नवादा में LIC एजेंट को 6 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट, 25.50 लाख रुपये ठगे
LIC एजेंट से 25.50 लाख रुपये ठगे
निष्कर्ष भारत, संवाददाता-बिहार– बिहार के नवादा में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा बताकर एक एलआईसी एजेंट को कथित तौर पर छह दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के डर में रखा और उनसे 25 लाख 50 हजार रुपये ठग लिए। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने, बैंक खाते फ्रीज करने और जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में तीन बार में लाखों रुपये ट्रांसफर करा लिए। ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने 22 अक्टूबर को नवादा साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
नवादा में LIC एजेंट से 25.50 लाख की साइबर ठगी
मामला नवादा के पोस्टमार्टम रोड निवासी एलआईसी एजेंट किशोरी प्रसाद गुप्ता से जुड़ा है। उनकी शिकायत के मुताबिक, 9 अक्टूबर को उनके मोबाइल पर एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने उन्हें बताया कि सीबीआई कोर्ट ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोषी करार दिया है। साथ ही चेतावनी दी गई कि उनके बैंक खातों में मौजूद रकम सीज कर दी जाएगी और उन्हें जेल जाना पड़ सकता है।
आरोपियों ने कथित तौर पर जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे कहा कि उन्हें अपने पैसे सीबीआई कोर्ट में जमा कराने होंगे। इस तरह सरकारी जांच और गिरफ्तारी का भय पैदा कर ठगों ने पीड़ित को अपने जाल में फंसा लिया।
छह दिनों तक डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर वसूले पैसे
शिकायत के अनुसार, साइबर अपराधियों ने किशोरी प्रसाद गुप्ता को लगातार धमकियां देकर मानसिक दबाव में रखा। इस दौरान उन्हें कथित तौर पर छह दिनों तक डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रखा गया। ठगों ने जांच, गिरफ्तारी और बैंक खातों से जुड़ी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे रकम ट्रांसफर कराई।
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12, 13 और 14 अक्टूबर को तीन अलग-अलग बैंक खातों में कुल 25 लाख 50 हजार रुपये भेजे गए। पहली बार 11 लाख 50 हजार रुपये दिल्ली स्थित बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा के खाते में आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कराए गए।
इसके बाद ओडिशा के भांजा नगर स्थित एक बैंक खाते में सात लाख रुपये भेजे गए। इस तरह दो बार में ही 18 लाख 50 हजार रुपये पीड़ित के खातों से निकल गए।
तीसरी बार में बक्सर के खाते में ट्रांसफर कराए 7 लाख रुपये
दो बार रकम ट्रांसफर कराने के बाद भी साइबर ठगों का लालच खत्म नहीं हुआ। आरोप है कि उन्होंने किशोरी प्रसाद गुप्ता को दोबारा फोन कर कहा कि उनके बैंक खाते में अभी भी सात लाख रुपये बचे हुए हैं। ठगों ने इस रकम को भी जल्द ट्रांसफर करने का दबाव बनाया।
इसके बाद उन्हें बक्सर के सिक्का इंटरप्राइजेज से जुड़ा बैंक खाता नंबर दिया गया। पीड़ित ने उसमें भी सात लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इस तरह तीन अलग-अलग खातों में कुल 25.50 लाख रुपये चले गए।
जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तब उन्होंने साइबर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। मामले में पुलिस अब लेनदेन और संबंधित बैंक खातों की जानकारी के आधार पर जांच कर रही है।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का एक तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ED) या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे वीडियो कॉल या फोन के जरिए गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग और कानूनी कार्रवाई का भय पैदा करते हैं।
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कई मामलों में ठग पीड़ितों को लगातार फोन पर बने रहने के लिए कहते हैं और परिवार या दोस्तों से संपर्क करने से रोकने की कोशिश करते हैं। इसके बाद जांच के नाम पर बैंक खातों की जानकारी हासिल की जाती है या अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया जाता है।
ध्यान रखें: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर किसी को फोन या वीडियो कॉल के जरिए कानूनी रूप से गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। पुलिस या जांच एजेंसी के नाम पर पैसे मांगने वाले कॉल पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए क्या करें?
साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद महत्वपूर्ण है।
- डराने वाले कॉल से सावधान रहें: कोई व्यक्ति खुद को सीबीआई, पुलिस, ईडी या कोर्ट का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी की धमकी दे, तो घबराएं नहीं।
- पैसे ट्रांसफर न करें: किसी कथित जांच, केस खत्म करने या बैंक खाते को सुरक्षित रखने के नाम पर निजी अथवा अज्ञात खाते में रकम न भेजें।
- फोन काटकर पुष्टि करें: संबंधित एजेंसी के आधिकारिक संपर्क माध्यम से जानकारी लें। कॉल करने वाले की दी हुई जानकारी पर ही भरोसा न करें।
- परिवार को जानकारी दें: ठग अक्सर पीड़ित को अकेला रखने और दूसरों से बात न करने का दबाव बनाते हैं। ऐसी स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से तुरंत संपर्क करें।
- तुरंत शिकायत दर्ज कराएं: साइबर ठगी होने पर भारत के साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जल्द शिकायत करने से रकम रोकने या ट्रेस करने की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि इसकी गारंटी नहीं होती।
नवादा की घटना ने फिर बढ़ाई साइबर ठगी की चिंता
नवादा में एलआईसी एजेंट से 25.50 लाख रुपये की कथित ठगी एक बार फिर दिखाती है कि साइबर अपराधी सरकारी एजेंसियों के नाम और कानूनी कार्रवाई के डर का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस मामले में पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग और जेल जाने की धमकी देकर बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई।
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ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि लोग डर के कारण जल्दबाजी में कोई वित्तीय फैसला न लें। किसी भी सरकारी एजेंसी की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें और पैसे मांगने वाले संदिग्ध कॉल की सूचना पुलिस को दें। जागरूकता और समय पर शिकायत साइबर अपराध से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
