MBBS परीक्षा में ‘आउट ऑफ सिलेबस’ सवालों पर भड़के छात्र, पटना में भारी बवाल; बापू परीक्षा परिसर के बाहर सड़क जाम

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पटना में भारी बवाल; बापू परीक्षा परिसर के बाहर सड़क जाम

निष्कर्ष भारत संवाददाता: पटना में MBBS परीक्षा के दौरान कथित तौर पर सिलेबस से बाहर के प्रश्न पूछे जाने को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। छात्रों ने गांधी मैदान के सड़क क्षेत्र स्थित बापू परीक्षा परिसर के बाहर जमकर हंगामा किया और सड़क जाम कर दी। प्रदर्शन के कारण आसपास के इलाके में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में ऐसे सवाल पूछे गए, जो निर्धारित पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं थे।

छात्रों का कहना है कि मेडिकल की परीक्षा में एक-एक अंक और प्रत्येक प्रश्न उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि परीक्षा में सिलेबस से बाहर के प्रश्न शामिल किए जाते हैं तो इससे विद्यार्थियों के परिणाम और आगे की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।

बापू परीक्षा परिसर के बाहर छात्रों का प्रदर्शन

पटना के सड़क बापू परीक्षा परिसर में MBBS परीक्षा के बाद छात्रों का आक्रोश देखने को मिला। परीक्षा समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा केंद्र के बाहर जमा हो गए। छात्रों ने कथित तौर पर परीक्षा में पूछे गए कुछ सवालों को निर्धारित सिलेबस से बाहर का बताया और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

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देखते ही देखते छात्रों की संख्या बढ़ने लगी और प्रदर्शन ने सड़क जाम का रूप ले लिया। छात्रों का कहना था कि जब परीक्षा के लिए एक निर्धारित पाठ्यक्रम तय किया जाता है तो प्रश्नपत्र भी उसी के अनुरूप होना चाहिए।

बापू परीक्षा परिसर पटना में बड़े पैमाने पर परीक्षाएं आयोजित करने वाला प्रमुख परीक्षा केंद्र है। यहां विभिन्न प्रकार की ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षाएं आयोजित होती हैं।

सड़क पर उतरे छात्र, यातायात हुआ प्रभावित

प्रदर्शन के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। छात्रों के सड़क पर बैठने और प्रदर्शन करने से कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था बाधित होने की बात सामने आई है। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब जाम में एम्बुलेंस के फंसने की भी जानकारी सामने आई।

आपातकालीन सेवा से जुड़े वाहनों के प्रभावित होने की खबर के बाद प्रशासन के लिए स्थिति को नियंत्रित करना और सड़क पर आवागमन बहाल कराना महत्वपूर्ण हो गया।

पटना में परीक्षा और छात्र आंदोलनों के कारण इससे पहले भी प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। सितंबर 2026 में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े प्रदर्शनों के दौरान भी गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में यातायात बाधित हुआ था।

मौके पर पहुंची पुलिस, छात्रों को समझाने की कोशिश

हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ASP और अगमकुआं थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।

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पुलिस की प्राथमिकता सड़क पर यातायात बहाल कराने और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समझाकर हटाने की रही। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उनकी शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

हालांकि, छात्रों की मुख्य मांग परीक्षा में पूछे गए कथित आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों को लेकर स्पष्ट कार्रवाई और उनके हितों की सुरक्षा से जुड़ी रही।

छात्रों ने परीक्षा बोर्ड और व्यवस्था पर उठाए सवाल

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने परीक्षा आयोजित कराने वाली व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए। छात्रों का कहना है कि मेडिकल जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करते समय निर्धारित पाठ्यक्रम का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

छात्रों की प्रमुख चिंताएं इस प्रकार बताई जा रही हैं—

  • परीक्षा में कथित आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों की जांच हो।
  • प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए।
  • छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए।
  • यदि प्रश्न सिलेबस से बाहर पाए जाते हैं तो उसके लिए जिम्मेदारी तय हो।
  • परीक्षा परिणाम पर ऐसे प्रश्नों के प्रभाव को लेकर स्पष्ट नीति बताई जाए।
  • परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही की जांच की जाए।

‘एक गलती से भविष्य प्रभावित हो सकता है’

MBBS जैसी प्रोफेशनल परीक्षा में छात्र लंबे समय तक तैयारी करते हैं। मेडिकल शिक्षा में प्रत्येक प्रोफेशनल परीक्षा का महत्व होता है और परीक्षा में प्रदर्शन आगे की पढ़ाई तथा करियर से जुड़ा होता है।

इसी वजह से छात्रों का कहना है कि यदि प्रश्नपत्र में निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न शामिल होते हैं तो इसका प्रभाव सभी परीक्षार्थियों पर समान रूप से पड़ना चाहिए और परीक्षा कराने वाली संस्था को इस संबंध में स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

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हालांकि, किसी प्रश्न को वास्तव में ‘आउट ऑफ सिलेबस’ माना जाएगा या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण संबंधित विश्वविद्यालय, परीक्षा बोर्ड या सक्षम शैक्षणिक प्राधिकरण द्वारा प्रश्नपत्र और आधिकारिक सिलेबस की समीक्षा के बाद ही किया जा सकता है।

अब अधिकारियों के फैसले पर नजर

फिलहाल छात्रों के आरोपों और प्रदर्शन के बाद मामले में संबंधित परीक्षा प्राधिकरण की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि प्रश्नपत्र की जांच कराई जाती है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि विवादित प्रश्न निर्धारित MBBS सिलेबस में शामिल थे या नहीं। सड़क

छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें उचित राहत दी जाए। वहीं प्रशासन के सामने सड़क पर सामान्य यातायात बहाल करने के साथ-साथ छात्रों की शिकायत को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की चुनौती है। सड़क

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पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट