मुरली मनोहर जोशी ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल, कहा- देश में निष्पक्ष चुनाव हो, बीजेपी की टेंशन बढ़ी
मुरली मनोहर जोशी ने चुनाव पर उठाए सवाल, निष्पक्ष चुनाव पर जोर
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने चुनाव प्रक्रिया और लोकतंत्र को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने मौजूदा राजनीतिक माहौल में चर्चा तेज कर दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की विपक्ष की मांग से जुड़े सवाल पर जोशी ने कहा कि लोकतांत्रिक सरकारों का अस्तित्व तभी मजबूत रहेगा, जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों और ब्यूरोक्रेसी पारदर्शी तरीके से काम करे।
मुरली मनोहर जोशी ने यह टिप्पणी 21वें FICCI हायर एजुकेशन समिट के दौरान पत्रकारों से बातचीत में की। उनसे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर सवाल पूछा गया था।
मुरली मनोहर जोशी ने निष्पक्ष चुनाव पर दिया जोर
चुनाव प्रक्रिया को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मुरली मनोहर जोशी ने लोकतंत्र की बुनियादी व्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों की ओर से, लोगों के लिए और लोगों द्वारा बनाई गई सरकारें खत्म नहीं होंगी, लेकिन इसके लिए चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए।
उन्होंने सरकारों की जवाबदेही और ब्यूरोक्रेसी में पारदर्शिता को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी बताया। जोशी के इस बयान को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्ष SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहा है।
हालांकि, जोशी ने किसी राजनीतिक दल का नाम लेकर मौजूदा सरकार पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाया।
मुरली मनोहर जोशी बोले- संविधान के दायरे में हो काम
मुरली मनोहर जोशी ने संविधान की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में होनी चाहिए। अगर संविधान का उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट को उसकी जांच करनी चाहिए।
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उनके मुताबिक लोकतंत्र को इसी सिद्धांत के आधार पर काम करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि विपक्ष जवाबदेह और जिम्मेदार है तथा उसके पास एक स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम होना चाहिए।
जोशी के बयान का एक अहम पहलू यह रहा कि उन्होंने चुनाव, सरकार और ब्यूरोक्रेसी के साथ-साथ संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़कर देखा।
SIR विवाद के बीच बढ़ी सियासी हलचल
वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच पहले से ही राजनीतिक टकराव चल रहा है। विपक्षी दल प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और कुछ फैसलों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

25 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन तेज किया। रिपोर्ट में SIR प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों से जुड़े दावों का उल्लेख किया गया था।
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इसी मुद्दे को लेकर इंडिया गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत कई मांगें उठा रहे हैं।
दिल्ली में विपक्ष का प्रदर्शन जारी
राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष का प्रदर्शन भी इसी मुद्दे को लेकर जारी है। गुरुवार को प्रदर्शन का तीसरा दिन बताया गया। इससे पहले मंगलवार और बुधवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था।
विपक्ष का आरोप है कि वोटर लिस्ट में बदलाव और SIR की प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच सत्ता पक्ष की ओर से अलग-अलग स्तर पर जवाब दिए जा रहे हैं।
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ऐसे माहौल में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का निष्पक्ष चुनाव और पारदर्शिता पर जोर देना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।
मुरली मनोहर जोशी ने छात्रों पर भी कही बड़ी बात
मुरली मनोहर जोशी ने केवल चुनावी मुद्दे पर ही टिप्पणी नहीं की। उनसे बढ़ते प्रदर्शनों और छात्रों से जुड़े सवालों पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई। उन्होंने छात्रों की जायज मांगों को सहानुभूति के साथ सुनने की जरूरत बताई।
जोशी ने कहा कि छात्रों की उचित मांगों को हमेशा गंभीरता और सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को सही तरीका नहीं माना।
उनका कहना था कि बल प्रयोग से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। अगर कोई समस्या है तो छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए, क्योंकि वे देश के बच्चे हैं।
छात्रों की मांग पर बातचीत की वकालत
भाजपा के वरिष्ठ नेता की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन होते रहे हैं। जोशी ने बातचीत और संवेदनशील रवैये को समाधान का रास्ता बताया।
उनके बयान का संकेत साफ था कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए पहले संबंधित लोगों की बात सुनी जानी चाहिए। खासकर छात्रों के मामले में उन्होंने सहानुभूति और संवाद को प्राथमिकता देने की बात कही।
BJP के लिए क्यों अहम माना जा रहा बयान?
मुरली मनोहर जोशी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय तक पार्टी की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे में चुनाव की निष्पक्षता, सरकार की जवाबदेही और ब्यूरोक्रेसी की पारदर्शिता पर उनकी टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में महत्व दिया जा रहा है।
हालांकि, उनके बयान को मौजूदा सरकार या चुनाव आयोग के खिलाफ सीधा राजनीतिक हमला मानना उचित नहीं होगा। उन्होंने व्यापक लोकतांत्रिक सिद्धांतों की बात की और संविधान के पालन पर जोर दिया।
फिर भी, SIR को लेकर विपक्ष के आंदोलन और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के बीच आया यह बयान निश्चित तौर पर राजनीतिक चर्चा को हवा दे रहा है।
चुनावी व्यवस्था पर बहस के बीच आया बयान
फिलहाल SIR विवाद को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतभेद बने हुए हैं। विपक्ष अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है, जबकि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।
इसी बीच मुरली मनोहर जोशी ने निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार, पारदर्शी ब्यूरोक्रेसी और संविधान के पालन को लोकतंत्र की मजबूती से जोड़ दिया है। छात्रों के प्रदर्शन पर उनकी टिप्पणी ने उनके बयान का दायरा और बढ़ा दिया।
अब देखना होगा कि SIR विवाद और विपक्ष के प्रदर्शन के बीच इस बयान पर भाजपा या अन्य राजनीतिक दलों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
राज कुमार की रिपोर्ट
