पटना से अमेरिकी-ब्रिटिश नागरिकों से ठगी, MBA गिरोह का खुलासा, 4 गिरफ्तार
पटना से अमेरिकी-ब्रिटिश नागरिकों से ठगी, चार साइबर अपराधी गिरफ्तार
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना साइबर ठगी के एक बड़े मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पटना में बैठकर अमेरिकी और ब्रिटिश नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइबर ठगों के एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मुसल्लहपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपितों में तीन एमबीए पास हैं, जबकि एक युवक के पास तकनीकी डिग्री है। गिरोह के सदस्य फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते थे और इसी के जरिए विदेशों में बैठे लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी अमेरिकी इंटरनेशनल कॉल के जरिए अमेरिकी लोगों से संपर्क करते थे। कंप्यूटर या लैपटॉप में तकनीकी खराबी होने का झांसा देकर पहले भरोसा कायम किया जाता था। इसके बाद ऑनलाइन सिस्टम का एक्सेस लेकर कथित तौर पर समस्या ठीक करने के नाम पर संदिग्ध सॉफ्टवेयर और मालवेयर इंस्टॉल कराया जाता था।
वाहन जांच के दौरान मिला पहला सुराग
एएसपी राजकिशोर सिंह के अनुसार, मुसल्लहपुर पुलिस वाहन जांच कर रही थी। रात करीब साढ़े नौ बजे रामपुर रोड पर पुलिस टीम को एक बाइक सवार युवक संदिग्ध नजर आया। पुलिस को देखकर उसने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे पकड़ लिया गया।
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पूछताछ में युवक ने अपना नाम अक्षय कुमार साह बताया। उसकी उम्र 26 वर्ष है और वह राजीवनगर का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान अक्षय ने साइबर ठगी में शामिल होने की बात बताई और गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी दी।
उसकी निशानदेही पर पुलिस ने गोला रोड स्थित विवेक विहार कॉलोनी के एक मकान में छापेमारी की। वहां से भोजपुर के शाहपुर क्षेत्र के महुआ निवासी ओम प्रकाश ठाकुर और औरंगाबाद के श्री कृष्णा नगर अहरी निवासी अभिषेक कुमार को पकड़ा गया। इसके बाद बगल के कमरे से सहरसा के गोलमा निवासी सत्यम कुमार को गिरफ्तार किया गया।
अमेरिकी नागरिकों को ऐसे बनाते थे निशाना
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य निशाना अमेरिकी लोग थे। आरोपी इंटरनेशनल कॉल के माध्यम से अमेरिकी से संपर्क करते थे और खुद को तकनीकी सहायता देने वाली सेवा से जुड़ा बताकर बातचीत शुरू करते थे।
कंप्यूटर या लैपटॉप में वायरस, सिस्टम खराब होने या किसी तकनीकी समस्या का झांसा देकर पीड़ितों को डराया जाता था। इसके बाद समस्या ठीक करने के नाम पर उन्हें ऑनलाइन सिस्टम का एक्सेस देने के लिए तैयार किया जाता था।
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पुलिस की जांच के अनुसार, सिस्टम का एक्सेस मिलने के बाद आरोपित कथित तौर पर एपीके और मालवेयर इंस्टॉल कराते थे। इसके बाद कंप्यूटर सिस्टम को बंद कर दिया जाता था। फिर उसे दोबारा चालू करने या तकनीकी समस्या दूर करने के नाम पर पीड़ितों से डॉलर में रकम वसूली जाती थी।
अमेरिकी डॉलर में वसूली, हवाला से आता था पैसा
गिरोह की ठगी का तरीका केवल फर्जी तकनीकी सहायता तक सीमित नहीं था। पुलिस के मुताबिक, विदेशों से ठगी के जरिए हासिल की गई रकम को हवाला के माध्यम से भारतीय मुद्रा में मंगाया जाता था।
इससे पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने विदेशों में ठगी से हासिल रकम को भारत तक पहुंचाने के लिए अलग चैनल तैयार कर रखा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हवाला के जरिए रकम किन लोगों तक पहुंचती थी और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
छापेमारी में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद
गिरफ्तार आरोपितों के पास से पुलिस ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इनमें दो मोटरसाइकिल, नौ एंड्रायड मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों के सात एटीएम कार्ड और एक लाख नौ हजार रुपये नकद शामिल हैं।
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इसके अलावा पुलिस को चार लैपटॉप, माइक लगे दो हेडफोन, तीन लैपटॉप चार्जर और एक नामी कंपनी का नेट फाइबर भी मिला है। बरामद सामान की जांच के जरिए पुलिस गिरोह की कार्यप्रणाली और विदेशों में किए गए संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।
चार साल से साइबर ठगी का दावा
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने पुलिस को बताया कि वे पिछले करीब चार वर्षों से साइबर ठगी की गतिविधियों में शामिल थे। आरोपितों के अनुसार, उन्होंने शुरुआत में किसी दूसरे गिरोह के लिए काम किया था।

पुलिस के मुताबिक, उस दौरान वे कथित तौर पर सालाना 80 से 90 लाख रुपये तक कमाते थे और रकम गिरोह के सरगना को सौंपते थे। इसी दौरान उनके एक साथी की गिरफ्तारी हो गई। इसके बाद आरोपितों ने अपना अलग गिरोह बना लिया और खुद साइबर ठगी करने लगे।
MBA पास युवकों ने बनाया अमेरिकी ठगी का नेटवर्क
इस गिरोह की एक खास बात यह सामने आई है कि गिरफ्तार चार आरोपितों में तीन एमबीए पास हैं। चौथे आरोपित के पास तकनीकी डिग्री होने की जानकारी सामने आई है। यानी गिरोह में ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें प्रबंधन और तकनीकी जानकारी का अनुभव था।
पुलिस के अनुसार, आरोपितों की अंग्रेजी बोलने की क्षमता भी अच्छी थी। अमेरिकी लोगों से बातचीत के दौरान वे फर्राटेदार अंग्रेजी का इस्तेमाल करते थे। इसी वजह से पीड़ितों को उनके फर्जी तकनीकी सहायता वाले दावों पर भरोसा होने की बात सामने आई है।
अमेरिकी और ब्रिटिश नागरिकों पर थी नजर
जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को निशाना बनाता था। अमेरिकी नागरिकों के अलावा ब्रिटिश नागरिक भी इनके कथित टारगेट में थे। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपितों ने कितने लोगों से संपर्क किया और कितने मामलों में वास्तव में रकम वसूली गई।
गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन उपकरणों से कॉल रिकॉर्ड, ऑनलाइन गतिविधियों, संभावित पीड़ितों और पैसों के लेन-देन से संबंधित सुराग मिलने की उम्मीद है।
पटना में साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच तेज
चार आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुट गई है। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि आरोपितों को विदेशी नागरिकों के मोबाइल नंबर या संपर्क कैसे मिलते थे और इंटरनेशनल कॉल के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था।
इसके साथ ही हवाला नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है। पुलिस बरामद सात एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए वित्तीय लेन-देन से जुड़े सुराग तलाश रही है।
मुसल्लहपुर पुलिस की इस कार्रवाई से पटना में संचालित एक ऐसे साइबर ठगी नेटवर्क का पता चला है, जो अमेरिकी लोगों को तकनीकी सहायता के नाम पर निशाना बना रहा था। फिलहाल चार आरोपित पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनके पास से मिले डिजिटल उपकरणों की जांच के बाद गिरोह के नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।
राज कुमार की रिपोर्ट
