पटना में करंट लगने से बुजुर्ग की दर्दनाक मौत, लापरवाही का आरोप, NH-31 पर हंगामा
पटना में करंट लगने से बुजुर्ग की मौत, NH-31 पर ग्रामीणों का हंगामा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में करंट लगने से एक बुजुर्ग की मौत के बाद शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। घटना बाढ़ थाना क्षेत्र के बिचली मलाही गांव की है, जहां पानी में गिरे बिजली के तार की चपेट में आने से सुखो साहू की मौत हो गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और एनएच-31 को जाम कर दिया।
पटना में ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली का तार काफी देर तक पानी में पड़ा रहा और समय रहते बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि टूटे तार को हटाने या बिजली की सप्लाई रोकने के लिए समय पर कार्रवाई होती तो हादसा टाला जा सकता था। प्रदर्शन कर रहे लोग मृतक के परिवार को मुआवजा देने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पटना में सुबह टहलने निकले थे बुजुर्ग
बताया गया कि पटना में सुखो साहू रोजाना की तरह शुक्रवार सुबह भी टहलने के लिए घर से निकले थे। कुछ देर बाद जब वह वापस लौट रहे थे, तभी रास्ते में पानी भरे हिस्से से होकर गुजरने के दौरान करंट की चपेट में आ गए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी के अंदर बिजली का टूटा तार पड़ा हुआ था। पानी में तार डूबे होने के कारण वह ऊपर से दिखाई नहीं दे रहा था। जैसे ही बुजुर्ग पानी से होकर गुजरे, उन्हें बिजली का तेज झटका लगा और वह वहीं गिर पड़े।
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पटना की घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। हादसे की जानकारी मिलते ही गांव में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।
पानी में पड़ा था बिजली का तार, हादसे पर सवाल
इस घटना ने बिजली सुरक्षा और खुले तारों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। ऐसे में यदि बिजली का तार पानी में गिर जाए तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।
पटना के बिचली मलाही गांव की घटना में भी ग्रामीणों का कहना है कि पानी में गिरा तार दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में रास्ते से गुजरने वाले लोगों को खतरे का अंदाजा नहीं था। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग को इसकी जानकारी दिए जाने और समय पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है।
हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह और बिजली विभाग की ओर से किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
पटना में हादसे के बाद ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
पटना में सुखो साहू की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया। लोगों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि परिवार को उचित मुआवजा मिलना चाहिए और घटना के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों के सड़क पर उतरने से कुछ ही देर में एनएच-31 पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने लगी।
लोगों ने कहा कि यदि बिजली के टूटे तार और जलभराव वाले स्थानों की समय रहते जांच की जाती तो दुर्घटना को रोका जा सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग भी की।
NH-31 पर लगा लंबा जाम
शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किए जाने के कारण एनएच-31 पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। हाईवे पर यातायात बाधित होने से यात्रियों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
एनएच-31 पटना और आसपास के कई इलाकों के लिए महत्वपूर्ण सड़क मार्ग है। यहां लंबे समय तक जाम लगने से स्थानीय यातायात के साथ-साथ दूसरे शहरों की ओर जाने वाले वाहनों पर भी असर पड़ सकता है।
जाम की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत शुरू की और सड़क से हटने की अपील की। प्रशासन की कोशिश थी कि ग्रामीणों की मांगों पर बातचीत करते हुए यातायात को जल्द से जल्द सामान्य कराया जाए।
मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीण
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की प्रमुख मांग मृतक के परिवार को मुआवजा देना है। लोगों का कहना है कि परिवार के सदस्य की अचानक मौत से परिजनों के सामने आर्थिक और पारिवारिक संकट खड़ा हो गया है।
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ग्रामीणों ने बिजली विभाग से भी जवाबदेही तय करने की मांग की। उनका कहना है कि बिजली के तारों की नियमित जांच और क्षतिग्रस्त तारों को तत्काल हटाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रशासन की टीम ग्रामीणों से बातचीत कर रही थी। जाम समाप्त कराने के लिए अधिकारियों की ओर से आश्वासन देने की कोशिश की गई। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की मांगों और प्रशासन के बीच सहमति बनने के बाद ही सड़क पर यातायात पूरी तरह सामान्य होने की स्थिति स्पष्ट होगी।
बिजली के खुले तारों से खतरे का सवाल
बिचली मलाही की घटना ने जलभराव वाले इलाकों में बिजली सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़ा किया है। सामान्य स्थिति में सड़क या रास्ते पर गिरा बिजली का तार भी खतरा पैदा करता है, लेकिन पानी में डूबा तार ज्यादा जोखिम पैदा कर सकता है क्योंकि उसकी स्थिति दिखाई नहीं देती।

ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग के लिए जरूरी होता है कि सूचना मिलने पर प्रभावित क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को सुरक्षित तरीके से बंद किया जाए और तार को हटाया जाए। साथ ही लोगों को भी ऐसे स्थानों से दूर रहने की सलाह दी जानी चाहिए।
पटना हादसे में जांच के बाद सामने आएगी जिम्मेदारी
सुखो साहू की मौत के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। यह आरोप जांच का विषय है। घटना की परिस्थितियों, बिजली के तार की स्थिति और बिजली आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा कैसे हुआ और किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।
पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल जाम हटाकर यातायात बहाल कराने के साथ ग्रामीणों की मांगों पर बातचीत करना है। दूसरी ओर, स्थानीय लोग चाहते हैं कि हादसे की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और मृतक के परिवार को नियमानुसार सहायता मिले।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि बारिश और जलभराव के दौरान बिजली के टूटे तारों से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है। सुखो साहू की मौत के बाद अब ग्रामीण प्रशासन से केवल मुआवजे की मांग नहीं कर रहे, बल्कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
राज कुमार की रिपोर्ट
