सावधान! पटना में नकली बिसलेरी का खुलासा, खाद्य विभाग ने मारा छापा, 2400 लीटर पानी जब्त

पटना

पटना में खाद्य विभाग की छापेमारी में नकली बिसलेरी और गलत लेबलिंग का मामला मिला। हजारों बोतलें जब्त कर नष्ट की गईं, एक लाइसेंस निलंबित।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किए जाने का मामला सामने आया है। खाद्य संरक्षा विभाग की टीम ने शहर और आसपास के इलाकों में पानी बनाने, रखने और बेचने वाले चार प्रतिष्ठानों पर औचक छापेमारी की। जांच के दौरान बिसलेरी के नाम पर डुप्लीकेट पानी मिलने के साथ ही लेबल और लाइसेंस से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। विभाग ने अलग-अलग प्रतिष्ठानों से बड़ी संख्या में पानी की बोतलें जब्त कर नष्ट कीं। कार्रवाई के दौरान एक प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया।

इस अभियान में सबसे गंभीर मामला मनोहरपुर, कचुआरा स्थित एस. हाइड्रेला में मिला। यहां बिसलेरी के नाम से डुप्लीकेट पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर तैयार किए जाने और रखे जाने की बात सामने आई। टीम ने मौके से 1 लीटर की 1,500 बोतलें और 500 मिलीलीटर की 900 बोतलें जब्त कर नष्ट कर दीं। इन दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 2,400 लीटर पानी पर कार्रवाई की गई।

पटना में नकली बिसलेरी का खेल, लेबल पर भी मिली गड़बड़ी

खाद्य संरक्षा विभाग की जांच में एस. हाइड्रेला की बोतलों पर लगे लेबल में भी कई खामियां मिलीं। उत्पाद पर दर्ज पता किसी दूसरे प्रतिष्ठान का था, जबकि लाइसेंस नंबर भी दूसरी फर्म के नाम पर दर्ज पाया गया। इस तरह पैकेजिंग पर दी गई जानकारी और वास्तविक प्रतिष्ठान के बीच अंतर सामने आया।

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पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर खरीदते समय ग्राहक आमतौर पर बोतल के ब्रांड, पैकिंग और लेबल पर दर्ज जानकारी के आधार पर भरोसा करते हैं। ऐसे में यदि किसी उत्पाद पर गलत पता या दूसरे प्रतिष्ठान का लाइसेंस नंबर दर्ज हो, तो उपभोक्ता के लिए उसकी वास्तविक पहचान और उत्पादन से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करना मुश्किल हो सकता है।

टीम को परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। कर्मचारियों के मेडिकल सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा उत्पादन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म की व्यवस्था भी नहीं पाई गई। खाद्य उत्पादन से जुड़े प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई और कर्मचारियों की स्वच्छता से संबंधित नियमों का पालन जरूरी होता है।

इन अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए विभाग ने एस. हाइड्रेला का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। यहां से पानी का नमूना भी जांच के लिए लिया गया है। नमूने की जांच के बाद पानी की गुणवत्ता से संबंधित स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पटना की मां एंटरप्राइजेज में भी मिली पानी की बड़ी खेप

खाद्य संरक्षा विभाग की टीम ने बड़ी पहाड़ी स्थित मां एंटरप्राइजेज में भी छापेमारी की। यहां बिसलेरी पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की बड़ी खेप मिली। विभाग की कार्रवाई के दौरान 1 लीटर की 4,800 बोतलें और 500 मिलीलीटर की 10,368 बोतलें जब्त कर नष्ट की गईं।

दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 15,168 बोतलों पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा विभाग ने जांच के लिए 1 लीटर की 905 बोतलें और 500 मिलीलीटर की 9,216 बोतलों के नमूने भी लिए। इन नमूनों की जांच के जरिए पानी की गुणवत्ता और अन्य जरूरी मानकों की स्थिति का पता लगाया जाएगा।

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यहां मिली बड़ी खेप को देखते हुए विभाग की कार्रवाई का महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मां एंटरप्राइजेज के पानी को नकली घोषित करने या उसका लाइसेंस निलंबित किए जाने की पुष्टि नहीं है। इसलिए इस प्रतिष्ठान से जुड़ी अंतिम स्थिति नमूनों और विभागीय जांच के नतीजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

चार प्रतिष्ठानों पर छापेमारी, अलग-अलग ब्रांडों की जांच

यह कार्रवाई केवल दो प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रही। खाद्य संरक्षा विभाग ने पटना के कुल चार प्रतिष्ठानों में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के उत्पादन, भंडारण और बिक्री की जांच की। इस दौरान अलग-अलग ब्रांडों के पानी की खेप की पड़ताल की गई। जहां जरूरत महसूस हुई, वहां से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए और अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

विभाग का उद्देश्य बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए उत्पादन स्थल से लेकर भंडारण और बिक्री तक की व्यवस्था की जांच की जा रही है। अधिकारियों की नजर इस बात पर भी है कि बोतलों पर दर्ज जानकारी सही हो और उत्पाद तय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा हो।

हालांकि, उपलब्ध विवरण में चारों प्रतिष्ठानों के नाम और प्रत्येक जगह हुई कार्रवाई का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल एस. हाइड्रेला और मां एंटरप्राइजेज से जुड़ी कार्रवाई के आंकड़े ही स्पष्ट रूप से सामने आए हैं।

नकली पानी से कैसे बचें उपभोक्ता, बोतल खरीदते समय रखें ध्यान

पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की बोतल खरीदते समय केवल ब्रांड का नाम देखकर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। उपभोक्ताओं को बोतल पर दर्ज निर्माता या पैकर का नाम, पता, खाद्य लाइसेंस नंबर, पैकिंग की तारीख और अन्य जरूरी जानकारी देखनी चाहिए। बोतल की सील टूटी हुई हो, लेबल अस्पष्ट हो या उस पर दी गई जानकारी संदिग्ध लगे, तो ऐसी बोतल खरीदने से बचना चाहिए।

खास तौर पर गर्मी, यात्रा और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान बोतलबंद पानी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में उपभोक्ता अक्सर जल्दबाजी में पानी खरीद लेते हैं। इसी वजह से पैकेजिंग और लेबल की जांच करना जरूरी है। किसी उत्पाद की गुणवत्ता को केवल उसके ब्रांड नाम या बोतल की बाहरी बनावट से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

पटना में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई से बाजार में सतर्कता

पटना में हुई इस छापेमारी ने पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की बिक्री और गुणवत्ता जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर एस. हाइड्रेला में डुप्लीकेट बिसलेरी और गलत लेबलिंग मिलने के बाद विभाग की निगरानी की अहमियत सामने आई है। एक तरफ बड़ी मात्रा में बोतलबंद पानी जब्त कर नष्ट किया गया, वहीं दूसरी तरफ नमूने लेकर गुणवत्ता की जांच भी शुरू की गई है।

अब इस कार्रवाई के बाद लोगों की नजर पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट और विभाग की आगे की कार्रवाई पर रहेगी। जांच के नतीजे यह स्पष्ट करेंगे कि संबंधित प्रतिष्ठानों में पानी की गुणवत्ता किस स्तर की थी और नियमों के उल्लंघन पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल खाद्य संरक्षा विभाग का अभियान उपभोक्ताओं को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और बाजार में गलत लेबलिंग तथा नियमों के विरुद्ध कारोबार पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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