रोज 5-6 घंटे सोते हैं? दिल की सेहत पड़ेगा असर, जानें कितनी नींद जरूरी
रोज 5-6 घंटे सोते हैं तो जानें नींद की कमी का दिल पर क्या असर पड़ता है
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का दबाव, पढ़ाई और बदलती दिनचर्या लोगों की नींद को लगातार प्रभावित कर रही है। बहुत से लोग रोजाना 5 से 6 घंटे सोने के बाद भी इसे सामान्य मान लेते हैं। उन्हें लगता है कि सप्ताहांत या छुट्टी के दिन ज्यादा सोकर सोने की कमी पूरी की जा सकती है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार नींद केवल शरीर को आराम देने का समय नहीं है। सोते समय शरीर कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है और इसका संबंध हृदय समेत पूरी सेहत से होता है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार सोने की अवधि, उसकी गुणवत्ता और नियमितता का संबंध हृदय स्वास्थ्य, ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़ा पाया गया है। ऐसे में लगातार कम सोने की आदत को केवल थकान या आलस्य समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं माना जाता।
नींद कितने घंटे लेना जरूरी है?
ज्यादातर वयस्कों के लिए हर रात कम से कम 7 घंटे की सोने की सलाह दी जाती है। कभी-कभार एक-दो रात कम सोना अलग स्थिति है, लेकिन अगर रोजाना 5 या 6 घंटे की नींद ही सामान्य दिनचर्या बन गई है तो लंबे समय में इसका स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
हालांकि सोने की जरूरत हर व्यक्ति में थोड़ी अलग हो सकती है। केवल बिस्तर पर बिताए गए घंटों को देखकर सोने की गुणवत्ता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। कोई व्यक्ति 8 घंटे बिस्तर पर रहने के बावजूद बार-बार जागता है तो उसकी नींद उतनी आरामदायक नहीं हो सकती, जितनी लगातार और अच्छी गुणवत्ता वाली 7 घंटे की नींद।
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इसलिए नींद के सोने के साथ यह भी देखना जरूरी है कि सुबह उठने के बाद शरीर कितना तरोताजा महसूस करता है और दिनभर अत्यधिक नींद या थकान तो नहीं रहती।
नींद के दौरान दिल को मिलता है आराम
सोने के दौरान शरीर आराम की स्थिति में जाता है। सामान्य परिस्थितियों में रात में ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, जिससे हृदय और रक्त वाहिकाओं को भी आराम मिलता है। अगर सोने लगातार कम हो या बार-बार टूटती रहे तो यह सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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लंबे समय तक खराब सोने को हाई ब्लड प्रेशर जैसे जोखिम कारकों से जोड़ा गया है। हाई ब्लड प्रेशर आगे चलकर हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए लगातार खराब नींद को केवल दिनभर की थकान मानकर छोड़ देना ठीक नहीं है।
सिर्फ 7-8 घंटे सोना ही काफी नहीं
सोने की सेहत केवल उसकी अवधि पर निर्भर नहीं करती। नियमितता और गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। अगर किसी व्यक्ति को सोने में लगातार बहुत समय लगता है, रात में कई बार नींद खुलती है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी सुबह थकान महसूस होती है तो समस्या सोने की गुणवत्ता से जुड़ी हो सकती है।
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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने सोने की अवधि के साथ नियमित सोने-जागने का समय, नींद का लगातार बने रहना और दिन में अत्यधिक सोने आने जैसी बातों को भी हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जोड़ा है।
यानी सिर्फ यह कहना कि “मैं रोज 8 घंटे बिस्तर पर रहता हूं” पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि उन 8 घंटों में वास्तव में नींद कितनी अच्छी रही।
नींद में बार-बार जागना भी संकेत
रात में बार-बार सोने खुलना, सुबह उठने के बाद सिर भारी लगना या दिनभर सुस्ती रहना कई कारणों से हो सकता है। कभी-कभी तनाव, खराब दिनचर्या या देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत इसकी वजह बन सकती है।
लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहती है तो इसके पीछे सोने से जुड़ी कोई चिकित्सकीय समस्या भी हो सकती है। ऐसे मामलों में लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
खर्राटे और सांस रुकना न करें नजरअंदाज
बहुत तेज खर्राटे आना हमेशा सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। खासकर अगर सोते समय सांस रुकने जैसी स्थिति हो, व्यक्ति अचानक हांफते हुए जागे या रातभर नींद बार-बार टूटती रहे तो स्लीप एपनिया की संभावना पर ध्यान देना जरूरी है।
स्लीप एपनिया में सोते समय सांस की नली बार-बार बाधित हो सकती है। इससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर भी प्रभावित हो सकता है।
CDC के अनुसार स्लीप एपनिया को हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। हालांकि हर खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को स्लीप एपनिया हो, ऐसा जरूरी नहीं है। लगातार लक्षण होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
मोबाइल की वजह से बिगड़ रही नींद?
देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप या दूसरी स्क्रीन देखने की आदत आज वाला है. लगातार स्क्रीन इस्तेमाल करने से सोने का समय पीछे खिसक सकता है और दिमाग को आराम की स्थिति में आने में अधिक समय लग सकता है।
इसलिए सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करना नींद की दिनचर्या सुधारने की दिशा में एक आसान कदम हो सकता है। रात में बहुत देर तक सोशल मीडिया, वीडियो या काम से जुड़े संदेश देखते रहने की आदत को नियंत्रित करना भी मददगार हो सकता है।
नींद सुधारने के लिए क्या करें?
सोने को बेहतर बनाने के लिए रोजाना सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखने की कोशिश करें। सुबह या दिन में कुछ समय प्राकृतिक रोशनी में बिताना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना भी दिन-रात की प्राकृतिक लय को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

सोने से पहले मोबाइल और तेज रोशनी वाली स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। बेडरूम को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखने की कोशिश करें। रात में बहुत भारी भोजन या ऐसी चीजों से बचना भी उपयोगी हो सकता है जो आपकी नींद में बाधा डालती हों।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नींद की समस्या लगातार बनी रहे तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह ली जाए।
5-6 घंटे की नींद को आदत न बनाएं
कभी-कभार 5 या 6 घंटे सोना और लगातार हर रात इतनी ही सोने एक जैसी बात नहीं है। समस्या तब अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है जब कम सोना लंबे समय तक दिनचर्या का हिस्सा बन जाए।
अगर पर्याप्त समय सोने के बावजूद दिनभर अत्यधिक नींद आती है, रात में सांस रुकने या घुटन जैसी समस्या होती है, बार-बार नींद टूटती है या सुबह उठने के बाद भी लगातार थकान रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अच्छी नींद को स्वस्थ जीवनशैली का जरूरी हिस्सा माना जाता है। इसलिए व्यस्त दिनचर्या में काम और मनोरंजन के लिए समय निकालने के साथ पर्याप्त और नियमित नींद के लिए भी समय तय करना जरूरी है। दिल की सेहत के लिए नींद कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की स्वास्थ्य आदतों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राज कुमार की रिपोर्ट
