पटना में मौसमी बीमारियों से बढ़ी परेशानी, अस्पतालों में मरीजों की भीड़, वायरल फ्लू कर रहा परेशान

पटना

पटना में डेंगू, वायरल फ्लू और पेट के संक्रमण से बढ़ी मरीजों की परेशानी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। दिन में तेज धूप और रात में हल्की ठंड के बीच पटना में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। पटना के अस्पतालों में वायरल फ्लू, बुखार, उल्टी-दस्त और पेट दर्द से परेशान मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डेंगू के नए मामले भी सामने आ रहे हैं। वायरल संक्रमण से उबरने के बाद कई लोगों को 10 से 15 दिनों तक खांसी, सुस्ती और कमजोरी की शिकायत बनी हुई है। बच्चों और बुजुर्गों को सामान्य होने में दो सप्ताह तक का समय लग रहा है।

पटना में दशहरा के बाद खानपान में लापरवाही और दूषित पानी के सेवन से टाइफाइड, उल्टी-दस्त तथा पेट में तेज दर्द की समस्या भी बढ़ रही है। वहीं, बदलते तापमान के बीच ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर के मरीजों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। डॉक्टर लोगों को खानपान, साफ-सफाई और नियमित दवाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

पटना में डेंगू और वायरल फ्लू ने बढ़ाई परेशानी

पटना में मौसम में बदलाव के साथ वायरल संक्रमण लोगों को लंबे समय तक परेशान कर रहा है। कई मरीजों में बुखार उतरने के बाद भी खांसी, थकान और शरीर में कमजोरी बनी रह रही है। ऐसे में रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी हो रही है। बच्चों और बुजुर्गों में रिकवरी धीमी रहने से परिवारों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

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डेंगू को लेकर भी सतर्कता जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पटना में 24 घंटे के भीतर डेंगू के नौ नए मरीज मिले हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द और शरीर में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए। डेंगू की आशंका होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

पीएमसीएच की ओपीडी में रोज पहुंच रहे उल्टी-दस्त के मरीज

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) की ओपीडी में उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत लेकर रोजाना करीब 100 से 125 मरीज पहुंच रहे हैं। पटना में त्योहार के बाद कटे फल, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और दूषित पानी से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में पेट में मरोड़, लगातार उल्टी, दस्त और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

गर्मी और उमस के बाद बदलते मौसम में भी शरीर में पानी की कमी को नजरअंदाज करना नुकसानदेह हो सकता है। उल्टी-दस्त के कारण शरीर से पानी और जरूरी लवण निकलने लगते हैं। इससे कमजोरी, चक्कर और पेशाब कम होने जैसी परेशानी हो सकती है।

डॉक्टरों की सलाह है कि उल्टी-दस्त शुरू होते ही ओआरएस का घोल लेना चाहिए। अगर मरीज लगातार उल्टी कर रहा हो, पानी नहीं पी पा रहा हो या पेशाब बहुत कम हो रहा हो, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक गंभीर हो सकता है।

पटना में बीपी और शुगर के मरीज भी रहें सतर्क

पटना में मौसम में उतार-चढ़ाव का असर पहले से ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है। रात में तापमान गिरने और ठंड बढ़ने के दौरान कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। वहीं, डिहाइड्रेशन या संक्रमण की स्थिति में बीपी में गिरावट भी आ सकती है।

संक्रमण के दौरान डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर स्तर अनियंत्रित हो सकता है। इसलिए नियमित रूप से शुगर की जांच करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहना जरूरी है। ब्लड प्रेशर की दवा या इंसुलिन की खुराक अपने मन से कम या ज्यादा करना जोखिम भरा हो सकता है।

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अचानक चक्कर आना, आंखों के सामने धुंधलापन, सीने में भारीपन, सांस फूलना या असामान्य रूप से ज्यादा पसीना आना जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

पटना में ब्रेन हेमरेज के मामले, दवा छोड़ना पड़ सकता है भारी

बदलते मौसम के बीच ब्रेन हेमरेज के मामलों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, आईजीआईएमएस में पांच दिनों के भीतर ब्रेन हेमरेज के 29 मरीज भर्ती हुए हैं। वहीं, पीएमसीएच में रोजाना आठ से दस मरीज पहुंच रहे हैं।

पीएमसीएच के न्यूरो सर्जन डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक, ब्रेन हेमरेज के लिए आने वाले आधे से अधिक मरीज ऐसे हैं, जिन्होंने ब्लड प्रेशर और शुगर की दवाएं लेना छोड़ दिया था। अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और गंभीर स्थिति में ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे में नियमित दवा लेना और समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच कराना बेहद जरूरी है। तेज सिरदर्द, अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, बोलने में परेशानी, चेहरे का एक ओर झुकना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में घरेलू उपचार के भरोसे समय गंवाना खतरनाक हो सकता है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

मौसमी बीमारियों के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य बुखार या थकान जैसे लगते हैं, लेकिन कुछ संकेत गंभीर संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं।

डेंगू और वायरल फ्लू में तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में अकड़न, लगातार खांसी और अत्यधिक कमजोरी हो सकती है। बुखार लंबे समय तक बना रहे या हालत बिगड़ती जाए तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

पेट के संक्रमण में पेट में मरोड़, तेज दर्द, लगातार उल्टी और दस्त के साथ मुंह सूखना तथा पेशाब कम होना डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में शरीर में पानी की कमी को जल्द पूरा करना जरूरी है।

बीपी और शुगर बिगड़ने पर चक्कर, धुंधला दिखना, सीने में भारीपन और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। अचानक गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।

डॉक्टरों की सलाह: खानपान और आराम पर दें ध्यान

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने लोगों को दूषित खानपान से बचने की सलाह दी है। उनके मुताबिक, सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, कटे फल और अस्वच्छ पानी से बनी चीजों से परहेज करना चाहिए। उल्टी-दस्त शुरू होने पर ओआरएस लेना चाहिए और लगातार उल्टी या पेशाब कम होने की स्थिति में अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से संपर्क करना चाहिए।

वायरल फ्लू में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि एंटीबायोटिक दवाएं वायरल संक्रमण का इलाज नहीं करतीं। इन्फ्लुएंजा के कुछ मामलों में एंटीवायरल दवाएं शुरुआती 48 घंटों के भीतर अधिक प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।

बुखार ठीक होने के बाद भी शरीर में कमजोरी बनी रह सकती है। ऐसे में पर्याप्त आराम, तरल पदार्थों का सेवन और धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या में लौटना बेहतर है। जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से बचना चाहिए।

पटना में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए क्या करें?

मौसम में बदलाव के दौरान सुबह और शाम हल्के गर्म कपड़े पहनें। घर और आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों के पनपने की आशंका कम हो। हाथों की सफाई रखें, सुरक्षित पानी पिएं और ताजा बना भोजन ही खाएं। कटे हुए फल लंबे समय तक खुले में रखे हों तो उन्हें खाने से बचें।

बीपी और शुगर के मरीज नियमित निगरानी करें और डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें। बुखार, लगातार खांसी, उल्टी-दस्त या अत्यधिक कमजोरी होने पर जांच कराने में देर न करें।

बदलते मौसम में थोड़ी सावधानी गंभीर परेशानी से बचा सकती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है। समय पर जांच, उचित इलाज और साफ-सुथरे खानपान से मौसमी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट