनाए रखा।

IMD के अनुसार 27 सितंबर को सफदरजंग में अधिकतम तापमान 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.7 डिग्री कम था। न्यूनतम तापमान 21°C दर्ज हुआ।

रात के तापमान में गिरावट का क्या है कारण?

मौसम विशेषज्ञ देवेंद्र त्रिपाठी के मुताबिक हालिया ठंडक का संबंध बंगाल की खाड़ी से बने लंबे समय तक सक्रिय रहे डिप्रेशन से है। सितंबर-अक्टूबर के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का दौर भी चलता है। इसी संक्रमण काल में मौसम प्रणालियों और हवाओं के पैटर्न में बदलाव देखने को मिलता है।

इस मौसम प्रणाली ने ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बारिश कराई। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में भी इसका प्रभाव देखा गया।

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दिल्ली में बारिश और बादलों के कारण दिन का तापमान तेजी से नीचे आया। इसके बाद रात के तापमान पर भी इसका असर पड़ा। यही वजह है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में राजधानी का मौसम सामान्य दिनों की तुलना में काफी सुहावना और ठंडा महसूस हुआ।

क्या दिल्ली की रात की ठंडक का संबंध El Nino से है?

रात में तापमान में अचानक गिरावट के बाद El Nino को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, उपलब्ध मौसम विश्लेषण के अनुसार दिल्ली में इस समय आई ठंडक को सीधे El Nino से जोड़ना सही नहीं होगा।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा बदलाव का तत्काल कारण सक्रिय मौसम प्रणाली, बारिश, बादल और नमी है। इसे El Nino के कारण समय से पहले आने वाली सर्दी का संकेत नहीं माना जा रहा है।

यानी सितंबर में 21°C तक तापमान पहुंचना असामान्य जरूर है, लेकिन केवल एक या कुछ दिनों की ठंडक से पूरे सर्दी के मौसम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

क्या अक्टूबर की शुरुआत में फिर बढ़ेगा तापमान?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान से संकेत मिलता है कि दिल्ली में यह ठंडक लंबे समय तक कायम नहीं रह सकती। IMD के 27 सितंबर के पूर्वानुमान में 29 सितंबर से मौसम मुख्य रूप से साफ रहने और तापमान बढ़ने का अनुमान दिया गया है। 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को न्यूनतम तापमान करीब 23-24°C तथा अधिकतम तापमान 33-34°C तक रहने का अनुमान है।

इसका मतलब है कि बादल कम होने और धूप बढ़ने के साथ दिल्ली में दिन का तापमान फिर ऊपर जा सकता है। मौसम का यह बदलाव फिलहाल सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव के तौर पर देखा जा रहा है।

दिल्ली की रात फिर गर्म हो सकती है?

मौजूदा मौसम प्रणाली कमजोर होने के बाद उत्तरी मैदानी इलाकों में पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बढ़ने की संभावना है। आसमान साफ होने पर दिन में धूप अधिक प्रभावी होगी और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।

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IMD के स्थानीय पूर्वानुमान में भी 29 सितंबर के बाद दिल्ली के लिए मुख्य रूप से साफ मौसम और तापमान में बढ़ोतरी का संकेत दिया गया है। इससे साफ है कि फिलहाल राजधानी में महसूस हो रही ठंडक को स्थायी बदलाव नहीं माना जा सकता।

क्या समय से पहले आएगी दिल्ली में सर्दी?

यह सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन मौजूदा मौसम को देखते हुए समय से पहले सर्दी आने की पुष्टि नहीं हुई है। सितंबर के अंत में तापमान का 21°C तक पहुंचना जरूर असामान्य है, मगर इसके पीछे एक सक्रिय बारिश प्रणाली की भूमिका स्पष्ट है।

सर्दी की वास्तविक शुरुआत कई मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। केवल सितंबर की एक ठंडी रात के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इस बार दिल्ली में सर्दी जल्दी आ जाएगी।

एक और डिप्रेशन पर नजर

इसी बीच म्यांमार के पास एक और मौसम प्रणाली विकसित हुई है, जिसके उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ने की संभावना है। यह आगे चलकर पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, शुरुआती आकलन में इसके पिछले डिप्रेशन की तुलना में कम प्रभावी रहने की संभावना जताई गई है।

इसका असर बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बारिश के रूप में दिखाई दे सकता है।

दिल्लीवासियों के लिए तस्वीर साफ है। 27 सितंबर की ठंडी रात ने जरूर सर्दी का एहसास करा दिया, लेकिन इसे सर्दियों की शुरुआत नहीं माना जा रहा है। अगले कुछ दिनों में आसमान साफ होने और तापमान बढ़ने की संभावना है। इसलिए दिल्ली की यह असामान्य ठंडी रात फिलहाल एक सक्रिय मौसम प्रणाली के असर के तौर पर देखी जा रही है, न कि समय से पहले आने वाली सर्दी के संकेत के रूप में।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट