इन 24 कॉलोनियों पर नगर निगम की नजर, आवासीय मकान में दुकान-दफ्तर चलाने वालों पर होगी कार्रवाई
पटना की 24 आवासीय कॉलोनियां नगर निगम के रडार पर हैं
निष्कर्ष भारत संवाददाता- पटना में आवासीय इलाकों में मकान या परिसर का इस्तेमाल व्यावसायिक और अन्य गैर-आवासीय गतिविधियों के लिए करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पटना नगर निगम ने ऐसे मामलों को चिह्नित करने और कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। मास्टर प्लान-2031 में दर्ज आवासीय क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है। इन इलाकों में नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधियां मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
पटना नगर निगम के सर्वे में आवासीय क्षेत्रों में गैर-आवासीय या व्यावसायिक इस्तेमाल के हजारों मामले सामने आए हैं। निगम ने संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष रखने का अवसर भी दिया है।
24 आवासीय कॉलोनियां नगर निगम के रडार पर
मास्टर प्लान-2031 में दर्ज राजधानी की 24 प्रमुख आवासीय कॉलोनियां अब निगम की निगरानी में हैं। इनमें बिहार सरकार की 11, केंद्र सरकार की 3 और निजी क्षेत्र की 10 कॉलोनियां शामिल हैं।
बिहार सरकार की कॉलोनियों में राजवंशी नगर, शास्त्री नगर, गर्दनीबाग, श्रीकृष्ण पुरी, पाटलिपुत्र कॉलोनी, कंकड़बाग कॉलोनी, बहादुरपुर कॉलोनी, राजेंद्र नगर कॉलोनी, हनुमान नगर, छज्जूबाग और सीडीए कॉलोनी शामिल हैं।
केंद्र सरकार की कॉलोनियों में पीएनटी कॉलोनी, राजस्व कॉलोनी और आरबीआई कॉलोनी का नाम शामिल है।
निजी कॉलोनियों में आशियाना नगर, कृषि नगर, पुलिस कॉलोनी, बीएम कॉलोनी, एजी कॉलोनी, राजीव नगर, बुद्धा कॉलोनी, श्रीकृष्ण नगर (आईएएस कॉलोनी), आनंदपुरी और एमएमए फ्लैट कॉलोनी शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में भूमि उपयोग और भवनों के वास्तविक इस्तेमाल की जांच के बाद आगे की कार्रवाई का फैसला किया जाएगा।
हजारों संपत्तियों को जारी हो चुका है नोटिस
पटना नगर निगम ने आवासीय संपत्तियों के कथित गैर-आवासीय इस्तेमाल के मामलों में बड़े पैमाने पर नोटिस जारी किए हैं। अगस्त में सामने आई निगम की कार्रवाई के अनुसार करीब 26,746 मामले सर्वे में चिह्नित किए गए थे। निगम ने संबंधित संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।
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नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नोटिस पाने वाले संपत्ति मालिकों की आपत्तियों, दस्तावेजों और अन्य दावों की सुनवाई कर नियमों के अनुसार मामलों का निपटारा किया जाए।
पटना की मेयर को भी मिल चुका है नोटि
इस कार्रवाई के दायरे में पटना की मेयर सीता साहू भी आ चुकी हैं। नगर निगम ने उनके आवासीय परिसर के कथित गैर-आवासीय इस्तेमाल को लेकर नोटिस जारी किया था।
हालांकि, उनके परिवार की ओर से संबंधित परिसर का इस्तेमाल आवासीय होने की बात कही गई थी। इससे साफ है कि नोटिस जारी होना अपने आप में उल्लंघन साबित होना नहीं है। संबंधित पक्ष को अपना जवाब और दस्तावेज देने का अवसर दिया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सख्ती
आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निकायों को नियमों का पालन कराने और उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हालिया निर्देशों में आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर सीलिंग की बात कही गई है।
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इसी के बाद पटना नगर निगम ने अलग-अलग अंचलों में सर्वे कराया और ऐसी संपत्तियों को चिह्नित किया जहां स्वीकृत भूमि उपयोग से अलग गतिविधियां चलने की जानकारी मिली।
हर नोटिस का मतलब कार्रवाई तय होना नहीं
निगम की ओर से नोटिस मिलने के बाद संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर नोटिस वाली संपत्ति पर तुरंत सीलिंग या दूसरी कार्रवाई होगी।
नगर निगम के अधिकारी दस्तावेज, स्वीकृत नक्शा, भूमि उपयोग और मौके पर चल रही गतिविधि समेत अलग-अलग पहलुओं की जांच करेंगे। जिन मामलों में स्थिति स्पष्ट होगी, उनमें नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं जिन मामलों में स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, उनकी अलग से समीक्षा की जाएगी।
पटना में सबसे ज्यादा जमीन आवासीय उपयोग की
मास्टर प्लान के अनुसार पटना नगर निगम क्षेत्र की कुल 104.22 वर्ग किलोमीटर जमीन में करीब 49.56 वर्ग किलोमीटर हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए दर्ज है। यह कुल क्षेत्रफल का लगभग 47.55 प्रतिशत है।
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इसके बाद खाली या कृषि उपयोग की जमीन करीब 18.40 वर्ग किलोमीटर है। सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक उपयोग में करीब 10.61 वर्ग किलोमीटर, परिवहन और सड़क के लिए 6.15 वर्ग किलोमीटर तथा व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 4.65 वर्ग किलोमीटर जमीन दर्ज है।
इस भूमि उपयोग व्यवस्था के कारण आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच निर्धारित नियमों का पालन महत्वपूर्ण हो जाता है।
किन मामलों में हो सकती है सीलिंग?
यदि किसी क्षेत्र को स्पष्ट रूप से आवासीय घोषित किया गया है और वहां स्वीकृत उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि संचालित होती पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्पष्ट उल्लंघन वाले मामलों में सीलिंग जैसी कार्रवाई का प्रावधान लागू हो सकता है।
वहीं जिन मामलों में भूमि या भवन के इस्तेमाल की श्रेणी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, वहां दस्तावेजों और नियमों की समीक्षा के बाद निर्णय लिया जाएगा।
पांच सदस्यीय समिति भी कर रही है मामले की समीक्षा
इस पूरे मामले के समाधान के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 25 अगस्त को पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी कर रहे हैं।
नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश कुमार मिश्र को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव और विधान पार्षद संजय कुमार सिंह समिति के सदस्य हैं। समिति से इस मामले का अध्ययन कर व्यावहारिक और जनहित से जुड़े समाधान सुझाने की अपेक्षा की गई है।
संपत्ति मालिकों की बढ़ी चिंता
नगर निगम की कार्रवाई के बाद उन लोगों की चिंता बढ़ी है जिन्होंने आवासीय इलाकों में अपने मकान या परिसर में दुकान, कार्यालय या अन्य गैर-आवासीय गतिविधियां शुरू कर रखी हैं।
हालांकि, अंतिम कार्रवाई संबंधित संपत्ति के दस्तावेज, मास्टर प्लान, स्वीकृत उपयोग और मौके की स्थिति की जांच के बाद ही तय होगी। इसलिए नोटिस पाने वाले संपत्ति मालिकों के लिए अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज निगम के सामने रखना महत्वपूर्ण होगा।
अब समिति और निगम की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल पटना में आवासीय क्षेत्रों के गैर-आवासीय इस्तेमाल का मामला नगर निगम और राज्य सरकार दोनों के स्तर पर विचाराधीन है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नियमों का पालन कराने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से इन इलाकों में रह रहे और कारोबार कर रहे लोगों की स्थिति को लेकर व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत है।
आने वाले दिनों में पांच सदस्यीय समिति की सिफारिशों और नगर निगम की जांच के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि किन मामलों में राहत मिलती है और किन संपत्तियों पर नियमों के तहत कार्रवाई आगे बढ़ती है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
