गंडक ने बढ़ाई मुश्किलें, सारण में टूटा बांध; 6 जिले प्रभावित, जायजा लेंगे सीएम

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गंडक बाढ़ से संकट, सारण में बांध टूटा; 6 जिले प्रभावित

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। गंडक नदी में आए उफान ने उत्तर बिहार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के बाद वाल्मीकिनगर गंडक बराज से छोड़े गए पानी का असर अब डाउनस्ट्रीम इलाकों में दिख रहा है। गंडक का जलस्तर बगहा गेज स्थल पर 91.25 मीटर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। यह 2024 में दर्ज 90.90 मीटर के पिछले रिकॉर्ड से 35 सेंटीमीटर अधिक है।

बाढ़ के दबाव के बीच पश्चिम चंपारण में चंपारण तटबंध के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके बाद गोपालगंज, सारण समेत निचले इलाकों में भी पानी बढ़ने से चिंता बढ़ गई है। सारण के मकेर प्रखंड के बाघा कोला में गंडक नदी पर बना बांध टूटने की सूचना के बाद आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी तेजी से फैलने लगा।

गंडक का रिकॉर्ड जलस्तर, बढ़ा दबाव

जल संसाधन विभाग के अनुसार, 28 सितंबर की सुबह छह बजे वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। बराज पर करीब 13 घंटे तक डिस्चार्ज पांच लाख क्यूसेक से अधिक रहा, जबकि 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी का प्रवाह बना रहा।

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नेपाल में कम समय में हुई भारी बारिश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी हुई वर्षा के कारण नदी का जलस्तर पहले से बढ़ा हुआ था। भारी जलप्रवाह ने गंडक के तटबंधों पर दबाव और बढ़ा दिया। कई स्थानों पर सीपेज, पाइपिंग और ओवरटॉपिंग की स्थिति बनी।

गंडक ने तोड़ा 2024 का रिकॉर्ड

बगहा गेज स्थल पर 91.25 मीटर जलस्तर दर्ज होना इस बाढ़ की गंभीरता को दर्शाता है। वर्ष 2024 में यहां अधिकतम जलस्तर 90.90 मीटर दर्ज किया गया था। इस बार पानी उस रिकॉर्ड से 0.35 मीटर ऊपर पहुंच गया। खास बात यह है कि इस बार बराज से छोड़ा गया अधिकतम प्रवाह 2024 के अधिकतम डिस्चार्ज से कम होने के बावजूद बगहा में नदी ने नया जलस्तर रिकॉर्ड बनाया।

जल संसाधन विभाग के मुताबिक, तटबंधों पर बने दबाव के बीच 169 स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की समस्या को तत्काल कार्रवाई कर नियंत्रित किया गया। इसके बावजूद पश्चिम चंपारण में चंपारण तटबंध को दो स्थानों पर नुकसान पहुंचा।

सारण में बांध टूटने से अफरातफरी

गंडक का पानी आगे बढ़ने के साथ सारण में भी स्थिति चिंताजनक हो गई है। मकेर प्रखंड के बाघा कोला में गंडक नदी पर बना बांध टूटने के बाद आसपास के निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा। बांध टूटने की खबर मिलते ही स्थानीय स्तर पर अफरातफरी का माहौल बन गया।

ग्रामीणों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ी है कि यदि पानी का दबाव लगातार बना रहा तो आसपास के और गांवों में जलभराव हो सकता है। प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं और प्रभावित इलाकों में जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

6 जिलों तक पहुंचा गंडक का असर

गंडक नदी का बढ़ा जलप्रवाह पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली की ओर बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग ने इन डाउनस्ट्रीम इलाकों में तटबंधों और जलस्तर की निगरानी बढ़ाई है।

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पश्चिम चंपारण में कई गांवों और निचले क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पहुंचने की खबर है। गोपालगंज के कई इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। नदी के बढ़ते दबाव के कारण प्रशासन के सामने राहत और बचाव व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।

बाढ़ के बीच प्रशासन अलर्ट

गंडक के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासनिक और जल संसाधन विभाग की टीमें लगातार संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, जहां तटबंधों पर सीपेज या अन्य समस्या सामने आ रही है, वहां तत्काल मरम्मत और सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं।

अपस्ट्रीम में जलस्तर और डिस्चार्ज में कमी आने के संकेत मिले हैं, लेकिन डाउनस्ट्रीम इलाकों में इसका असर बाद में दिखाई दे सकता है। इसलिए नदी किनारे बसे क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

बिहार में फिलहाल बारिश का बड़ा अलर्ट नहीं

गंडक की बाढ़ के बीच मौसम विभाग ने राज्य में व्यापक बारिश को लेकर फिलहाल कोई बड़ा अलर्ट नहीं बताया है। मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है और आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां कम होने की संभावना है। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार 30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक राज्य में कोई मौसम चेतावनी नहीं है।

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हालांकि, उत्तर बिहार की मौजूदा बाढ़ का मुख्य कारण केवल स्थानीय बारिश नहीं है। नेपाल में हुई भारी बारिश और उससे गंडक नदी में बढ़े जलप्रवाह का असर डाउनस्ट्रीम जिलों में देखने को मिल रहा है।

पटना में उमस और गर्मी का असर

राजधानी पटना में फिलहाल भारी बारिश की संभावना नहीं बताई गई है। दिन में धूप निकलने के कारण तापमान बढ़ सकता है, जबकि सुबह और दोपहर के समय नमी के चलते उमस महसूस होने की संभावना है।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून की वापसी के साथ अक्टूबर के शुरुआती दिनों में बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। ऐसे में राज्य के कई हिस्सों में बारिश के बजाय गर्मी और उमस का असर देखने को मिल सकता है।

CM ले सकते हैं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा

गंडक की बाढ़ से बने हालात के बीच मुख्यमंत्री स्तर पर भी स्थिति की निगरानी की जा रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने की तैयारी है। प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने, तटबंधों की सुरक्षा और संवेदनशील इलाकों में बचाव व्यवस्था बनाए रखने पर है।

गंडक के जलस्तर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और कई स्थानों पर तटबंधों को हुए नुकसान ने उत्तर बिहार में चिंता बढ़ा दी है। बराज से पानी का दबाव कम होने के बावजूद डाउनस्ट्रीम जिलों में बाढ़ के प्रभाव को कम होने में समय लग सकता है। ऐसे में आने वाले घंटों में नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट